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मोदी सरकार में ध्वस्त हुआ देश का आर्थिक ढांचा, मतदाताओं से खो दिया विश्वास- यशवंत सिन्हा

बीजेपी के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने एक बार फिर केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर हमले किए है। पूर्व वित्तमंत्री ने एनडीए सरकार के साथ कई मुद्दों पर नाराजगी व्यक्त की, जिसमें भारत की अर्थव्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा जैसे मुद्दे शामिल हैं। अंग्रेजी समाचार पत्र द इंडियन एक्सप्रेस में डियर फ्रेंड स्पीक अप के नाम से सिन्हा का पत्र प्रकाशित किया गया है। पत्र में यशवंत सिन्हा ने बीजेपी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण अडवाणी और मुरली मनोहर जोशी से भी पीएम मोदी के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की हैं।

यशवंत सिन्हा ने बीजेपी सांसदो को लिखी चिट्ठी में लिखा कि 2014 में देश की जनता ने हमें भरपूर समर्थन और विश्वास दिया। हम सभी 2014 में मिली विजय से काफी खुश और उत्साहित थे। हमें उम्मीद थी कि हम देश की जनता को एक सशक्त सरकार देने में कामयाब हो पाएंगे। लेकिन सरकार के शासन में चार साल पूरे होने के बाद भी हम जनता के विश्वास पर खरे नहीं उतर पाए हैं।

पार्टी के सभी नेताओं ने पीएम मोदी और उनकी टीम को अपना पूर्ण विश्वास दिया। सरकार अब केंद्र में चार साल पूरे हो चुके हैं। और सरकार ने अबतक संसद में पांच बजट पेश कर चुकी हैं। हालांकि इन सब के बावजूद सरकार ने अपने लक्ष्य से भटक गई हैं। और इसके साथ ही सरकार ने पिछले चार सालों में अपने वोटरों का विश्वास खो दिया हैं।

सिन्हा ने अपने पत्र में देश की आर्थिक स्थति पर चिंता जताते हुए लिखा कि देश का आर्थिक ढांचा ध्वस्त होने की कगार पर हैं। सिन्हा ने लिखा कि कभी हम विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था थे।

सिन्हा ने देश की आर्थिक स्थति पर तंज कसते हुए लिखा कि आज विश्व में सबसे तेजी से बढ़ने वाली अर्थव्यवस्था में देश के किसान मुश्किल हालातों का सामाना करने पर मजबूर हैं। देश का नौजवान बिना नौकरी के बेरोजगार भटकने के लिए मजबूर हैं।

देश में छोटे व्यापारी अपने व्यापार से हाथ धो बैठे हैं। पिछले चार सालों में देश के बैंकिंग प्रणाली में सबसे ज्याद भ्रष्टाचार पीएम मोदी के शासनकाल में ही हुआ हैं। सिन्हा ने कहा कि बड़े व्यापारी बैंकिंग प्रणाली का मजाक बनाकर देश के हजारों करोड़ो रूपये लेकर देश से चंपत हो जाते हैं और देश के रक्षक उन्हें रोकने की बजाय केवल उन्हें देश छोड़कर भागते हुए देखते रहते हैं।

सिन्हा ने लिखा कि देश के भीतर आज जिस तरह का माहौल बन चुका है इसमें महिलाऐ खुद को महफूज नहीं समझती। सिन्हा ने पीएम मोदी के विदेश दौरों को लेकर तंज कसते हुए कहा कि प्रधानमंत्री जी विदेश की यात्राओं में व्यस्त हैं। और देश में आए दिन महिलाओं का रेप जैसी घटनाऐं सामने आ रही हैं।

सिन्हा ने अपने पत्र में लिखा कि आज बीजेपी में पार्टी के भीतर लोकतंत्र की जगह तानाशाह ने ले ली हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि हालात तो यहां तक खराब हो चुके हैं कि अब संसदीय दल की मीटिंग में सांसदो को बोलने तक नहीं दिया जाता जबकि पहले पार्टी में सभी को अपनी बात रखने की पूरी आजादी थी।

सिन्हा ने लिखा कि अब ऐसा होता है कि केवल प्रधानमंत्री जी बोलते है और बाकी सब केवल उनकी बात सुनते हैं किसी को भी पार्टी में अपनी बात रखने का अधिकार नहीं हैं। सिन्हा ने लिखा कि आज पार्टी दफ्तर एक कॅारपरेट ऑफिस की भांति काम करता हैं।

सिन्हा ने लिखा कि संसद के सुचारू रूप से नहीं चलना लोकतंत्र के लिए एक खतरे जैसा हैं। उन्होंने लिखा कि पीएम मोदी ने कभी भी विपक्ष के नेताओं के साथ बैठकर संसद के गतिरोध को खत्म करने का प्रयास नहीं किया। जिसकी वजह से देश की जनता के करोड़ो रूपये का नुकसान हुआ और कई सारे अहम मुद्दों पर संसद में बहस नहीं हो पाई।

सिन्हा ने अपनी चिट्ठी में लिखा कि अब समय आ गया हैं कि हम देश के हित में अपनी आवाज उठाएं। मैं उन दलित नेताओं से काफी प्रभावित हूं जिन्होंने दलितों के उत्थान के लिए पार्टी के भीतर ही अपनी आवाज बुलंद की हैं।

सिन्हा ने अपनी चिट्ठी में बीजेपी के वरिष्ठ नेताओं आडवाणी और जोशी से अपील की वह अब खुल कर सामने आकर देश हित में अपनी आवाज बुलंद करे।

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