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भाजपा की ‘धार्मिक कट्टरवाद’ की राजनीति से भुखमरी, बेरोजगारी की समस्या दूर नहीं होगी- मायावती

लखनऊ। बीएसपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती जी ने उत्तर प्रदेश में पार्टी संगठन में जरूरी फेरबदल करके यहाँ शीघ्र ही होने वाले शहरी निकाय के चुनाव में पूरी तैयारी के साथ लड़ने का कार्यक्रम आदि तय करने के बाद दूसरे प्रदेशों में पार्टी संगठन के कार्यकलापों की समीक्षा करने के क्रम में आज यहाँ झारखण्ड राज्य में पार्टी की स्थिति तथा वहाँ सर्वसमाज में जनाधार को बढ़ाने के कार्यों की समीक्षा की।

इस बैठक में झारखण्ड राज्य में बीएसपी के वरिष्ठ व जिम्मेवार पदाधिकारियों ने भाग लिया। उन लोगों ने झारखण्ड में पार्टी की गतिविधियों व सक्रियता की अपनी रिपोर्ट पेश की तथा बताया कि बीएसपी के तत्वावधान में ईवीएम के माध्यम से उत्तर प्रदेश व उत्तराखण्ड राज्यों में हुई चुनावी धांधली के खिलाफ गत दिनांक 11 अप्रैल सन् 2017 को राज्य के मुख्यालय पर सफल धरना-प्रदर्शन आयोजित किया गया। उन्होंने बताया कि भाजपा द्वारा वोटिंग मशीन में गड़बड़ी करके चुनाव जीतने की आशंका आमजनता में काफी प्रबल होती जा रही है, जिसका समुचित समाधान देश के लोकतन्त्र के हित में आवश्यक है।

झारखण्ड के राजनीतिक हालात के सम्बन्ध में वहाँ के लोगों ने बताया कि दलित व आदिवासी-बाहुल्य राज्य होने के बावजूद इन वर्गों के लोग घोर उपेक्षा व शोषण के शिकार है। बीजेपी की सरकार इन वर्गों के हित व कल्याण के प्रति थोड़ा भी गम्भीर नहीं होकर इनके शोषण व शोषकों को हर प्रकार का संरक्षण दे रही है। सत्ता कुछ मुट्ठीभर धन्नासेठों के हाथों में सीमित है, जो राष्ट्रीय सम्पदा का अनुचित दोहन करने के साथ-साथ गरीबों, आदिवासियों व दलितों को अन्याय व शोषण का शिकार बनाते रहते हैं। अल्पसंख्यकों को निशाना बनाकर काम करने की खुली छूट भगवा बिग्रेड को वहाँ भी दे दी गयी है। वे लोग खुलेआम उपद्रव व आतंक फैलाते रहते हैं तथा निर्दोंष लोगों की हत्या तक करते रहते हैं, जिसके प्रति वहाँ की भाजपा सरकार थोड़ी भी गंभीर नहीं लगती है।
मायावती ने इस अवसर पर अपने सम्बोधन में कहा कि जातिवादी संकीर्ण व कट्टरवादी सोच वाली बीजेपी एण्ड कम्पनी के लोगों को इस देश की आमजनता ने आज़ादी के बाद काफी लम्बे समय तक केन्द्र व राज्य की सत्ता से बहुत दूर रखा, परन्तु कांग्रेस पार्टी की अनगिनत गलतियों के कारण सत्ता में आने के बाद बीजेपी को अब सत्ता का ऐसा नशा चढ़ गया है कि और वे लोग हर कीमत पर सत्ता हथियाने के क्रम में लोकतन्त्र की प्रत्यक्ष व परोक्ष रूप से हत्या तक करने पर उतारु लगते हैं। उत्तर प्रदेश में व उत्तराखएड राज्यों में वोटिंग मशीन के माध्यम से चुनावी धांधली व गोवा व मणिपुर राज्यों में चुनाव हारने के बावजूद धनबल के सहारे सत्ता हथियाने की बीजेपी की नीति इस बात के पक्के प्रमाण हैं।

बीजेपी के शासन में समाज का वह बहुत बड़ा तबका जो दलित, आदिवासी व अन्य पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखता है, हमेशा की तरह उपेक्षा व तिरस्कृत है। उन्हें उनके संवैधानिक हक से वंचित रखा जा रहा है। उन्हें शिक्षा व रोजगार के सही अवसर नहीं मिल पा रहे हैं तथा इन वगों के करोड़ों लोग दयनीय जीवन व्यतीत करने को मजबूर हैं, जबकि बीजेपी सरकार केवल बनावटी व दिखावटी तौर पर सांकेतिक स्तर पर काम करके देश की आमजनता को गुमराह करने का काम कर रही है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार की पूँजीवादी नीतियों व कार्यकलापों से देश की ग़रीब, कमज़ोर व उपेक्षित जनता काफी दुःखी है, परन्तु बीजेपी को इस बात का अहंकार है कि इन सब गलत नीतियों व कार्यकलापों के बावजूद वह चुनावों में लगातार जीतती ही जा रही है।
मायावती ने कहा कि बीजेपी की चुनावी जीत अन्ततः पानी के बुलबुले की तरह ही साबित होगा क्योंकि कुल मिलाकर इस पार्टी की नीति व कार्यक्रम तथा चाल, चरित्र व चेहरा गरीब, मजदूर, किसान व दलित एवं अन्य पिछड़ा वर्ग-विरोधी तथा धन्नासेठों की घोर समर्थक है और अपने इस रुप को छिपाने के लिये ही बीजेपी अनावश्यक तौर पर धार्मिक कट्टरवाद, संकीर्ण राष्ट्रवाद व राष्ट्रीय सुरक्षा आदि के भावुक मुद्दों का सहारा लेकर चुनावी राजनीति करती रहती है जिससे लोगों का ना तो पेट भरने वाला है और ना ही इससे देश की गरीबी, भूखमरी, किसान आत्महत्सा व बेरोजगारी की विकट राष्ट्रीय समस्या ही समाप्त होने वाली है।

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