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सोशल मीडिया पर पाबंदी, बहुजन आवाज पर हमला…

social media ban is attack on bahujan voice

आज का दौर जनचेतना का दौर है। लोग गुलामी की जंजीरों से बाहर निकलकर आजादी की सांस लेना चाहते हैं। समाज अपने आप को प्रगतिशील समाज बनाने में लगा हुआ है लेकिन शोषक वर्ग को यह बात कतई मंजूर नहीं है कि शोषित समाज स्वतंत्र हो सके। यही वजह है कि शोषक वर्ग हमेशा से समाज को अपने कब्जे में रखे रहना चाहते हैं। इस लोकतांत्रिक युग में लोग आजादी की मांग कर रहे हैं। सोशल मीडिया के आ जाने से आम अवाम, मजदूर, आधी आबादी, वंचित उपेक्षित बहुजन समाज को एक ताकत मिली है क्योंकि मुख्यधारा की मनुवादी मीडिया पूंजीपतियों के दलाल बन कर अपने आकाओं की दलाली करने में व्यस्त हैं। पहले जनता को अपनी बात कहने के लिए कोई मंच न होने की वजह से किसी मीडिएटर की जरूरत होती थी लेकिन आज कोई भी व्यक्ति Facebook, WhatsApp, YouTube, Blog, Email, Website…….. आदि अकाउंट बनाकर अपने विचार पूरी दुनिया के समक्ष रख सकता है। सोशल मीडिया लोगों के लोकतांत्रिक अधिकारों को बहाल करने में अपनी प्रमुख भूमिका निभा रहा है। आज मुख्यधारा की मीडिया से उपेक्षित बहुजन समाज अपने विचार को पूरी दुनिया के समक्ष बहुत ही बेबाकी ढंग से रख रहा है।

आस्था, ढोंग, पाखंड, भविष्यवाणी की गाथा गाने में लीन न्यूज़ चैनलों को बहुजन समाज की समस्याओं से कोई परवाह नहीं। उच्च दर्जे के AC कमरों में बैठकर एंकर झारखंड, छत्तीसगढ़ के निर्दोष आदिवासियों को नक्सली करार देते हैं लेकिन एक आदिवासी नक्सली क्यों बनता है इसपर कभी चर्चा नहीं होती। बड़े बड़े TV के एंकर फुटपाथ के किनारे भीख मांग रहे भिखारियों के गरीबी पर भाषण देते हैं लेकिन धन और धरती के बंटवारे पर खामोश रहते हैं। राष्ट्रवाद के आड़ में भारत माता, गौ माता, गंगा माता का नाम लेते हुए एससी, एसटी ओबीसी और अल्पसंख्यक समाज के हितों की बात करने वालों को देश विरोधी करार देते हैं। ऐसे में बहुजनों को देश में चल रही इस ब्राह्मणवादी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए सोशल मीडिया एक बेहतर मंच नजर आता है। लेकिन कब तक ! धीरे धीरे सोशल मीडिया भी मनुवादियों के हाथ की कठपुतली बनती जा रही है।

जी हां, मनुवादियों की फेहरिस्त में Facebook India का भी नाम जुड़ता हुआ नजर आ रहा है। अब बहुजन समाज का प्रतिनिधित्व कर रही न्यूज़ चैनल नेशनल दस्तक और न्यूज़85.इन Facebook India के मनुवादी अधिकारियों के इस निरंकुश रवैए का शिकार हुई है। सच्चाई को सामने देखकर अपनी हताशा को व्यक्त करते हुए Facebook India ने नेशनल दस्तक को फेसबुक पर कोई भी लिंक अपलोड करने से रोक दिया गया है। नेशनल दस्तक लिखता है कि “मंगलवार 4 जुलाई से Facebook इंडिया की तरफ से नेशनल दस्तक के फेसबुक पेज पर यह दिखाया जा रहा है कि आपको आपके फेसबुक पेज से लिंक शेयर करने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। Facebook India के अधिकारियों ने बगैर सूचित किए नेशनल दस्तक को फेसबुक पेज पर लिंक शेयर करने से रोक दिया है।” न्यूज़ लिंक अपलोड किए जाने से रोके गए चैनल न्यूज़85.इन के संपादक अनुराग यादव जी कहते हैं “जो भी सामाजिक न्याय की बात करेगा वह सत्ताखोर मनुवादियों की नज़र में आ जाएगा। अंततः अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए वे आपको रोकने में लगा देंगे।” यहां मनुवादियों की बौखलाहट स्पष्ट नजर आ रही है। वरिष्ठ पत्रकार दिलीप सी मंडल भी इशारा करते हैं कि बहुजनों को निराश होने की जरूरत नहीं है। पुराने समय में भी वे आपकी जीभ काटते थे।

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सचमुच उन्हें सवाल से बहुत डर लगता है। अगर आप सवाल करेंगे तो यकीनन मनुस्मृति का पोषण कर रहे ब्राह्मणवादियों के निशाने पर आना तय है। वह आपको बोलने से रोकेंगे, बोलने से नहीं रोक पाए तो लिखने से रोकेंगे, लिखने से नहीं रोक पाए तो रिपोर्ट पर रिपोर्ट करेंगे, अगर रिपोर्ट पर रिपोर्ट करने से कुछ नहीं कर पाते हैं तो ऊपर बैठे हुए अपने अधिकारी आकाओं के पास शिकायत करेंगे और इन आकाओं को तो इसी मौके का इंतजार होता है। वे बिना वजह बताए आपकी फेसबुक अकाउंट को ब्लॉक कर देंगे। आप ज्यादा से ज्यादा अपील दर्ज करेंगे लेकिन उस अपील का असर तभी होगा जब आपके पास बेहतर जनसमर्थन होगा। नहीं तो Learn more, Learn more का ऑप्शन दिखाते रहेंगे बस। खैर कुछ भी हो जाए पर वजह नहीं बताएंगे। फेसबुक ने खुद मेरी अब तक छः अकाउंट को ब्लॉक कर दिया है। मेरा फेसबुक अकाउंट क्यों ब्लॉक किया गया, मुझे आज तक वजह नहीं बताया गया।

लोकतंत्र में लड़ाई विचारधारा की होती है। सहमति-असहमति तो हमारे जिंदा होने का प्रमाण है लेकिन किसी को बोलने से रोक दिया जाना यह मनुस्मृति से प्रेरित संस्कृति का परिचायक है। खैर अंबेडकरवाद के इस युग में मनुस्मृति और मनुस्मृति का पोषण कर रहे सत्ताखोर हमारी आवाज पर पाबंदी नहीं लगा सकते हैं। वे नेशनल दस्तक, नेशनल जनमत, न्यूज़85.इन, जनसंघर्ष.इन, भीम दस्तक जैसे अनेक सभी बहुजन मीडिया को नहीं रोक सकते हैं क्योंकि यह न्यूज़ चैनल हमारी आवाज हैं। गौरतलब है कि बहुत ही कम समय में नेशनल दस्तक और नेशनल जनमत ने अपने आप को मुख्यधारा की मीडिया से अलग करते हुए एक विकल्प के रुप में प्रस्तुत किया है। यह चुनौती केवल नेशनल दस्तक को नहीं है। यह चुनौती बहुजन एकता पर की गई चुनौती है। यह चुनौती संवैधानिक लोकतंत्र पर की गई चुनौती है। बहुजनों, अपनी इस आवाज को थमने मत देना। हम मार्क जुकरबर्ग तक जाएंगे। हम हमारा प्रतिनिधित्व कर रहे किसी भी चैनल की आवाज को रुकने नहीं देंगे क्योंकि मेरा मानना है कि जिस समाज के पास अपनी मीडिया नहीं होती वह समाज बेजुबान होता है।

(लेखक भारतीय मूलनिवासी संगठन के राष्ट्रीय महासचिव हैं।)

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