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सीवर सफाई में हो रहे मौत को लेकर दिल्ली में बड़ा प्रदर्शन

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सीवर सफाई के दौरान हो रही कर्मचारियों की मौत को लेकर पिछले दिनों दिल्ली के जंतर मंतर पर प्रदर्शन किया गया। इस प्रदर्शन में मैनुअल स्केवेंजर्स, सीवर में हुई मिर्ताको के परिजन और सामाजिक कार्यकर्त्ता शामिल हुए और इन मौतों को लेकर कुछ सवाल उठाये और अपनी कुछ मांगे भी सामने रखी।

उनके पूछे गए सवाल कुछ इस तरह के थे –

  • 1790 लोग अब तक सीवर में काम के दौरान मारे गए है, उनकी मौत के ज़िम्मेदार प्रधानमंत्री है ? या मुख्यमंत्री ?
  • प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री अपनी चुप्पी तोड़े और बताये यह मौत का सिलसिला कब तक चलेगा ?

इन्ही सवालो के साथ लोगो की कुछ मांगे इस प्रकार थी-

  • सीवर में हो रही मौत को लेकर सरकार तुरंत एक्शन की घोषणा करे।
  • जो लोग सीवर में मीर्तको के मौत के ज़िम्मेदार है उन्हें सजा दी जाये।
  • मैनुअल स्केवेंजर्स अधिनियम 2013 का तुरन्त व गंभीरतापूर्वक पालन किया जाए।
  • 1993 से अब तक जिन लोगों की सीवर/सेप्टिक टैंक सफाई के दौरान मृत्यु हुई है उनके आश्रितों को 10 लाख से बढ़ाकर 25 लाख मुआवजा दिया जाए।
  • अभी मैनुअल स्केंवेंजिंग का कार्य कर रहे मैनुअल स्केवेंजरों को 10 लाख का ऋण नहीं बल्कि मुआवजा दिया जाए।
  • मैनुअल स्केवेंजर्स के बच्चों को शुरू से उच्च शिक्षा तक सरकारी एवं निजी स्कूलों/कालेज में निशुल्क शिक्षा प्रदान की जाए।
  • मृतक के परिवार के एक सदस्य को गैर-सफाई कार्य में नौकरी देनी होगी।
  • मैनुअल स्केवेंजर्स के बच्चो को शुरू से ही अच्छे सरकारी स्कूल और कालेज में निःशुल्क शिक्षा दी जाये।
  • सीवर सफाई के 100 प्रतिशत मशनीकरण का कार्य बड़े स्तर पर किया जाए।
  • सुप्रीम कोर्ट के 27 मार्च 2014 के आदेश का सख्ती से क्रियान्वयन किया जाए।
  • जिन लोगों की जान सीवर/सेप्टिक में सफाई के दौरान जहरीली गैसों से दम घुटने से हुई है उन की जिम्मेदारी भारत सरकार ले और उनसे माफी मांगे और मुआवजा  दे।

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पिछले कुछ दिनों में लगभग  13 लोगो की मौत सीवर की सफाई के दौरान जहरीली गैस से दम घुटने की वजह से हो चुकी है और मरने वालो में से 6 लोग अपनी राजधानी दिल्ली के है श्रोतो के मुताबिक कुछ महीनो में करीब 83 लोगो की मृत्यु हो चुकी है। 2017 में इनका आकड़ा 221 पहुँच चूका था।  वर्ष 1993  से अब तक लगभग सीवर और सेप्टिक टैंको की सफाई करने वाले मृतकों की संख्या 1790 बताई जा रही है।

यह आंकड़े वह है जो रिपोर्ट हुए है, कई ऐसे हज़ारो लोग है जो सीवर में काम करते हुए अपनी जान गवा चुके है और उन्हें दर्ज भी नहीं किया गया और उनके मौत की ज़िम्मेदारी भी किसी ने नहीं ली।

इनकी मौत को लेकर तुरंत केस दर्ज़ किया जाना चाहिए परन्तु इसकी अनदेखी की जा रही है और इसके लिए किसी भी व्यक्ति को सजा न मिलना सरकार की राजनीती इच्छा शक्ति की कमी को दर्शाता है।

स्वच्छ भारत अभियान के दौरान पुरे देश में लाखो शौचालय बनाये जा रहे है, इसके लिए लाखो सेप्टिक टैंक बनाये जा रहे है हमारा यह मानना है की यह हमारी समस्याओ को काम नहीं बल्कि बढ़ा रहे है जितने अधिक शौचालय होंगे उतने ही मैनुअल  स्केवेंजर और उतनी ही ज्यादा मौते होंगी सर्कार कर्मचारियों को असुरक्षित बना रही है, उन्हें सुरक्षित नहीं कर रही।

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मैनुअल स्केवेंजरो के पुनर्वास के लिए साल 2013-2014 में सर्कार ने 570 करोड़ का बजट रखा था और उसे साल  2017  में घटाकर 5 करोड़ कर दिया।

हो रहे इस दुर्घटना के अवसर पर सभी कर्मचारी आंदोलन में शामिल हुए और उनके संगठनो ने भी हिस्सा लिया  जिनके नाम एनसीडीएचआर, सीबीजीए, नैक्डोर, अस्मिता, भीम आर्मी, क्रांतिककारी युवा संगठन, अखिल भारतीय जाति विरोधी मंच आदि. वक्ताओं में बेजवाड़ा विल्सन, अंरूंधती रॉय , योगेन्द्र यादव, अशोक भारती, पॉल दिवाकर, एनी नामला, ऊषा रामानादन, दीप्ति सुकुमार, भाषा सिंह, डी.राजा, मनोज झा आदि गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया।

इस धरना में प्रदर्शन के दौरान सीवर के सैंपल जलाये और नारे लगाए प्रधानमंत्री शर्म करो, सीवर में हत्याएं  बंद करो।

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