ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
देश

योगी सरकार की नाकामी से नाराज ओबीसी समुदाय, बीएसपी से जुड़ने को बेताब

नई दिल्ली। बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने वेस्ट यूपी की कैपिटल कहे जाने वाले मेरठ से एक नए सियासी समीकरण की शुरुआत की। यूपी विधानसभा चुनाव के समय जहां बीएसपी के साथ ज्यादातर मुस्लिम और दलित ही जुड़ा हुआ था अब योगी सरकार के छ: महीने बीत जाने के बाद पिछड़े भी बीएसपी के साथ तेजी से जुड़ने लगे हैं। इसकी बानगी मेरठ में हुई रैली में देखने को मिली। जहां कई पिछड़े नेता मंच पर दिखाई दिए।

वहीं बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी पिछड़ों के आरक्षण खत्म करने का मुद्दा उठाकर बीएसपी द्वारा किए गए संघर्ष की याद दिलाई। जाट लैंड में हो रही रैली में उन्होंने जाट समाज के प्रति हमदर्दी दिखाई और वेस्ट यूपी से खास लगाव की बात कहकर अपनी सरकार में किए गए विकास के काम को भी बताया। उन्होंने दलितों को भी दुलारा और मुस्लिमों से साथ गोरक्षा के नाम पर हो रही ज्यादती का जिक्र कर मोहब्बत का इजहार किया।

आपको बता दें कि वेस्ट यूपी मायावती की जन्मभूमि और कर्म भूमि रही है। उन्होंने यहां सियासत का ककहरा सीखा और पहली बार सांसद भी बिजनौर से ही बनीं। पहला चुनाव भी सहानपुर की हरौडा सीट से लड़ा था। उनके खिलाफ चुनाव में पहला मुकदमा भी बुलंदशहर में दर्ज हुआ था। वेस्ट यूपी में 2007 तक बीएसपी की धाक थी। 2012 में सूबे से सत्ता जाने के बाद भी बीएसपी की दबदबा बना रहा। लेकिन 2014 और 2017 में बीएसपी का जनाधार वेस्ट से खिसक गया।

मायावती ने पिछड़े वर्ग से ताल्लुक रखने वाले जाट समाज के लिए कहा कि उनकी सरकार में बिना रिश्वत के पुलिस में भर्ती हुई। उसमें वेस्ट यूपी की नुमाइंदगी सबसे ज्यादा हमने रखी थी। मायावती ने पिछड़ों को आशंका दिखाई कि बीजेपी उनके आरक्षण को खत्म करने की साजिश कर रही है। उन्होंने याद दिलाया कि बीएसपी के गठन के बाद से ही हमने मंडल कमिशन की सिफारिश लागू करने के लिए वीपी सिंह पर दबाव बनाया था।

 

Latest अपडेट के लिए National Dastak पेज को Like और Follow करे

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved