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दलित जज कर्णन ने मुख्य न्यायधीश सहित सुप्रीम कोर्ट के 8 जजों की विदेश यात्रा पर लगाई रोक

नई दिल्ली। कलकत्ता उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति सी एस कर्णन ने शुक्रवार को एयर कंट्रोल अथॉरिटी, नई दिल्ली को निर्देश दिया है कि वह भारत के मुख्य न्यायाधीश और सात सुप्रीम कोर्ट के जजों को उनके खिलाफ मामलों के निपटारे तक विदेश यात्रा करने की अनुमति न दें। सीएस कर्णन ने यह आदेश अपने घर रोजडेल टावर्स, न्यू टाउन पर ही शिफ्ट की गई अदालत में पास किया है।
13 अप्रैल को न्यायमूर्ति कर्णन ने अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 के सेक्शंस के तहत मामले को रजिस्टर करने का “आदेश” जारी किया था। ये आदेश भारत के मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर और सुप्रीम कोर्ट के छह अन्य न्यायाधीशों जस्टिस दीपक मिश्रा, जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, मदन बी लोकुर, पिनाकी सी घोस और कुरियन जोसेफ के खिलाफ था। उन्होंने 28 अप्रैल को कोलकाता स्थित अपने आवासीय अदालत में सातों न्यायाधीशों को कोर्ट के समझ उपस्थित रहने को कहा था।

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आपको बता दें कि जस्टिस खेहर और छह अन्य न्यायाधीशों ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की थी और 31 मार्च को कोर्ट के समक्ष पेश होने के लिए उन्हें बुलाया था। सात न्यायाधीश संविधान पीठ ने न्यायमूर्ति कर्णन के खिलाफ जमानती गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 31 मार्च को सुनवाई के दौरान, पीठ ने खुलासा किया कि न्यायमूर्ति कर्णन ने 27 मार्च को प्रधानमंत्री मोदी को एक पत्र भेजा था इस पत्र में उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कुछ जजों पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था। उन्होंने बाकायदा ऐसे 20 जजों के नामों की सूची भी प्रधानमंत्री दी थी।
इस पर फरवरी में सुप्रीम कोर्ट ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया और छह अन्य जजों ने न्यायपालिका पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाने वाले जस्टिस कर्णन को न्यायिक अवमानना के मामले में समन जारी किया था। जिस पर सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को लिखे पत्र में जस्टिस कर्णन ने कहा था कि ऊंची जाति के जज अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग के जज से मुक्ति चाहते हैं।
उन्होंने कहा था कि एक दलित जज को अवमानना नोटिस जारी करना अनैतिक है और अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति अधिनियम के खिलाफ है। जस्टिस कर्णन ने यह भी कहा था कि ‘संविधान पीठ हाईकोर्ट के कार्यरत जज के खिलाफ स्वत: संज्ञान लेते हुए अवमानना नोटिस जारी नहीं कर सकती। मेरा पक्ष सुने बिना मेरे खिलाफ ऐसा आदेश कैसे जारी किया जा सकता है। इससे जाहिर होता है कि पीठ मुझसे द्वेष भावना रखती है। अवमानना नोटिस जारी करने से मेरी समानता और प्रतिष्ठा का अधिकार प्रभावित हुआ है और साथ ही यह प्रिंसिपल ऑफ नेचुरल जस्टिस के भी खिलाफ है।’
आपको बता दें कि जस्टिस सीएस कर्णन इस मामले में बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती से भी मिल चुके हैं। यहां उन्होंने अपने साथ हो रही ज्यादती को बयां किया था। इसके बाद मायावती ने उनका साथ देने का वायदा किया था।
संपादन- भवेंद्र प्रकाश

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