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पीएम मोदी को ब्रांड एंबेसडर बताने वाला पेटीएम भी भगवा एजेंडा फैलाने में शामिल

कोबरा पोस्ट ने अपने बहुचर्चित स्टिंग ‘ऑपरेशन 136′ की दूसरी क़िस्त कल रिलीज़ कर दी इसमे भास्कर वाला स्टिंग इसलिए रिलीज नही किया गया क्योंकि उस पर अदालत ने स्टे दे दिया है।

बहरहाल कल जो वीडियो यूट्यूब पर रिलीज किये गए वह सभी देखने लायक है , पार्ट 1 ओर पार्ट 2 को यदि मिला लिया जाए तो आप पायेंगे कि देश के लगभग सभी प्रमुख मीडिया हाउस किस तरह से चंद रुपयों के लिए पत्रकारिता जैसे पवित्र माने जाने वाले पेशे की सरे बाजार इज्जत उतारने को आसानी से राजी है।

मीडिया संस्थानों से जुड़े और उनमें रूचि रखने वाले सभी मित्रों से आग्रह हैं कि बड़े मीडिया संस्थानों के मार्केटिंग मैनेजर आपकी कलम का किस तरह सौदा करते हैं एक बार जरूर देखें।

दरअसल सभी प्रतिष्ठानो के यहाँ कोबरापोस्ट के रिपोर्टर पुष्प शर्मा ने हिंदुत्व’ एजेंडा चलाने के नाम पर करोड़ों रूपए के विज्ञापन का प्रलोभन दिया ओर सब के सब इस बात के लिए तैयार दिखे।

जिसे देश का सबसे प्रतिष्ठित मीडिया समूह माना जाता हैं ऐसे टाइम्स ऑफ़ इंडिया ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर विनीत जैन ने ५०० करोड़ के विज्ञापन लेकर हिंदुत्व एजेंडा चालने पर हामी भर दी। लेकिन वो अरबों रूपए कैश में लेने को तैयार नहीं हुए. जब संघ के नेता का वेश धारण किये रिपोर्टर ने जैन से कहा कि वो नकद पैसा विदेश में ले लें तो टाइम्स ग्रुप के मालिक का कहना था कि अगर वो इस नकद पैसे को अम्बानी या अडानी को दे दें तब वो किसी डील के तहत ये पैसा इन उद्योगिक घरानो से ले लेंगे।

टाइम्स ग्रुप के टाइम्स ऑफ इंडिया के अलावा इस स्टिंग ऑपरेशन में इंडिया टुडे, हिंदुस्तान टाइम्स, जी न्यूज, नेटवर्क 18, स्टार इंडिया, ABP न्यूज, दैनिक जागरण, रेडियो वन, रेड एफएम, लोकमत, ABN आंध्रा ज्योति, टीवी 5, दिनामलार, बिग एफएम, के न्यूज, इंडिया वाइस, द न्यू इंडियन एक्सप्रेस, MVTV और ओपन मैगजीन जैसे मीडिया समूह को बेनकाब किया गया हैं लेकिन इस लिस्ट में सबसे अधिक चौकाने वाला नाम है PAYTM का…….

इस सनसनीखेज स्टिंग ऑपरेशन में देश की अग्रणी मोबाइल बैंकिंग कंपनी पेटीएम के मालिक ने ऑन कैमेरा यह स्वीकार किया है कि पेटीएम ने PMO के आदेश पर उपभोक्ताओं का निजी डाटा सरकार को लीक किया है।

लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नही है पेटीएम के मालिक विजय शेखर शर्मा के भाई अजय शेखर शर्मा जिस तरह से इस वीडियो में आरएसएस के साथ अपने संबंधों का बढ़चढ़ कर वर्णन कर रहे है वह वाकई देखने लायक है।

पुष्प शर्मा जो आरएसएस के एजेंडे के तहत कार्य करने वाले एजेंट बने हैं उनसे अजय शेखर पूछते हैं कि “संगठन को सामने नहीं लाएंगे ? मैं तो संघ से बहुत जुड़ा हुआ हूं” इस एक वाक्य के जरिए अजय शेखर संघ से अपने जुड़ाव का खुलासा करते हैं।

आगे अजय शेखर अरुण कुमार, कृष्णा गोपाल, एस के मिश्रा और यहां तक ​​कि शिव राज चौहान से भी अपनी नजदीकियों के बारे में बताते हैं। अजय शेखर बताते है कि उनकी संघ के इन सभी बड़े नेताओं से बातचीत है, और उनसे व्यावसायिक रिश्ते भी है, “संघ में centre में मिला हुआ हूं अरुण कुमार जी, प्रफुल केल्कर जो एडिटर… मतलब मेरे कभी discussion में ये बात आई नहीं निकलकर जो बात आप बोल रहे हो मतलब मेरे हर तरह के discussion होते हैं।”

अजय शेखर बातों बातों मे यहाँ तक बोल जाते हैं कि पंचजन्य के संपादक केलकर उनके अच्छे मित्र हैं और कहते हैं कि “अरे मेरी दोस्ती तो उनसे दोस्ती का मतलब आप अगर पंचजन्य को उठाएंगे ना तो उसमें पेटीएम के एड दिखेंगे आपको..आप देखना कभी जाके आपको दिख जाएगा…वो उनके कहने से करे हैं हमने”

अंडर कवर रिपोर्टर बने पुष्प शर्मा अजय से गुरुजी की वीडियो PAYTM पर अपलोड करने के लिए आग्रह करते हैं। इसपर अजय शेखर पुष्प को आश्वस्त कराते हुए कहते हैं कि “नहीं नहीं वो सब हम कर देंगे अगर RSS कहेगा क्योंकि RSS तो हमारे ब्लड में है” आगे अजय शेखर बताते हैं कि वो ऐसा क्यों कर रहे हैं “मैं पूछूंगा करना है तो फिर उनको बताकर करेंगे हम भी तो अपने नंबर बनाएं सीधी सी बात है जब इतना कर चुके हैं तो करना ही क्या है।”

अब आप खुद समझ सकते है कि कैसे पेटीएम इतनी जल्दी सफलता की सीढ़ियां कैसे चढ़ गया,……… कैसे ओर क्यो अप्रैल 2015 में पेटीएम ने भारतीय रेलवे के साथ समझौते किया, जिसमें पेमेंट वॉलेट टिकटिंग से संबंधित transactions के लिए स्वीकार्य था, जो मौका SBI जैसे सरकारी बैंक को सबसे पहले मिलना चाहिए था,

कैसे ओर क्यो पेटीएम अपने विज्ञापनों में पीएम मोदी को ब्रांड एम्बेस्डर के तौर पर लगातार प्रस्तुत करता रहा………

कैसे ओर क्यो नोटबन्दी जैसा डिजास्टर स्ट्रोक पेटीएम के लिए जीवनदायी साबित हुआ।

क्योंकि उसे सब पहले से पता था उसकी तैयारियां पहले से ही थी , मोदी सरकार के हर मूव की पेटीएम को पहले से खबर थी आप भले ही कुछ और न देखे लेकिन यह स्टिंग आप जरूर देखिएगा।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। ये लेख मूलत: गिरीश मालवीय के फेसबुक पोस्ट में प्रकाशित किया गया है।)

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