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गरबा में पागल हुआ मोदी जी के गुजरात का विकास, देखिए वायरल वीडियो

vikas in gujarat s garba

नई दिल्ली। गुजरात में चुनाव होने वाले हैं लेकिन इससे पहले पीएम मोदी सहित भाजपा को लोगों ने सबक सिखाने का इरादा कर लिया है। आमतौर पर जुमलेबाजी करने के लिए मशहूर हो चुकी भाजपा का कथित एजेंडा विकास गुजरात में पागल हो गया है। लोग ऐसा सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

आपको बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनावों के वक्त मोदी ने गुजरात के विकास का ढिंढोरा पीटा था। लेकिन अब वहां का विधानसभा चुनाव भाजपा के लिए भारी पड़ सकता है। वहां सोशल मीडिया पर “વિકાસ ગાંડો થાઓ છે”(विकास गानडो थयो छे) जिसका मतलब है ‘विकास पगला गया है हैशटैग के साथ वीडियो और जोक्स की बाढ़ आ गई थी। इसके चलते भाजपा के कई दिग्गज नेताओं सहित संघ प्रमुख मोहन भागवत ने लोगों से सोशल मीडिया पर ध्यान न देने की अपील कर डाली।

अब वहां गरबा में लोगों ने पगलाए विकास का प्रदर्शन किया। एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें लोग पागल का रूप रखकर घूम रहे हैं। इन्होंने विकास के प्रिंट वाली टीशर्ट पहन रखी हैं। ये खुद को पागल साबित नहीं करना चाहते बल्कि गुजरात के विकास मॉडल पर तंज कस रहे हैं।

गुजरात में भाजपा के लिए ऐसा व्यवहार वहाँ हो रहे बदलाव को दिखाता है। मोदी के प्रभुत्व वाले इस राज्य में कभी कोई भी सार्वज…

Dikirim oleh Mohd Zahid pada 30 September 2017

ऐसा नहीं है कि भाजपा सोशल मीडिया की ताकत नहीं समझती। लेकिन वहां भाजपा के खिलाफ चल रहे पगलाए विकास वाले कैंपेन की काट ढूंढना भाजपा के लिए मुश्किल हो रहा है। लोग वहां विकास के नाम पर पीटे गए ढिंढोरे की पोल खोल रहे हैं।

देश के व्यापारी वर्ग में मोदी सरकार के प्रति गुस्सा बढ़ता जा रहा है , आश्चर्य की बात है कि जीएसटी लागू होने के 3 महीने बाद तक सरकार जीएसटी की वेबसाइट इस लायक नहीं बना सकी कि उसमे एनेक्चर के ज़रिऐ पूरा रिटर्न दाखिल हो सके।सबसे कष्टदायक यह है कि "आफलाइन" टूल के अपलोड करके रिटर्न या स्टाक की डीटेल्स अपलोड करने की सुविधा का ना होना , इस कारण ट्रान्स-1 मे ऐक्साइज को वापस क्लेम करने के लिए एक एक आईटम की 7 डीटेल्स के साथ इंट्री करना। और बार बार जीएसटी की वेबसाइट का सर्वर बैठना इस समस्या को खीज तक पहुँचाती है।अब यदि कोई 500 या 5000 आइटम बेचता हो तो एक एक आइटम , फिर बिक्री करने वाली पार्टी का नाम , उसका जीएसटी नंबर , खरीद का बिल नंबर , दिनांक और सामान की मात्रा वैसे ही दाखिल करता है जैसे आईआरसीटी की वेबसाइट पर आरक्षण के लिए इंट्री की जाती है। यह सरकार सबको चोर समझती है , चाहे देश की जनता हो या व्यापारी।दरअसल व्यापारी चोर और बेईमान नहीं यह सरकार चोर और बेईमान है जो लिए गये एक्साइज को वापस ना करके उस सामान पर दुबारा टैक्स लेना चाहती है।देश का छोटा और निचले स्तर के व्यापारी सबसे अधिक परेशान हैं , उनके सामने रोजी रोटी की समस्या पैदा हो गयी है , उनको ₹20 लाख तक जीएसटी से मुक्त तो कर दिया गया परन्तु अब ट्रान्सपोर्टर बिना जीएसटी के उनका माल बुक नहीं कर रहा है और बिना ई वे बिल के कारण रास्ते में यदि उसका माल पकड़ा गया तो उसके पास खुद को 20 लाख से कम वाली कैटेगरी साबित करने का कोई आधार नहीं है।भरे दंडमोदी सरकार अपने कार्यकाल में विफलता के कारण उपजे सबसे तिव्र असंतोष के कारण व्यापारियों के निशाने पर है तो उसका एक कारण व्यापारियों का आपसी व्यापार में तनाव और विवाद भी होना है।टार्गेट फस गये जिससे टीओडी खतरे में है तो व्यापार समाप्त होने के कारण भुगतान के लेनदेन में विलम्ब हो रहा है जिससे बहस और तनाव जन्म दे रहा है।1 जुलाई से जीएसटी लागू करने की आपाधापी में बिना तैय्यारी के जीएसटी लागू कर दी गयी जो सबके लिए जी का जंजाल बन गयी है , बेहतर होता यदि सभी तैयारी पूरी करके 3 या 6 महीने बाद लाया जाता तो ऐसी समस्याएँ नहीं आतीं।भाजपा के एक कट्टर समर्थक व्यापारी ने मुझसे कल कहा कि संघ और भाजपा से जुड़े होने के कारण हम चुप हैं परन्तु यह एहसास होने लगा है कि तमाम खामियों के बावजूद कांग्रेस ही इस देश को चला सकती है।कांग्रेस को इस गुस्से को समेटना होगा , 2019 में मोदी सरकार का अंत स्पष्ट दिख रहा है।

Dikirim oleh Mohd Zahid pada 28 September 2017

भाजपा और मोदी का विरोध सिर्फ गुजरात में ही नहीं हो रहा बल्कि, राष्ट्रीय राजधानी में भी मोदी लहर अब विरोधी लहर में बदलने लगी है। अभी हाल ही में दिल्ली के करोलबाग में व्यापारियों ने मोदी हाय हाय के नारे लगाए। इसका भी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। व्यापारी वर्ग जीएसटी से परेशान है। जीएसटी के चलते गुजरात में भी व्यापारी भाजपा से खफा हैं और भाजपा से मुंह मोड़ रहे हैं।

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