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बच्चियों से रेप की घटना पर तेजस्वी का विराट प्रदर्शन, नीतीश कुमार को आई शर्म

राजद नेता तेजस्वी यादव ने मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेपकांड मामले में बिहार की नीतीश कुमार सरकार के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर धरना दिया. धरने के दौरान मंच पर देश के विपक्ष ने एकजुट होकर एकता दिखाई. इस धरने में आरजेडी प्रमुख लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव का साथ देने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी पहुंचे. वहीं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी जंतर मंतर पहुंचकर तेजस्वी यादव का हौसला बढ़ाया. वहीं मुजफ्फरपुर बालिका गृह रेपकांड मामले में दोषियों को फांसी की सजा मांगी.

वहीं कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ इंडिया (मार्क्सवादी) के महासचिव सीताराम येचुरी भी तेजस्वी यादव के समर्थन में जंतर मंतर पहुंचे. तेजस्वी यादव के साथ सीपीआई के नेता डी राजा, उनकी बहन मीसा भारती, पूर्व जेडीयू नेता शरद यादव, जेएनयू के वामपंथी छात्र नेता कन्हैया कुमार, शहला राशिद भी धरने में तेजस्वी का साथ देते नजर आए. वहीं आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली सरकार में विधायक सोमनाथ भारती भी धरने में शामिल होने जंतर-मंतर पहुंचे. सभी दलों के नेताओं ने तेजस्वी यादव का साथ देते हुए भाषण देकर सरकार का घेराव किया.

वहीं दूसरी तरफ मामला उजागर होने के तीन महीने के बाद नीतीश कुमार को मुजफ्फरपुर वाली घटना पर शर्म आ गयी वो बोले यह घटना बेहद शर्मसार करनेवाली है. मामला उजागर होने के बाद से हम आत्मग्लानि के शिकार हो गये हैंओर आज मुजफ्फरपुर पुलिस ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा कि इस कांड का मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर सरकारी फंड और ऑर्डर पाने के लिए सेक्स रैकेट चलाता था उसके तार नेपाल से लेकर बांग्लादेश तक जुड़े हुए थे.

ताजा खुलासा यह है कि मुजफ्फरपुर के स्वास्थ्य विभाग में बालिका गृह के बच्चियों के स्वास्थ्य जांच से संबंधी कोई दस्तावेज नहीं है, जबकि बालक और बालिका दोनों गृह में रहने वाले 18 साल से कम के बच्चे और बच्चियों के स्वास्थ्य की जांच सप्ताह में दो बार सरकारी डॉक्टरों को करना था. 2013 से लेकर 2018 तक में बालिका गृह में जांच के लिए गए सरकारी डॉक्टरों के नाम रिकॉर्ड से गायब हैं.

ब्रजेश ठाकुर पर नीतीश सरकार की मेहरबानी का आलम तो यह था कि वह सेवा संकल्प एवं विकास समिति नामक एनजीओ के प्रतिनिधि के तौर पर पिछले 5 सालों से जिला रोगी कल्याण समिति का सदस्य बना बैठा था, उसकी सहयोगी मधु को जिला महिला सम्मान के लिए जिला स्तरीय कमेटी ने सिफारिश कर रही थी मधु ब्रजेश ठाकुर के संगठनों को देखना, चलाने का काम करती थी.

ब्रजेश ठाकुर के अखबार को एफआईआर दर्ज होने के बाद भी सरकारी विज्ञापन मिलते रहे हैं वायर की रिपोर्ट बताती हैं कि एक जून से 14 जून तक बिहार के सूचना व जनसंपर्क विभाग की ओर से मुख्य आरोपी ब्रजेश ठाकुर के अख़बार ‘प्रातः कमल’ के नाम 14 विज्ञापन जारी किए गए जबकि सूचना व जनसंपर्क विभाग ख़ुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार संभालते हैं न सिर्फ ब्रजेश ठाकुर को बल्कि उसके तीनो अखबार मिलाकर कुल नौ पत्रकारों को सरकारी मान्यता वाले एक्रेडिएशन कार्ड मिले हुए थे. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट बता रही है कि राज्य सरकार की तरफ से ‘प्रातः कमल’ व अन्य दो अख़बारों को सालाना करीब 30 लाख रुपये का विज्ञापन मिलता था.

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