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‘आप विधायकों की सदस्यता पर दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला मोदी सरकार के गाल पर एक जोरदार तमाचा’

नई दिल्ली. आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन पर रोक दिल्ली हाई कोर्ट की रोक के बाद आम आदमी पार्टी में जश्न का माहौल है. हाई कोर्ट के इस फैसले से साफ हो गया है कि सभी विधायकों की सदस्यता बरकरार रहेगी. कोर्ट के इस फैसले को लेकर लोग सोशल मीडिया पर आम आदमी पार्टी के पक्ष और विपक्ष में प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. लाभ के पद के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने आज दिल्ली में सत्तासीन आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने के चुनाव आयोग के नोटिफिकेशन पर रोक लगा दी है.

कोर्ट के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की विधायकी बरकरार रहनी तय है. कोर्ट के इस फैसले के बाद आम आदमी पार्टी में जश्न का माहौल है. सोशल मीडिया पर लोग इस गंभीर मामले को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं. तो आइए नजर डालते हैं ऐसी ही कुछ प्रतिक्रियाओं पर. मैंगो मैन सुमित नाम के यूजर ने लिखा कि 20 आप विधायकों की सदस्यता मामले में दिल्ली हाई कोर्ट का फैसले मोदी सरकार के गाल पर तमाचा है.

एक यूजर रुपेंद्र रुप लिखते हैं कि मोदी जी ने संविधानिक संस्थाओं को बंधक बनाया हुआ है, दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले से ये साफ हो गया. मोदी जी ने अपनी के साथ साथ राष्ट्रपति की भी इज्जत मिट्टी में मिला दी. एक अन्य ट्वीट में रुप लिखते हैं कि बीजेपी को नया ऑफिस रास नहीं आ रहा है. इस ऑफिस में शिफ्ट होने के बाद वो लागातर हार का सामना कर रही है.

आरती नामक एक ट्विटर यूजर कहती हैं कि दिल्ली हाईकोर्ट का ये फैसला मोदी सरकार के गाल पर एक जोरदार तमाचा है. आरती ने मोदी सरकार चुनाव आयोग के दुरुपयोग का आरोप लगाया. उन्होंने लिखा कि आयोग ने मोदी सरकार के दबाव में नियमों ताक पर रखकर आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को अयोग्य करार दिए जाने वाला नोटिफिकेशन जारी किया था. लेकिन कोर्ट के इस फैसले को सलाम है. जिसने संविधान और भारत के लोकतंत्र की मर्यादा बनाए रखी.

वहीं अनुराग ढांढा नाम के यूजर ने कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं. अनुराग लिखते हैं कि 20 आप विधायकों को अयोग्य ठहराने का चुनाव आयोग का पक्षपातपूर्ण फैसला था. ये कोर्ट के फैसले से साफ हो गया है. उन्होंने लिखा कि चुनाव आयोग जैसी संविधानिक संस्था से ऐसे फैसले की उम्मीद नहीं की जी सकती है.

बता दें कि लाभ के पद मामले में चुनाव आयोग ने 19 जनवरी 2018 को आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को लाभ के पद मामले में अयोग्य करार देने की सिफारिश की थी. जिनको संवैधानिक तौर पर अयोग्य करार दिया गया था. राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तरफ से चुनाव आयोग की सिफारिशों को मंजूर कर दिया था.

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