fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
विमर्श

पेट्रोल हुआ महंगा मगर लोगों को अफसोस कि 150 रुपये लीटर क्यों नहीं ?

2014 के बाद से लोगों की आर्थिक क्षमता ज़रूर बढ़ी होगी तभी मुंबई में 81 रुपये 93 पैसे लीटर पेट्रल लोग ख़रीद रहे हैं। डीज़ल भी 69 रुपये 54 पैसे प्रति लीटर हो गया है। नोट करने वाली बात है कि एटीएम में पैसे नहीं है। फिर भी नोटबंदी से ज़्यादा नगद चलन में है। इसके बाद भी लोग खुश हैं कि पेट्रोल 81 रुपये 93 पैसे प्रति लीटर ख़रीद कर रॉयल ज़िंदगी जी रहे हैं।

Advertisement

दिल्ली वालों को अफसोस है कि मुंबई की तुलना में उनकी नाक कट रही है। दिल्ली में पेट्रोल 74 रुपये 08 पैसे प्रति लीटर है। सितंबर 2013 में मुंबई में पेट्रोल 83 रुपये 62 पैसे प्रति लीटर हो गया था। उस वक्त लोग दुखी थे। गुस्से में आ गए। क्योंकि तब एटीएम में पैसे भी थे। नगदी का चलन भी आज से कम था।

चार साल पहले अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में कच्चे तेल का भाव 105 डॉलर प्रति बैरल पहुंचा था जब जाकर मुंबई में 83 रुपये 62 पैसे प्रति लीटर पेट्रोल मिला था। यूपीए सरकार की नालायकी को लोग बर्दाश्त नहीं कर पाए। जब कच्चे तेल का दाम 105 डॉलर प्रति लीटर था तब पेट्रोल 200 रुपये प्रति लीटर क्यों नहीं बेचा गया। इसी बात से लोग नाराज़ हो गए थे। नई सरकार समझ गई। कच्चे तेल का दाम घटा मगर पेट्रोल का दाम उतना ही रखा जिससे लोगों को लगे कि 105 डालर प्रति लीटर वाला ही भाव चल रहा है।

मेरा मानना है कि अगर कोई दल 2019 के चुनाव में यह वादा कर दे कि उसकी सरकार बनी तो किसी भी हाल में पेट्रोल 150 रुपये प्रति लीटर से कम पर नहीं बिकेगा, जनता झूम कर वोट दे देगी। इस वक्त जनता ज़्यादा दाम देना चाहती है मगर विपक्ष के रूप में कांग्रेस उन्हें भड़का रही है।

(ये लेखक के निजी विचार हैं। रवीश कुमार वरिष्ठ पत्रकार हैं।)


Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved