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सिर्फ गोरे लोग ही हैंडसम नहीं होते- क्रिकेटर अभिनव मुकुंद

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नई दिल्ली। शरीर के रंग के आधार पर भेदभाव की मानसिकता को लेकर टीम इंडिया के क्रिकेटर अभिनव मुकुंद ने जमकर प्रहार किया। सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर रंगभेद और नस्लवाद को लेकर उन्होने मानसिकता बदलने पर जोर दिया। एक ट्वीट में उन्होने कहा सिर्फ गोरे लोग ही हैंडसम नहीं होते।

मुख्य बातें-

  1. क्रिकेट अभिनव मुकुंद ने नस्लवाद को लेकर की टिप्पणी
  2. अभिनव ने कहा- सिर्फ गोरे लोग ही हैंडसम नहीं होते
  3.  सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर साझा किए अपने अनुभव

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इस मुद्दे पर मुकुंद ने अपने अनुभव को साझा करते हुए लिखा है, ‘मैं 10 साल की उम्र से क्रिकेट खेल रहा हूं। मैं बहुत धीरे-धीरे सफलता हासिल करने में सक्षम हुआ हूँ।क्रिकेट में अपने देश को इतने बड़े लेवल रिप्रेजेंट करना और खेलना मेरे लिए गर्व की बात है। लेकिन नस्लवाद एक समस्या है, जिसके बारे में मैं सबसे ज्यादा सोचता हूँ। इस पोस्ट को मैं किसी की सहानुभूति और ध्यान खींचने के लिए नहीं लिख रहा हूं, बल्कि इस उम्मीद से कि इस मुद्दे पर लोगों की सोच बदल पाऊं।

https://www.youtube.com/watch?v=l54HAbNkE_w

मैं 15 साल से देश और विदेश में घूम रहा हूँ। मेरे स्किन के रंग को लेकर लोगों की सनक मेरे लिए हमेशा एक पहेली रही है। जो क्रिकेट खेलता है, वही इसे समझेगा।
इसी क्रिकेट के लिए मैंने बचपन से धुप की परवाह किए बिना काफी मेहनत की है, जिसका मुझे कभी मलाल नहीं रहा कि मैं काला पड़ रहा हूं। वह इसलिए क्योंकि जो मैं करता हूं वो मुझे पसंद है। और उसे पाने के लिए मैंने घंटों बाहर बिताए। मैं चेन्नई से आता हूं, जो शायद हमारे देश की सबसे गर्म जगह है और मैंने खुशी-खुशी अपनी उम्र का ज्यादातर हिस्सा क्रिकेट मैदान पर गुजारा है।

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इस दौरान लोगों ने मुझे कई नामों से पुकारा, लेकिन मैं किसी की ऐसी बातों पर बिना परवाह किए आगे बढ़ गया। क्यूंकि मैं जानता था की मेरी जिंदगी का मकसद क्या है। लेकिन आज मैं सिर्फ अपने लिए नहीं बोल रहा हूं, बल्कि अन्य कई लोगों के लिए बोल रहा हूं। सोशल मीडिया के आने से, यह बात बहुत बढ़ गई है। लोग अक्सर गालियां देने लगते हैं, यह कुछ ऐसा है जिसमें मेरा कोई नियंत्रण नहीं है, गोरे लोग ही सिर्फ हैंडसम नहीं होते। सच्चे बनो, ध्यान रखो, और अपने रंग रूप को लेकर सहज रहो।’

 

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