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मोदी मतलब के लिए बाबा साहब का नाम जपते हैं, उनके वर्ग से जुड़े लोगों पर हमला करते हैं -मायावती

लखनऊ. उपचुनाव में जीत और राज्यसभा चुनाव में हार के बाद सबकी निगाहें 2019 में सपा बसपा गठबंधन की संभावनाओं पर टिकी है. ऐसे में सोमवार को बसपा प्रमुख मायावती ने लखनऊ में बड़ी बैठक बुलाई. पहले मायावती बसपा विधायकों से मिलीं और फिर पार्टी के जोनल कोऑर्डिनेटर्स के साथ मीटिंग की. ये बैठक करीब बीस मिनट तक चली. उन्होंने पार्टी नेताओं को स्पष्ट संकेत दिया कि बीजेपी के खिलाफ सपा-बसपा का गठबंधन होकर रहेगा.

बैठक में सूबे की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने कहा कि मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में सिर्फ दलितों के साथ नाटक किया है. पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि मोदी भले ही मन की बात में बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर का जिक्र करते है. लेकिन उनकी मानसिकता बाबा साहेब के लिए बिलकुल विपरीत थी. यही कारण ता कि बीजेपी-आरएसएस पिछले दशकों में सत्ता से बाहर थी.

उन्होंने केंद्र के साथ-साथ राज्य सरकार भी दलितों के सम्मानों में अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वो अम्बेडकर के नाम का ज़िक्र करते हैं, लेकिन उन वर्गों से जुड़े लोगों पर हमला करते हैं. बकौल मायावती, राज्यसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर को हारने के लिए भाजपा ने एक अतिरिक्त सीट पेशकर यह साबित कर दिया है. उन्होंने कहा कि बीएसपी-सपा स्वार्थी जरूरतों को पूरा करने के लिए नहीं,बल्कि भाजपा के कुशासन के खिलाफ लड़ रही है.

मालूम हो, सपा-बसपा के बीच पिछले 23 साल बाद रिश्ते बेहतर हो रहे हैं. हाल ही में फुलपुर-गोरखपुर लोकसभा उपचुनाव में बसपा ने सपा उम्मीदवारों को समर्थन किया था. इसका नतीजा रहा है कि दोनों सीटों पर सपा उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी.

सपा-बसपा गठजोड़ के चलते ही बीजेपी के दुर्ग कहे जाने वाले गोरखपुर लोकसभा सीट पर बीजेपी को 28 साल के बाद उपचुनाव में हार का सामना करना पड़ा. इसके बाद सपा ने राज्यसभा चुनाव में बसपा उम्मीदवार को समर्थन दिया था. यह अलग बात है कि बसपा उम्मीदवार जीत नहीं सका, बावजूद इसके दोनों दलों ने गठबंधन आगे बढ़ाने का ऐलान किया है.

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