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मोदी सरकार ने पूंजीपतियों का 2.4 लाख करोड़ रुपये का कर्ज बट्टे खाते में डाला

नई दिल्ली. जब राहुल गांधी ने संसद में यह कहा कि मोदी ने अपने करीबी उद्योगपति दोस्तों का 1.25 लाख करोड़ रूपया माफ कर दिया है, किसानों का भी कर्जा माफ करो तो उनका उसी संसद में मज़ाक उड़ाया गया कि यह पैसा माफ नहीं किया गया बल्कि केवल एक खाते से दूसरे खाते एनपीए में डाल दिया गया है और यह राहुल गांधी को नहीं पता.

वित्त राज्य मंत्री ने कल संसद को ये जानकारी दी है कि मोदी सरकार ने सिर्फ 3 साल के कार्यकाल में पूंजीपतियों का 2,41,911 करोड रुपए का कर्ज “राइट ऑफ” किया. गोपनीयता का हवाला देकर करोडों डकारने वाले पूंजिपतियों के नाम सार्वजनिक करने से सरकार ने इनकार कर दिया. आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सदन में इस संबंध में दो सवाल पूछे थे. पहला सवाल था कि साल 2014 से 2017 के बीच सरकार ने बैंकों से पूंजीपतियों द्वारा लिए कर्ज में से कितना एनपीए किया है. और दूसरा ये कि इन वित्तीय वर्षों में जिनका एनपीए हुआ है कृपया सरकार उनका नाम बताए.

इस पर सरकार ने एनपीए की जानकारी देने के बाद कर्ज लेने वालों का नाम बताने से दो टूक मना कर दिया. कहा कि कर्ज लेकर बैंकों का पैसा न लौटाने वालों के नाम सरकार सार्वजनिक नहीं कर सकती क्योंकि वो आरबीआई नियमों से बंधी हुई है.

वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में जवाब दे रहे वित्त राज्य मंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा वर्ष 2014-15 से लेकर सितंबर 2017 के बीच सरकार द्वारा संचालित बैंकों ने पूंजीपतियों के 2 लाख 41 हजार 911 करोड़ रुपए राइट ऑफ किए हैं. सरकार ने अपने जवाब में आगे जोड़ते हुए बताया है कि यह रिजर्व बैंक की नियमित प्रकिया है, उसी आधार पर यह किया गया है.

वित्त राज्य मंत्री शिवप्रताप शुक्ला ने आगे कहा कि आरबीआई नियमों के अनुसार धारा 45 ई के अंतर्गत ‘रिजर्व बैंक एक्ट 1934’ में कर्जदारों का नाम नहीं बताने का प्रावधान है, इसलिए सरकार किसी कर्जदार का नाम सार्वजनिक नहीं कर सकती. साथ ही सरकार ने यह कहा पूंजीपतियों के कर्ज को बट्टा खाता में डाला गया है. शुक्ला ने स्पष्ट किया कि ऐसे कर्ज़ों को बट्टेखाते में डालने के बाद भी कर्जदारों पर देनदारी बनी रहती है और उन्हें इसे अदा करना होता है.

वसूली की प्रक्रिया कानूनी व्यवस्था के तहत सतत आधार पर चलती रहती है. उन्होंने कहा कि वित्तीय आस्तियों का प्रतिभूतिकरण और पुनर्गठन तथा प्रतिभूति हित का प्रवर्तन (सरफेसी) कानून, ऋण वसूली न्यायाधिकरण (डीआरटी) और लोक अदालतों के जरिये बट्टेखाते में डाले गए कर्ज की वसूली की प्रक्रिया चलती रहती है.

इसके अलावा 90-95 हजार करोड़ जतिन मेहता, विजय माल्या, नीरव मोदी, मेहुल चौकसी, भूपेश जैन,धूत जैसे लोग सरकार की नाक के नीचे से लेकर विदेश भाग गये वह धन इससे अलग है.

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