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जीडी अग्रवाल की अनशन से 112 वें दिन हुई मौत, पीएम मोदी को लिखे तीन खत, एक का भी जवाब नहीं आया

GD agarwal
(Image Credits: MyNation)

जीडी.अग्रवाल उर्फ स्‍वामी ज्ञान स्‍वरूप सानंद का 11 अक्टूबर को निधन हो गया। जीडी. अग्रवाल पिछले 112 दिनों से गंगा सफाई के लिए अनशन पर बैठे थे। स्‍वामी जी गंगा नदी को प्रदुषण मुक्त करने के लिए 112 दिनों से अनशन पर बैठे थे। इस विषय में उन्होनें प्रधानमंत्री मोदी को तीन खत भी लिखा था परन्तु मोदी द्वारा एक भी खत का जवाब नहीं दिया गया। और इतना होने के बाद जीडी.अग्रवाल उर्फ स्‍वामी का 11 अक्टूबर को कार्डियक अरेस्ट से निधन हो गया। दरसल उन्होनें 10 अक्टूबर से पानी का भी त्याग कर दिया था।

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जीडी.अग्रवाल उर्फ स्‍वामी ने निधन से पहले गंगा नदी में प्रदुषण के विषय में पीएम मोदी को 3 खत लिखा लेकिन पीएम मोदी की ओर से एक भी चिट्ठी का जवाब नहीं आया। उन्होंने अपने आखिरी खत में पीएम मोदी के समक्ष 4  मांगें रखी थी। इसमें उन्होनें 22 जून को अपने अनशन पर बैठने की बात रखी थी।

पीएम मोदी ने जीडी.अग्रवाल उर्फ स्‍वामी के आखिरी खत का भी जवाब नहीं दिया। अंतिम में अनशन के 112 वें दिन जीडी.अग्रवाल उर्फ स्‍वामी का निधन हो गया। पीएम मोदी ने उनके निधन पर शोक जताया और ट्वीट किया कि गंगा के संरक्षण के लिए उनके द्वारा किए गए योगदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

कौन सी  4  मांगें थी अंतिम खत में-

स्वामी जी ने अपने तीसरे और अंतिम खत में  पीएम मोदी के समक्ष 4 मांगें रखी थी। उन्‍होंने वर्ष 2012 में गंगा महासभा द्वारा तैयार प्रारूप के अनुसार संसद में विधेयक लाकर कानून बनाने की मांग की थी। संसद में विधयेक के जल्द से जल्द न पारित होने की स्थिति में गंगा के प्रबंधन और सरक्षण को लेकर संसद में अध्‍यादेश लाने के लिए सुझाव दिया था।

जीडी. अग्रवाल कि दूसरी मांग थी कि , अलकनंदा, धौलीगंगा, नंदाकिनी, पिंडर और मंदाकिनी नदियों पर बन रही जलविद्युत परियोजनाओं को अविलंब बंद करने का आदेश देने को कहा था। इसके अलावा प्रस्तावित परियोजनाओं को रद्द करने के लिए कहा था।

जीडी.अग्रवाल उर्फ स्‍वामी की तीसरी मांग यह थी कि, सरकार हरिद्वार कुंभ क्षेत्र में हो रहे पेड़ों की कटाई, खनन, चमड़ा उद्योग और बूचड़खानों को बंद करे।

चौथी मांग के तहत जीडी. अग्रवाल ने कहा था की जून 2019 तक गंगा भक्‍त परिषद का गठन हो। स्वामी ने गंगा भक्‍त परिषद के लिए 20 सदस्यों को मनोनीत करने का आग्रह किया था। जीडी. अग्रवाल ने यह भी कहा था कि, गंगा भक्तों को गंगा जी के अंदर घुसकर शपत लेनी होगी कि, वो गंगा जी के लिए पूरे समर्पण के साथ काम करेंगें।

बता दें कि पीएम मोदी ने जीडी. अग्रवाल की मांगों पर गौर करने की बात तो बहुत दूर है, उन्होनें उनके एक भी खत का जवाब तक नहीं दिया।

हालांकि, केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने उनसे मुलाकात जरूर की थी। स्वामी ने उनके उमा भारती के साथ मुलाक़ात को अपने अंतिम पत्र में उल्‍लेख भी किया था। इसके साथ यह भी बताया था कि उमा भारती ने नितिंन गड़करी से इस विषय में उनकी बात भी करवाई थी, परन्तु कोई भी संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली थी।

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