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सीबीआई में भी सब कुछ मैनेज होता है ,वर्तमान विवाद को देखकर तो यही लगता है।

alok verma

सीबीआई इस वक़्त खुद कटघरे में है , जिसने कइयों को कटघरे में खड़ा किया था। ताजा विवाद सीबीआई के नंबर वन अधिकारी और नंबर टू के बीच है।आरोप भी कोई मामूली नही बल्कि भ्रस्टाचार का है। सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना (आईपीएस ,गुजरात काडर ) ने सीबीआई के डायरेक्टर अलोक वर्मा पर गंभीर आरोप लगाये है। इसके साथ साथ उन्होंने सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर  ए के शर्मा पर भी गंभीर आरोप लगाये हैं। वही सीबीआई ने भी राकेश अस्थाना के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कराई है। यह सभी आरोप घूसखोरी  अर्थात लेनदेन से सम्बंधित है।

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जिस प्रकार सीबीआई के वरिष्ठ अधिकारी एक दूसरे पर पैसे लेने का आरोप लगा रहे है उससे कम से काम यही बात सिद्ध होती है कि सीबीआई में भी सब कुछ मैनेज होता है। बस आपके पास पैसा होना चाहिये। सीबीआई भी इस बीमारी से मुक्त नहीं है। अब दूसरा सवाल यह उठता है कि सीबीआई ने अब तक जितनी जांचे की है या जिनकी जांचे चल रही है ,वह सही हैं या नहीं या वह भी पैसे के दम पर प्रभावित की गयी है।

तीसरा सवाल यह उठता है कि जब सीबीआई जैसी सर्वोच्च संस्था ही ऐसे आरोपों से घिरी है तो फिर अन्य एजेंसियो का क्या हाल होगा। क्या वह सब भी बीमार है क्या उनमे भी भ्रस्टाचार की बीमारी लगी हुई है। अभी बिना किसी तथ्य के कुछ भी कहना गलत होगा परन्तु इतना अवश्य है कि वह भी पाक साफ़ नहीं होंगे

चौथा सवाल यह उठता है कि सीबीआई में चल रहे आरोपों की जांच कौन करेगा ,खुद सीबीआई तो नहीं करेगी क्योकि वह खुद ही आरोपी है। क्या सरकार दखल देंगी या सर्वोच्च न्यायालय खुद दखल देगा।

पाँचवा सवाल यह उठता है कि क्या उन जांचो की पुनः जाँच होनी चाहिये जिनसे सीबीआई के आरोपी अधिकारी जुडी हुई है ,जिनसे वह  प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हुए है ,क्योकि अब वह जांचे भी संदेह के घेरे में हैं।


ऐसे अनेक सवाल है जो सीबीआई के वर्तमान विवाद से पैदा हो रहे है। सीबीआई की साख अब दाव पर है और इस साख को खुद सीबीआई के बड़े अधिकारी ही कर रहे है।

सीबीआई पर सीबीआई ने खुद ही वॉर किया है। शीर्ष अदालते सीबीआई को पहले ही सीबीआई को पिंजरे का तोता बोल चुँकि है। पर अब यह तोता बीमार भी है।

सरकार कि अब यह जिम्मेदारी बनती है कि वह सीबीआई के साख पर बट्टा लगने से बचाये। जल्द से जल्द वह इसका समाधान निकाले क्योकि यदि एक बार सीबीआई ने अपनी साख खो दी तो दुबारा उसे पा पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन हो जायेगा।

जाते जाते एक सवाल सवाल और कि बीजेपी सरकार में ही क्यों ऐसे संस्थाओ में ऐसा कुछ हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट का चार वरिष्ठ जज और मुख्य जज के बीच विवाद आप को याद ही होगा। हो सकता है जल्द ही ऐसा अन्य संस्थाओ में भी हो, अगर हुआ तो इस बार दाव पर सरकार की साख होंगी।

(Image Credits: Indian Express)

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