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करप्शन खत्म करने का दावा करने वाले PM मोदी के ऑफिस से घोटाले के सबूत गायब!

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नई दिल्ली। लेबर डिपार्टमेंट में पोस्टेड एक अफसर को चेन्नई में इलेक्ट्रिक एंड वॉटर डिपार्टमेंट बिल जमा करने की ड्यूटी पर लगा दिया गया है, वो भी सिर्फ इसलिए क्योंकि उसने रांची में लेबर इन्फोर्समेंट अफसर रहने के दौरान बिरला ग्रुप की हिंडाल्को समेत कुछ कंपनियों में 6 करोड़ के ग्रेच्युटी स्कैंडल को उजागर किया था। इस मामले की रिपोर्ट बदलने के लिए अफसर पर जानलेवा हमला तक हुआ। उसके बाद उसका ट्रांसफर करा दिया गया। तबादले के इस खेल में भाजपा और कांग्रेस दोनों शामिल हैं।

इस सब के बीच ना तो उस स्कैंडल पर कोई एक्शन लिया गया जिसकी रिपोर्ट उसने पीएमओ को सौंपी थी, और ना ही उस कंप्लेंट पर जिसमें उसने पीएमओ से ही लेबर के इंटरनल करप्शन के जांच की मांग की थी। आरटीआई में जब पूछा तो पता चला कि जो डॉक्यूमेंट उन्होंने पीएमओ को सबमिट किए थे, वह कहीं गुम हो गए हैं। इसलिए, ढाई साल पुराना यह मामला पिछले महीने ही बंद कर दिया। अब उसे कोर्ट से इंसाफ की उम्मीद है।

जेएनयू के स्टूडेंट पवन कुमार बतौर लेबर इन्फोर्समेंट अफसर 2006 में लेबर डिपार्टमेंट में तैनात हुए। 2015 में रांची पोस्टिंग के दौरान पीएमओ के कहने पर उन्होंने न्यूनतम मजदूरी और रिटायर्ड इम्प्लाई के ग्रेच्युटी में धांधली की जांच की। इसकी रिपोर्ट उन्होंने पीएमओ को सौंपी। रिपोर्ट में यह लिखा था कि धनबाद में बॉक्साइट माइन करने वाली बिरला ग्रुप से जुड़ी हिंडाल्को इंडस्ट्री समेत कुछ कंपनियां मजदूरों को न्यूनतम मजदूरी नहीं दे रही। कुल मिलाकर 6 करोड़ की सीधी गड़बड़ी थी। अक्टूबर में पवन ये पीएमओ को रिपोर्ट दी, उसके बाद दिसंबर में पीएओ को पत्र लिख कर इस मामले की हाई लेवल जांच की गुजारिश की थी।

ट्रांसफर पर स्टे: करप्शन सीनियर का जांच जूनियर को सौंपी
गलत ट्रांसफर और डिपार्टमेंटल करप्शन की जांच के लिए 19 जनवरी 16 को पीएमओ को लिखा। फरवरी में दत्तात्रेय ने ट्रांसफर पर स्टे दे कर उन्हें रांची भेजा। डिपार्टमेंटल मामले में चीफ लेबर कमिश्नर अनिल कुमार नायक की जांच एडिशनल चीफ लेबर कमिश्नर जेके सागर को सौंपी। सागर ने कंप्लेंट निराधार बताई।

पवन के पीएमओ को रिपोर्ट सौंपते ही रांची के रीजनल लेबर कमिश्नर ने उनके खिलाफ एससी-एसटी एक्ट में एफआईआर दर्ज करा दी। इसे आधार बना कर रांची के बीजपी सांसद राम टहल चौधरी, कांग्रेस के दो राज्यसभा सांसद, प्रदीप बालमुचु और धीरज साहू ने तत्कालीन श्रम मंत्री बंडारू दत्तात्रेय को उनके तबादले करने के लिए पत्र लिख दिया। क्लीनचिट के बावजूद 15 जनवरी 16 को पवन का तबादला चेन्नई कर दिया।

आरटीआई में पूछा, पीएमओ ने बताया-दस्तावेज खो गए
इस बीच 30 जनवरी 2016 को पवन ने करप्शन के डॉक्यूमेंट के पीएमओ को फिर लेटर लिखा। पीएमओ से जवाब नहीं आया तो पवन ने आरटीआई फाइल कर जानकारी मांगी। जवाब मिला कि डॉक्यूमेंट खो गए। पवन ने फिर कंप्लेंट की। लेकिन पीएमओ ने लेबर मिनिस्टरी के पहले की रिपोर्ट पर ही 25 नवंबर को मामला बंद कर दिया।
पवन ने पीएमओ को लेटर लिख लेबर डिपार्टमेंट के चीफ लेबर कमिश्नर अनिल कुमार नायक के खिलाफ जांच की मांग की थी। भास्कर ने जब इस मामले में नायक से बात की तो उन्होंने कहा- पवन का ट्रांसफर नियम के तहत और तब के मिनिस्टर के कहने पर किया गया है।

करप्शन के आरोप बेबुनियाद हैं। करप्शन की जांच जूनियर अफसर को सौंपने पर नायक ने फिर बंडारू दत्तात्रेय का ही नाम लिया। चेन्नई में पवन कुमार को सौंपी गई जिम्मेदारी की बात पर भी नायक ने चुप्पी साध ली।

भास्कर ने जब दस्तावेज खोने और जूनियर अफसर से करप्शन की जांच पर पीएमओ से उनका पक्ष जानना चाहा। अधिकारियों ने सीधे बात करने से मना कर पीएमओ pro.pmo@gov.in व dprpmo@gmail.com पर ईमेल करने के लिए कहा। भास्कर रिपोर्टर ने 25 दिसंबर को ईमेल किया, लेकिन अभी तक कोई जवाब नहीं आया।

पवन के रांची पहुंचने के बाद 15 मार्च को कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पी के बलमुचू ने फिर से तब के मिनिस्टर को लेटर लिखा। लेटर में उन्होंने पवन के ट्रांसफर पर स्टे रद्द करते हुए वापस चेन्नई भेजने की मांग की। लेटर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई तो 3 मई को कुछ लोगों ने पवन पर जानलेवा हमला किया। हमले के पीछे लोकल बीजेपी नेता के पिता का नाम आया। पवन ने एफआईआर दर्ज कराई। 8 मई को स्थानीय बीजेपी सांसद राम टहल चौधरी ने लेबर मिनिस्टर को लेटर लिख कर कहा कि पवन ने झूठी शिकायत की है उनका ट्रांसफर किया जाए। 13 मई को पवन को फिर चेन्नई भेज दिया गया।

अब चेन्नई में तैनात लेबर इन्फोर्समेंट अफसर पवन का काम वैसे तो कंपनियों में जाकर न्यूनतम मजदूरी और ग्रेच्युटी की जांच करना है, लेकिन अब इन्हें बिजली-पानी के बिल पास करने में लगा दिया गया है। झारखंड हाईकोर्ट में पवन पर हुए हमले की सीबीआई जांच करवाने को लेकर मामला चल रहा है। इधर, दिल्ली हाईकोर्ट ने भी लेबर मिनिस्टरी से पवन को परेशान किए जाने और करप्शन की जांच के लिए सीवीसी से जवाब मांगा है।

साभार- भास्कर डॉट कॉम

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