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हड़ताल के चलते 108 के कर्मचारी ने कि आत्मदाह का प्रयास

भोपाल। 26 अप्रैल से प्रदेशभर में 108 के कर्मचारियों की हड़ताल अभी भी जारी है। हड़ताल के चलते हर ओर हालात बिगड़ गए हैं। इसी बीच कंपनी के ईदगाह हिल्स दफ्तर के बाहर हड़ताल पर बैठे एक कर्मचारी श्यामसुंदर शर्मा ने आत्मदाह करने का प्रयास भी किया। वह ग्वालियर का रहना वाला है। वहीं एम्बुलेंस संचालित करने वाली कंपनी ने इस मामले में जबलपुर हाईकोर्ट में हड़ताल के खिलाफ याचिका दायर की है। जिस पर कोर्ट ने मौखिक तौर पर सरकार से पूछा है कि, उसने इस मामले में क्या कदम उठाए हैं?

 

क्या है मामला
बता दें कि 108 के कर्मचारी अपनी मांगें पूरी न होने तक हड़ताल जारी रखने का ऐलान कर चुके हैं, वहीं एम्बुलेंस संचालित करने वाली कंपनी ने इस मामले में हाथ खड़े कर लिए हैं। कंपनी के व्यवहार के चलते मरीजों की जिंदगी दांव पर लगी हुई है। वहीं, गुरुवार शाम से भोपाल में करीब दो दर्जन कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

 

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मांगो को लेकर सुनवाई ना होने के चलते शुक्रवार को कंपनी के ईदगाह हिल्स दफ्तर के सामने हड़ताल के दौरान ग्वालियर से पहुंचे एक कर्मचारी श्यामसुंदर शर्मा ने आत्मदाह की कोशिश की। हालांकि मौके पर मौजूद पुलिस ने उसे ऐसा करने से रोक लिया। बाद में उसे पुलिस थाने लेकर भी गई। इस बीच प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से उसे छुड़ाने की कोशिश भी की।

 

वहीं, इस मामले को लेकर स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने हड़ताल को अमानवीय करार देते हुए कहा है कि, हड़ताल करने वालों में मानवता का धर्म नहीं है। इन दिनों मप्र में 108 एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी जिगित्सा हेल्थ केयर से जुड़े एंबुलेंस के पैरामेडिकल स्टाफ और पायलटों की हड़ताल जारी है। जिसके चलते करीब दो दर्जन कर्मचारी भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं।

 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक गुरुवार तक 108 एंबुलेंस के कॉल सेंटर पर 10000 लोगों ने मदद मांगी। इनमें से 3000 लोग ऐसे थे, जिनको एक्सीडेंट, हार्टअटैक, डिलीवरी, पेट दर्द व अन्य गंभीर वजह से एम्बुलेंस की जरूरत थी। लेकिन हड़ताल के चलते उन्हें अपने साधन से ही हॉस्पिटल पहुंचना पड़ा।

 

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कर्मचारियों की हड़ताल को देखते हुए सरकार ने दावा किया है कि कर्मचारियों के हड़ताल के बावजूद भी प्रदेश में किसी भी प्रकार की अव्यवस्था नहीं होने दी जाएगी। वहीं, कंपनी ने एम्बुलेंस के संचालन के लिए पायलट का इंतजाम करने का दावा किया है, लेकिन जानकारी के अनुसार प्रदेश भर में 606 एम्बुलेंस में से महज 400(बिना पैरामेडिकल स्टाफ के) ही दौड़ सकीं। इसके अलावा कई जगह तो पुलिस के द्वारा डायल हंड्रेड और जननी एक्सप्रेस की मदद से कुछ मरीजों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है।

 

आपको बता दें कि जिगित्सा हेल्थ केयर के अधिकारियों के अनुसार कर्मचारी जिन मांगों को लेकर हड़ताल कर रहे हैं, उनको पूरा करना अधिकार क्षेत्र से बाहर है। केवल एक मांग को लेकर एनएचएम के अधिकारियों से बातचीत चल रही है। कंपनी वैसे भी नियमों का पालन कर रही है। किसी से भी 12 घंटे काम नहीं लिया जा रहा।

 

इस मामले पर 108 एंबुलेंस कर्मचारी संघ मप्र के मीडिया प्रभारी असलम खान का कहना है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती तब तक हड़ताल जारी रहेगी। हर बार जिला प्रशासन हस्तक्षेप करता है, आश्वासन देता है लेकिन मांगों का निराकरण नहीं होता।

 

(संपादन- भवेंद्र प्रकाश)

 

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