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दलितों के आइकन बने भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर रावण, शादी के कार्ड पर छपवा रहे फोटो

भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद अब उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के दलित युवाओं के आइकन बन रहे हैं। चंद्रशेखर को आइकन मानने वाले ऐसे ही युवा उनकी शादी के कार्ड्स में आजाद की तस्वीर छपवा रहे हैं। चंद्रशेखर आजाद उर्फ रावण इन दिनों जेल में है। उनके ऊपर सरकार ने एनएसए के तहत कार्रवाई की थी।

हालांकि दलित समुदाय रावण पर एनएसए लगाए जाने को गलत बताते हैं। लोगों का कहना है कि वे लोग उनके यहां शादियों के निमंत्रण पत्र में चंद्रशेखर आजाद की फोटो छपवा रहे हैं। वे आजाद को अपना मसीहा बताते हुए कहते हैं कि जब से वे चंद्रशेखर से जुड़े हैं वे खुद को मजबूत महसूस कर रहे हैं।

सहारनपुर के रहने वाले पवन गौतम (27) ने बताया कि उनकी शादी 10 मार्च को है। वह आजाद से कभी नहीं मिले हैं लेकिन वह उन्हें अपना आदर्श मानते हैं। उन्होंने कहा कि आजाद की उपस्थित और उनके बोलने का ढंग युवाओं को आकर्षित करता है। इतनी कम उम्र में उन्होंने दलित समुदाय के लिए बहुत कुछ किया है।

पवन ने कहा कि भीम आर्मी ग्रामीण इलाकों में दलित के बच्चों के लिए 300 से ज्यादा कोचिंग सेंटर चलाती है ताकि बड़े होकर वे बच्चे दूसरे समुदाय के बच्चों के साथ प्रतिस्पर्धा कर सकें। इसके अलावा वह सैकड़ों मजदूरों को उनके अधिकारियों के प्रति जागरुक करते हैं और उनकी मदद भी करते हैं।

पवन गौतन ने स्नातक तक पढ़ाई की है और अभी एक फाइनैंस कंपनी में काम करते हैं। वह कहते हैं कि सहारनपुर में हुई जातिगत हिंसा में आजाद का कोई हाथ नहीं था। पुलिस ने उन्हें गलत फंसाया। सिर्फ शादी के कार्ड्स + में ही नहीं समुदाय के लोग भीम आर्मी के मुखिया वाले कैलेंडर्स भी उनके घरों में प्रयोग कर रहे हैं।

घाटकोली के रहने वाले राकेश कुमार नौटियाल ने कहा कि आजाद उन लोगों के मसीहा हैं। राकेश के बेटे की शादी बीते 17 फरवरी को हुई है। उन्होंने भी उनके बेटे की शादी में डॉ. भीमराव आंबेडकर की तस्वीर के साथ चंद्रशेखर आजाद की तस्वीर छपवाई थी।

उन्होंने कहा कि हर दलित आजाद को हीरो मानता है। उन्होंने समाज के लिए बहुत बलिदान दिया है। उन्हें सिर्फ इसलिए जेल भेज दिया गया क्योंकि वे दलितों के अधिकारियों के लिए खड़े और लड़े। उन्होंने कहा कि उनके कुछ रिश्तेदारों और दोस्तों में चंद्रशेखर की तस्वीर शादी के कार्ड में छपवाने का विरोध किया लेकिन उन्होंने किसी की नहीं सुनी।

हरिद्वार के रहने वाले अमरदीप बुद्ध की शादी 18 मार्च को है। उन्होंने भी आजाद की तस्वीर उनके शादी के निमंत्रण पत्र में छपवाई है। उन्होंने कहा कि ऐसा करके उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। वह कहते हैं कि आजाद सच्चे दलित नेता हैं। काशीराम के बाद कई दलित नेता आए लेकिन उन लोगों ने दलितों को सिर्फ वोट बैंक के लिए प्रयोग किया। आजाद दलितों के लिए आशा की किरण है। आजाद उनके लिए डॉ. भीमराव आंबेडकर और गौतम बुद्ध की तरह हैं।

साभार- नवभारत टाइम्स

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