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सौ दिनों में उनचालीस लोगों की ‘हत्या’..यह सरकारी व्यवस्था का आतंकवाद है

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1 year ago

सौ दिनों में उनचालीस लोगों की ‘हत्या’.. यह सरकारी व्यवस्था का आतंकवाद है..! यह तमाम अंतरिक्षीय उड़ानों या मंगलयान के माथे पर लिखा हुआ शर्म है..! यह धर्म की समूची कल्पना की बर्बर धूर्तता की महज एक झलक है..! यह आतंकवाद है, यह शर्म है, यह बर्बरता पर गर्व की निर्लज्जता है..! ये कोई सीवर हादसा नहीं, राजनीतिक हत्याएं हैं..! […]

कहानी उस दिन की जब लालू-नीतीश ने शुरू की थी सामाजिक न्याय की लड़ाई

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1 year ago

बिहार में महागठबंधन की जीत के बाद जेएनयू में लगातार गोष्ठियां हो रही थीं, लोग मार्च निकाल रहे थे। उसी दौरान एक परिचर्चा में प्रो. बद्रीनारायण ने जो कहा, उसे आज याद करने की ज़रूरत है, “जनता ने बड़ी उम्मीदों से यह मैंडेट गठबंधन को दिया है, और लालू-नीतीश दोनों के लिए इस विजय को संभाल के रखने की ज़रूरत […]

स्त्री को देवी मानकर पूजते हैं और गाली उसी देवी के अंगों की देते हैं

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1 year ago

चू.., मादर…, बहन…, रंडी, वेश्या, भो… के हमारे समाज में इन शब्दों का बहुतायत के साथ प्रयोग होता है। इन्हें सभी धर्म के मानने वाले लोग इस्तेमाल करते हैं। इन सभी गालियों का प्रयोग हमारे समाज में सभी के लिए होता है पर जिसके लिए होता है वह बहुत ही असहज हो जाता है। गालियां देने का प्रचलन दिनों दिन […]

प्रिय लोकतंत्र बता, हम अपनी भूख को कैसे मिटायें? क्या धूर्तता से भरी मनुस्मृति खाएं?

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1 year ago

प्रिय लोकतंत्र बता… अपनी भूख को हम कैसे मिटायें? भूख से बिलबिलाते एड़ियां घिसकर मरते लोगों का आक्रोश खाएं? या उनकी अंतिम विधि के लिए सूद से लिया कर्ज़ खाएं? आत्महत्या करने वाले किसानों की पेड़ों से टंगी लाशों का फ़ांस खाएं? या आत्महत्या करने के बाद मिलने वाला सरकारी पैकेज खाएं? किसानों की आत्महत्या का दरवाज़ा खोलने वाला गेट […]

आपके आस-पास बहुत से मानसिक रोगी हैं, ये रहा पहचानने का तरीका

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1 year ago

प्राचीन काल से ही भारतीय समाज में मानसिक रोगों को कलंक माना जाता रहा है। ये माना जाता है कि मानसिक रोग से ग्रस्त व्यक्ति पर किसी आत्मा का साया है या वो निम्न प्रवृत्ति का है और समाज में जीने योग्य नहीं है। फिल्मों और धारावाहिकों ने भी इस प्रतिगामी मानसिकता को और हवा दी है। फिल्मों में मानसिक […]

संघ के बाद भाजपा के दूसरे शक्ति श्रोत राम मंदिर के बहाने सक्रिय हो रहे हैं

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1 year ago

आमतौर पर लोग अप्रतिरोध्य बनकर उभरी भाजपा की शक्ति के प्रमुख स्रोत के रूप में डॉ. हेडगेवार द्वारा स्थापित आरएसएस को ही चिन्हित करते हैं, जो गलत भी नहीं है। किन्तु हरि अनंत हरि कथा अनंता की भांति भाजपा की शक्ति के स्रोत भी अनंत हैं और संघ के बाद इसके दूसरे प्रमुख शक्ति के स्रोत में नजर आते हैं, […]

ब्राह्मणवाद के कुचक्र से निकलकर दलितों पिछड़ों को अपनी लड़ाई खुद लड़नी होगी

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1 year ago

धर्म, ईश्वर और आलौकिक की गुलामी एक लाइलाज बीमारी है। भारत में इसे ठीक से देखा जा सकता है। कर्मकांडी, पाखंडी और अपनी सत्ता को बनाये रखने वाले लोग ऐसी गुलामी करते हैं ये, बात हम सभी जानते हैं। लेकिन एक और मजेदार चीज है तथाकथित मुक्तिकामी और क्रांतिकारी भी यही काम करते हैं। इस विषचक्र से आजाद होना बड़ा […]

तीन देश और ईशनिंदा, गौहत्या और फेसबुक से उपजी उन्मादी भीड़

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1 year ago

नई दिल्ली। आज देश एक अलग ही चौराहे पर खड़ा है। जहां एक भीड़तंत्र है, यहां कानून अपना काम नहीं करता बल्कि भीड़ में आकर लोग न्याय करना चाहते हैं वह भी सामने वाले की जान लेकर। कथित गोरक्षा के नाम पर मारा गया जुनैद हो, अख़लाक़ हो या स्वच्छता के नाम पर जफर खान। या फिर धर्म की आड़ […]

सरकार द्वारा सैनेटरी पैड पर टैक्स लगाने का ब्राह्मणवादी कनेक्शन

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1 year ago

जिस देश में सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं के लिए निहायती मानवीय ज़रूरत अदद टॉयलेट्स तक अवेलेबल नहीं हो पात।, जबकि हर कुछ दूरी में लड़कों के लिए ऐसी व्यवस्था है, नहीं भी है तो भी यूरिन करने के लिए पूरा जहान खुला है। महिलाएं इसी डर में बाहर जाने पर पानी नहीं पीती और कितनी तरह की प्रॉब्लम्स झेलती हैं। […]

‘देश में जहां-जहां तीर्थधाम हैं, वहां-वहां दलितों के लिए नारकीयता मौजूद है’

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1 year ago

ज़िंदगी को देखने-समझने के नज़रिये और अपने अनुभव से गुने मायने ना चाहते हुए भी आपके व्यवहार को प्रभावित करतें ही हैं। शायद मैं अब तक भी इतनी परिपक्व नहीं हो पाई कि उन अनुभवों को किनारे रख निष्पक्ष भाव से व्यवहार कर पाऊं। यदि जीवन उन अनुभवों के साथ जी रहें हैं तो हिम्मत या समझदारी ज़रूरी नहीं कि […]

भारतीय सैनिकों को याद रहे की वो अंग्रेजों के गुलाम हैं- तेज बहादुर यादव

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1 year ago

जब कोई सैनिक वर्दी पहन कर सामने से गुजरता है तो देश का हर नागरिक उसे बड़े सम्मान की नजरो से देखता है लेकिन वो किस व्यवस्था मे रहता है। वो अंग्रेजों की बनाई हुई व्यवस्था है जिसमे उन्होंने अपनी सम्प्रभुता कायम करने के लिए भारतीयों को भर्ती किया पर व्यवहार ऐसा किया की उस सैनिक का मनोबल हरदम टूटता […]

फेसबुक के मंदिर में पुरोहित

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1 year ago

ये जो सज्जन टीका लगाए बैठे हैं वे उमंग बेदी हैं। फेसबुक के भारत और दक्षिण एशिया के मैनेजिंग डायरेक्टर। भारत में फेसबुक पर जो भी होता है, उसका श्रेय भी इनका और जो गलत होता है, उसकी जिम्मेदारी भी इनकी। यह 3 जून, 2017 की तस्वीर है। पूजा चल रही है। पंडित बिजी है। बेदी जी के सिर पर […]

‘ब्राह्मणवादियों के नहले पर श्रीमति शीला का दहला’

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1 year ago

देश और दुनिया में बड़े पैमाने पर बदलाव हो रहा है। विज्ञान की अज्ञान पर विजय जारी है। चन्द्रमा और मंगल अब हमारी पँहुच में हैं। हम अकल्पनीय शोध और खोज कर रहे हैं लेकिन कुछ पाखंडी हैं कि अभी भी अपनी चोंचलेबाजी जारी रखे हुए हैं। हिमाचल व देश के कई हिस्सों में अभी भी हिन्दू धर्म पर मनुवाद […]

आदिवासी जनता के बेमिसाल आंदोलन के समक्ष झुक गई बीजेपी सरकार

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1 year ago

जन आंदोलनों के दबाव में आखिरकार भाजपा सरकार को झुकना पड़ा और मुख्यमंत्री रघुवर दास ने कहा है कि सीएनटी की धारा 21 और एसपीटी की धारा 13 में संशोधन कर सरकार ने कृषि भूमि की प्रकृति बदलने का जो प्रस्ताव रखा था। अब उन प्रस्तावों को निरस्त किया जायेगा। पहले टीएसी आदिवासी परामर्शदातृ समिति उस पर फिर से गौर […]

जाति विनाश पर संजय जोठे का सुझाव

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1 year ago

जाति विनाश अगर सवर्णों से अपेक्षित है तो ये व्यर्थ का प्रोजेक्ट है। लेकिन जाति विनाश दलितों पिछड़ों से अपेक्षित है तो इस प्रोजेक्ट से बहुत उम्मीद की जा सकती है। जाति विनाश कैसे होगा इसकी विस्तार से चर्चा करने से पहले दो वक्तव्य याद रखिये। महान आयरिश लेखक, विचारक और नाटककार जार्ज बर्नार्ड शॉ से एक बार किसी ने […]

साठ साल में पहली बार प्रेस क्लब से गिरफ्तारी

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1 year ago

वर्ष 1968 में लालबाग क्षेत्र में ‘चाइना गेट’ नाम का जो भवन यूपी प्रेस क्लब को सरकार ने दस साल की लीज पर दिया उसमे पहली बार पुलिस ने प्रवेश कर एक पूर्व आईपीएस एसआर दारापुरी, प्रोफ़ेसर रमेश दीक्षित समेत आठ लोगों को सोमवार को गिरफ्तार किया. प्रेस क्लब के इतिहास में यह पहली बार हुआ ऐसा बताया जा रहा […]

अगर ‘जुनैद’ न होता तो वो ज़िंदा होता

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1 year ago

“मज़हब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, हिंदी हैं हम वतन है हिंदोस्तां हमारा”… इन पंक्तियों को तबतक पढ़ें जबतक आप खुद को यकीन न दिला सकें कि ये किताबी बातें हैं जिनका वास्तविकता से कोई सरोकार नहीं है। ये पंक्तियां सभागारों में पढ़कर फूले न समाने के लिए ठीक हैं, संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन में भारतवर्ष को परिभाषित करने के […]

हमें भी इंसाफ करने का अधिकार मिलता तो इनका तनता-सिकुड़ता जोश उखाड़ फेंकते

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1 year ago

जो औरत आपको तस्वीर में दिखाई दे रही है वो कोई ऐसी वैसी औरत नहीं है। ये है इस विश्वगुरु, अखंड भारत की ज़मीन पर पैदा हुई दुर्गा काली अन्नपूर्णा। ये जो मंजर है.. वो दरअसल भगवान की लीला है, जिसमे उसके भक्तों की जुबानी घोषित देवी के कपड़े फाड़े गए, बीच बाजार नंगा किया गया और अंत मे पीट […]

श्रेष्ठा ठाकुर ने पंडावादी मर्दों के गिरोह को दिखाया आईना

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1 year ago

एक तो मातहत, उस पर औरत, मुंह खोलने और जुबान लड़ाने की हिम्मत कैसे हुई..!!! पुलिस अफसर श्रेष्ठा ठाकुर का तबादला एक प्रतिनिधि मामला है कि पंडावादी मर्दवाद अपनी सत्ता को लेकर किस कदर हर वक्त चौकन्ना रहता है, और अपने शासितों को कैसे हर वक्त अपनी ‘हैसियत’ में रहने का संदेश देता रहता है! श्रेष्ठा ठाकुर ने पंडावादी मर्दों […]

“रंग से जाति पता लगाओ प्रतियोगिता”

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1 year ago

वैसे तो लड़कियों के इनबॉक्स में रोज़ तमाम तरह के मैसेज आतें हैं, पर बीते दिनों कुछ लड़कियों के जो मैसेज आए उन्होनें मुझे लिखने पर मजबूर कर दिया। पहाड़ों पर घुमक्कड़ी की कई फ़ोटो के अपलोड के दौरान बहुत से कॉमेंट और मैसेज मिले, लेकिन मेरी लड़की दोस्तों ने जो लिखा वो लगभग कई बहुजन लड़कियों के अतीत-वर्तमान और […]

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