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भाजपा में भी वंशवाद, नेताओं के 30 बेटे और बेटियों को मिला टिकट

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(Image Credits: The Hindu)

वैसे तो भाजपा सरकार दूसरे सरकारों पर वंशवाद का आरोप लगाती आ रही है। परन्तु मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार में वंशवाद देखा गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी का कहना था की नामदार नहीं कामदार नेताओ को पार्टी में तरजीह देनी चाहिए परन्तु मोदी जी की यह हिदायत मध्यप्रदेश भाजपा के लिए कोई मायने नहीं रखती है। पार्टी के टिकट बंटवारे में जिस प्रकार से वंशवाद चला उसे देखकर यही लगता है कि पार्टी ने बड़े नेताओं के दबाव के आगे सिर झुका दिया है।

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होने वाले विधानसभा चुनाव के लिए टिकट को लेकर स्थिति बिलकुल साफ़ हो चुकी है। पार्टी ने सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। इन टिकटों पर ज्यादातर नेताओ के बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों के नाम है। माना जा रहा है करीब 41 नेताओ ने अपने बेटे-बेटियों और रिश्तेदारों को टिकट दी है।

इस बार पार्टी ने जिस तरह नेता पुत्रों और रिश्तेदारों को टिकट दिया है। उससे यह साफ़ स्पष्ट होता है कि पार्टी कहीं न कहीं अपने बड़े नेताओं के पुत्रमोह में फंस गई है। भाजपा पार्टी ने इस बार 30 ऐसे लोगो को चुनाव में उतारा है जो नेता के पुत्र या पुत्री है। वंशवाद के नाम पर कई नए चेहरे भी इस बार विधानसभा चुनाव में नजर आएंगे।

बीजेपी नेताओं के परिवार के सदस्यों के नाम जिन्हे चुनाव में उतारा गया है

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सबसे बड़ा नाम आकाश विजयवर्गीय कैलाश विजयवर्गीय के पुत्र है जिन्हे टिकट दिया गया है। पार्टी महासचिव कैलाश विजयवर्गीय के बेटे आकाश विजयवर्गीय को पार्टी ने इंदौर-3 से उम्मीदवार बनाया है। इस बार विधायक उषा ठाकुर की जगह आकाश को दी गयी है। ठाकुर को पार्टी ने कैलाश विजयवर्गीय की सीट महू से चुनाव मैदान में उतारा है। इस वंशवाद को लेकर पार्टी पर सवाल उठाये जा रहे है। उषा ठाकुर का कहना है कि उन्होंने पांच साल इंदौर तीन में काम किया है। वहीं पार्टी के बड़े नेता कैलाश विजयवर्गीय इस बार चुनाव नहीं लड़ेंगे।

भाजपा में वंशवाद का सबसे बड़ा दूसरा चेहरा कृष्णा गौर का है, जिन्हें पार्टी ने भोपाल की गोविंदपुरा सीट मैदान में उतारा है। कृष्णा गौर पूर्व मुख्यमंत्री और गोविंदपुरा सीट से विधायक बाबूलाल गौर की बहू हैं। गोविंदपुरा सीट पर टिकट पर फैसला करने से पहले पार्टी के बड़े नेताओं की हालत ख़राब हो गयी । टिकट कटने की आंशका के बीच बाबूलाल गौर की कांग्रेस नेताओं से मिलने की खबरें भी आती रही और दोनों ही नेताओं की निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारियों की खबरें भी छाई रहीं।

चुनाव से पहले ही कांग्रेस को छोड़ कर पूर्व सांसद प्रेमचंद गुड्डू भाजपा में शामिल हुए। इसके चलते प्रेमचंद गुड्डू ने अपनी जगह अपने बेटे अजीत बौरासी को पार्टी ने घट्टिया सीट से चुनावी मैदान में उतारा है। सुचना अनुसार यहां पर पार्टी ने पहले सतीश मालवीय को टिकट दिया था, लेकिन टिकट होने के कुछ घंटों के बाद गुड्डू को पार्टी में शामिल किया गया, उसके तुरंत बाद ही पार्टी ने सतीश मालवीय का नाम वापस लेते हुए इसे टाइपिंग मिस्टेक बता दिया था।

इस वंशवाद में एक और बड़ा नाम मुदित शेजवार का भी है। पार्टी कैबिनेट मंत्री गौरीशंकर शेजवार ने अपनी जगह उनके बेटे मुदित शेजवार को सांची से चुनाव मैदान में उतारा है।

एक तरफ पार्टी ने मंत्री हर्षसिंह का टिकट काटकर रामपुर घेलान से उनके बेटे विक्रम सिंह को टिकट दे दिया है। इस वंशवाद में एक और बड़ा नाम सामने आ रहा है। पार्टी ने सिरोंज से पूर्व मंत्री और व्यापमं घोटाले के आरोपी लक्ष्मीकांत शर्मा के भाई उमाकांत शर्मा को चुनावी मैदान में उतारा है।

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