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असम: मेजर जनरल और सेना के सात अफसरों पर फर्जी मुठभेड़ में 5 युवाओं की हत्या का मामला, मिली उम्रकैद की सजा

Convicted to Life imprisonment in assam encounter
(Image Credits: Dailyhunt)

मेजर जनरल (Major General AK Lal)  सहित सात सैन्य कर्मियों को आर्मी कोर्ट ने 24 साल पुराने मामलें  में उम्रकैद की सजा सुनाई है। दरअसल इन सभी सैन्यकर्मियों पर फर्जी मुठभेड़ में 5 युवाओं को मारने का आरोप है। इन सभी सैन्यकर्मियों के नाम इस प्रकार है, एके लाल, कर्नल थॉमस मैथ्यू, आरएस सिबिरेन, दिलीप सिंह, कैप्टन जगदेव सिंह, नायक अलबिंदर सिंह और नाइक शिवेंद्र सिंह है।

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इन सभी सैन्यकर्मियों को असम में 24 साल पहले हुए फर्जी मुठभेड़ में पांच युवाओं को मारने का आरोप है। इन सभी आरोपियों के लिए आर्मी कोर्ट द्वारा उम्रकैद सजा की सुनाई गई है। दरसल यह मुठभेड़ असम के तिनसुकिया जिले में हुई थी। जिसमें सभी आरोपी सेना के अफसरों का कोर्ट मार्शल हुआ था।

यह घटना 18 फरवरी 1994 की है। जब एक चाय बागान के एक्जीक्यूटिव की हत्या होने के शक में सेना ने 9 युवाओं को तिनसुकिया जिले से पकड़ा था। इस घटना में पकडे गए 9 में से 4 युवाओं को छोड़ दिया गया था। लेकिन बाकी बचे 5 युवाओं का कुछ पता नहीं चला। इस घटना को बाद में पूर्व मंत्री और बीजेपी के नेता जगदीश भुयान ने इस मामले को जानने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल करके इस मामले को उठाया था।

इस घटना में सैन्यकर्मियों ने फर्जी एनकाउंटर में पांच युवाओं को मारने के बाद उनकों उल्फा उग्रवादी करार दिया था। बीजेपी के नेता जगदीश भुयान ने इस मामले का पर्दाफाश करने के लिए उसी वर्ष गुवाहाटी हाई कोर्ट में 22 फरवरी को याचिका दायर करके गायब हुए युवाओं के बारे में जानकारी मांगी थी।

इस मामले में हाई कोर्ट ने भारतीय सेना और आल असम स्टूडेंट्स यूनियन के सभी नेताओं को नजदीकी पुलिस थाने में पेश होने को कहा। जिसके बाद सेना ने धौला पुलिस स्टेशन पर पांच युवाओं का शव पेश किया। इसके बाद सैन्यकर्मियों का 16 जुलाई से कोर्ट मार्शल शुरू हुआ और 27 जुलाई को निर्णय करके फैसला सुरक्षित रख लिया गया।


शनिवार को सजा की घोषणा की गई और यह जानकारी सेना के सूत्रों द्वारा रविवार को दी गई। बीजेपी नेता जगदीश भुयान ने कहा कि इस फैसले से देश का न्यायतंत्र, लोकतंत्र और सेना में अनुशासन और निष्पक्षता में भरोसा और भी मजबूत हुआ है।

दरअसल पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ की खबर तो बहुत सामने आती है। लेकिन सेना द्वारा फर्जी मुठभेड़ की घटना को अंजाम देना, यह हमारे देश के नागरिकों की सुरक्षा पर सवालिया निशान उठाता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है की पुलिस द्वारा फर्जी मुठभेड़ को देश के लिए सही ठहराया जा सकता है। आर्मी कोर्ट द्वारा दोषियों को सजा तो मिल गई है। लेकिन इसके पीछे ऐसे क्या कारण थे जिसकी वजह से दोषिओं को सजा देनें में इतना वक्त जाया किया गया।

 

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