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पत्रकार की अपील- इस बार चुप ही रहिएगा प्रधानमंत्री जी….

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1 year ago

70वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले की प्राचीर से बोलने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सुझाव मांगे हैं। इसमें उन्होंने देशवासियों से पूछा है कि वे इस बार किस मुद्दे पर बोलें। ऐसे में पत्रकार प्रशांत तिवारी ने प्रधानमंत्री को अपनी इच्छा जताते हुए पत्र लिखा है। पढ़िए…. आदरणीय प्रधानमंत्री जी मुझे गर्व है आप पर और आपके बोलने […]

तलवार लिए ये बन्दरछाप नेता ही 2019 में बीजेपी का रथ रोकेंगे

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1 year ago

अगर आज राज्यों के चुनाव हो जाएं तो नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में बीजेपी की जीत सुनिश्चित कही जा सकती है लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में ऐसा नहीं होने जा रहा। और अगर मैं एक कदम आगे बढ़ के कहूँ तो मोदी जी की अगुवाई में बीजेपी की हार भी हो सकती है तो चौंकिएगा मत बशर्ते विपक्ष महागठबंधन […]

पंडावाद के दिमागी गुलाम भेड़ियों ने ले ली बूढ़ी विधवा की जान

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1 year ago

इस सच की कल्पना कीजिए कि आपकी या मेरी बासठ साल की बूढ़ी मां शौच के लिए बाहर निकली, रास्ता भटक कर दूसरे मुहल्ले में चली गई… और वहां रात के अंधेरे में लोगों ने सफेद साड़ी वाली इस औरत को डायन बता कर लाठी-डंडों से मारना शुरू किया और मारते-मारते मार डाला। यह कल्पना करते हुए कैसा महसूस हो […]

प्रेमचंद के दलित पात्र कभी विद्रोह नहीं करते, यही उनका धर्म और संस्कृति चाहती थी

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1 year ago

प्रेमचन्द से पहली बार ठीक से आम जनता का साहित्य आरंभ होता है। इसका श्रेय उन्हें दिया जाना चाहिए। साथ ही प्रेमचन्द स्वयं धर्म राष्ट्र और संस्कृति के मुद्दों पर कई बार दलित विरोधी, शूद्र विरोधी नजर आते हैं। उनके दलित पात्र कभी विद्रोह नहीं करते, यही प्रेमचन्द और उनका धर्म और उनकी संस्कृति चाहती थी/है। असल में प्रेमचन्द एकदम […]

राजनीति में विश्वासघात के लिए कुख्यात रहे हैं नीतीश कुमार!

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1 year ago

जो लोग आज जदयू के अंदर नीतीश कुमार की ज़्यादती व शरद यादव की रहस्यमयी व मानीखेज चुप्पी को भावुकता के चश्मे से देखते हैं, वो शायद भूल रहे हैं कि अपने उन्नयन व पार्टी के अंदरूनी लोकतंत्र को कुचलने के लिए, विरोध के हर संभव स्वर को तहस-नहस करने हेतु नीतीश ने हर अनैतिक काम किया। जिस जॉर्ज फर्णांडीस […]

वो उस मां के जिगर का टुकड़ा था जो उसके सामने मांस का लोथड़ा बनके सड़क पर पड़ा था…

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1 year ago

सरकार चाहे झारखंड की हो, गुजरात की हो या मध्य प्रदेश की हो एक चीज का ढिंढोरा खूब पीटा जाता है कि जच्चा-बच्चा की अच्छी देखभाल और स्वस्थ प्रसूति बहुत जरूरी है। इसके लिए तमाम नियम और कानून भी बने हैं, स्वास्थ्य सुविधाएं भी मुहैया कराई गई है। डॉक्टर और सहयोगी कर्मचारियों का अच्छा-खासा जखीरा है सरकार के पास। बेहिसाब […]

मोदीजी, क्या पनामा लीक्स के बारे में आपको कुछ नहीं पता?

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1 year ago

ईमानदारी के नाम पर बिहार का तख्तापलट करने वाली भाजपा के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम वरिष्ठ लेखक काशीनाथ सिंह ने खुला पत्र लिखा है। आप भी पढ़िए… आदरणीय प्रधान मंत्री जी,  माफ़ कीजिएगा। पाकिस्तान की तारीफ़ कर रहा हूं। बुरा लगे तो और माफ़ कर दीजिएगा लेकिन आज पाकिस्तान की तारीफ़ का दिन है। पाकिस्तान ने साबित कर दिया […]

नीतीश कुमार के नाम दिलीप मंडल की खुली चिट्ठी

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1 year ago

नीतीश जी, आप 2005 में पहली बार बिहार के मुख्यमंत्री बने। आपने बिहारियों को यह सपना दिखाया कि बिहार जो बहुत बदहाल है, उसे आप ठीक कर देंगे। आपके 2005 के घोषणापत्र में टर्नअराउंड शब्द है। आपने शिक्षा और स्वास्थ्य में चमत्कारिक बदलाव का वादा किया। उस समय की आपकी पार्टनर बीजेपी का भी यही वादा था। नीतीश जी, इस […]

वंचितों के लिए शिव की तरह जहर पिया है लालू ने …

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1 year ago

लालू जी आज जो कुछ हैं या जिस मुकाम पर पँहुचे हैं, उसका बहुत ही गूढ़ कारण है। लालू जी मिशन के प्रति समर्पण सहित अपने सरल, सहज, गम्भीर, संघर्षशील, कठिन से कठिन परिस्थितियों से लड़ने वाले, हार न मानने की प्रबृत्ति वाले एवं विशाल हृदय के मालिक वाले स्वभाव के कारण अजेय और अपराजेय हैं। लालू जी नरम दिल, […]

‘लालू यादव’ बनना कोई हंसी-ठठ्ठा नहीं है..

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1 year ago

लालू यादव जी के नाम पर कोई जितना भी हंस ले लेकिन याद रखिये “लालू” बनना कोई हंसी-ठठ्ठा नही है।लालू जैसा चरित्र सदियों में पैदा होता है। 1980 के दशक में जेपी अंदोलन के दौरान बिहार के राजनीतिक क्षितिज पर उभरकर आये इस अद्भुत एवं आश्चर्यजनक प्रतिभा ने पूरे देश को एक नई दिशा दिया है। सामाजिक न्याय के सबसे […]

सच बताना मर्दों, ये सामूहिक बलात्कार किस स्कूल से सीखा?

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1 year ago

सच बताना मर्दों, ये सामूहिक बलात्कार जैसी प्रक्रिया के प्रत्येक पड़ाव से गुजरना किस स्कूल से सीखा? कहां से सीखे तुम लोग झूठ बोलना? तुम हिंदुस्तानी मर्दों की गैरत के किस्से तो इतने मशहूर हैं कि तुम लोग एक औरत को बांट नहीं सकते एक साथ एक वक्त में। फिर कहां से उठा लाए ये कुत्ते और सुअरों से भी […]

‘दोगलयुग’ की संस्कृति में जी रहा है देश

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1 year ago

उत्तर प्रदेश चुनाव जीतने के बाद गिरोह का उत्पात चरम पर है, योगी के मुख्यमंत्री बनने की घोषणा मात्र से ही शुरु हुआ देश भर में उपद्रव लगभग चालू ही है। समझिए कि एक चुनाव जीतना और हारना आज कितना महत्वपूर्ण हो गया है , चुनाव में जीत और हार की बहुत विवेचना हो चुकी है। अब यह समझिए कि […]

एक दिन डर का राष्ट्रवाद या राष्ट्रवाद का डरवाद सफ़लतापूर्वक क़ायम हो जाएगा- रवीश कुमार

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1 year ago

भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति में तीन सौ फ़ीसदी की वृद्धि की ख़बर छपी। ऐसी ख़बरें रूटीन के तौर पर लगभग हर उम्मीदवार की छपती हैं जैसे आपराधिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि की ख़बरें छपती हैं। जनता पर इन तीनों बातों का कोई असर नहीं होता है। कुछ मीडिया ने अमित शाह की ख़बर नहीं छापकर और कुछ […]

भारत की शिक्षा और वर्ण व्यवस्था के माफिया

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1 year ago

भारत में आजादी के बाद इंजीनियरिंग, विज्ञान, मेडिसिन या मेनेजमेंट या दर्शन मानिविकी और समाज विज्ञान की पढाई करने वाले तबके पर और उसकी समाज या देश के प्रति नजरिये पर गौर करना जरुरी है. भारत के इस सुदीर्घ दुर्भाग्य और हालिया “गोबर और गौमूत्र” के विराट दलदल को समझने के लिए हमें इस पीढ़ी के मन को और “वर्ण […]

औरत होना यानी हर हाल में दो पाटों के बीच पिसना

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1 year ago

वही चूल्हा चौका, वही बच्चे पैदा करना, वही घर की चारदीवारी और वही बात-बात पर मर्दों का मुंह ताकना। पर धीरे-धीरे शिक्षा के बढ़ते स्तर ने स्त्रियों को अपने विषय में सोचने का मौका दिया। शिक्षा पूरी होने के वक्त से ही लड़कियों को स्वतंत्रता का स्वाद लग चुका होता है। अब वह इस स्वतंत्रता का भरपूर आनंद उठाना चाहती […]

शरद यादव जी! इतिहास बनाने का मौका बार-बार नहीं मिलता

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1 year ago

आदरणीय शरद जी! अब विलम्ब ठीक नही……. मैंने 1990 के दशक में मण्डल आंदोलन में शरद यादव जी की अग्रणी भूमिका को देखते हुए उनसे प्रभावित हो उन्हें देश के पिछडो का सर्वश्रेष्ठ बुद्धिजीवी नेता मानते हुए उनके नेतृत्व में काम करना शुरू किया था। मैं आर्थिक स्थिति ठीक न होने के बावजूद शरद यादव जी के बदायूं से पराजय […]

युवाओं का रोजगार छीनकर रिटायर्ड अफसरों पर हर साल 36 करोड़ खर्च कर रही उत्तराखंड सरकार

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1 year ago

कुछ शब्दों का अर्थ हुक्मरानों के मुंह से निकलते ही डरावना हो जाता है। आम तौर पर वित्तीय अनुशासन सुनने में अच्छा ही लगता है। लेकिन जैसे ही यह शब्द हुक्मरानों के मुंह से निकलता है, इसका अर्थ ही बदल जाता है। तब इसका अर्थ हो जाता है सुविधाओं में कटौती, रोजगार के अवसरों में कटौती। दो दिन पहले उत्तराखंड […]

ये बिहार का चित्रकार कौन है?

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1 year ago

उत्‍तराखण्‍ड, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश (और तमिलनाडु) में बीजेपी ने अपनी सरकार बनाने के लिए संविधान की धज्जियां कैसे उड़ायी थीं, अगर याद हो और आपके ज़ेहन में फांसी पर लटके हुए अरुणाचल के पूर्व मुख्‍यमंत्री की तस्‍वीर बची हो, तो यह कहानी आपके काम की हो सकती है। ये घटनाएं गवाह हैं कि बिहार की सत्‍ता में आने के लिए […]

नीतीश कुमार: धारणाप्रधान राजनीति का अविश्वसनीय होता छवि केंद्रित चेहरा

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1 year ago

मुल्क की राजनीति के क्रीड़ांगन में हर किसी ने नियमों का, मान्यताओं का, मैत्री-धर्म का व सियासी पाकीज़गी का मज़ाक उड़ाया है। ये ऐसा उपन्यास है, जिसमें हर एक किरदार ने हर दूसरे पात्र को किसी-न-किसी मोड़ पर धोखा दिया है। देश को हर मुसीबत में परिवर्तन के पहिए के लिए ज़मीन मुहैया कराने वाले बिहार की राजनीतिक उठापटक तेजी […]

ऐ सुशासन बाबू की अंतरात्मा… क्या तेरा कदम 71 विधानसभा के लोगों के साथ धोखाधड़ी नहीं

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1 year ago

#नीतीश_की_अंतरात्मा नेताओं के लिये अंतरात्मा उनके सिस्टम में इंसटाल्ड एक ऐसी अवसरवादी एप्लीकेशन है, जो बाकी वक्त तो सोयी पड़ी रहती है लेकिन टेढ़े हो गये उल्लू को सीधा करने के लिये फौरन एक्टीवेट हो जाती है… जैसी कल एकाएक सुशासन बाबू के सिस्टम में एक्टिवेट हो गयी। बहरहाल, किसका साथ पकड़ना है किसका छोड़ना… यह उनका अपना अधिकार है, […]

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