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40 करोड़ मजदूरों को प्रधानमंत्री मोदी ने दिया धोका, न्यूनतम वेतन का बिल पेश करेगी सरकार

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(image credits: MyNation)

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान ऐसी कई योजनाए निकाली जिसमे दावा किया गया था की किसानो से लेकर मजदूरों तक इन योजनाओ का लाभ मिलेगा। परन्तु जैसे जैसे लोकसभा चुनाव पास आते रहे वैसे वैसे मोदी की इन स्कीमो से अधिकतर लोगो को नुकसान ही झेलना पड़ा है।

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एक बार फिर प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी देश के मजदूरों के लिए नहीं योजना लाने जा रहे है। परन्तु कुछ लोगो ने इसे मजदूरों के साथ हो रही धोखाधड़ी बताया है। कहा जा रहा है की केंद्र सरकार देश के मजदूरों को बड़ा धोका दे रही है। 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार 180 रुपए से कम का देशव्यापी दैनिक न्यूनतम वेतन का बिल पेश करने के लिए लगभग तैयार है। सरकार खुद के एक्सर्ट पैनल की 375 रुपए प्रतिदिन न्यूनतम वेतन की सिफारिश को दरकिनार कर यह बिल पेश करने जा रही है। स्वतंत्र विश्लेषकों और दो ट्रेड यूनियन के सदस्यों ने सरकार के इस कदम को ‘मजदूर विरोधी’ बताया है। इनका कहना है कि सरकार ने देशभर के 40 करोड़ मजदूरों के साथ विश्वासघात किया है।

बुधवार यानी 10 जुलाई, 2019 को श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि न्यूनतम वेतन 178 रुपये प्रति दिन होगा, लेकिन उनकी घोषणा ने सरकार की पूरी योजना के बारे में नहीं बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस में गंगवार ने कहा, ‘3 जुलाई को कैबिनेट ने पहले वेतन संहिता बिल को मंजूरी दे थी। अब यह किसी भी दिन लोकसभा में लाया जा सकता है। सरकार के इस कदम से चालीस करोड़ लोगों को फायदा होगा। कुछ राज्यों में अभी दैनिक वेतन 50, 60 और 100 रुपए है। हमने तय किया है कि न्यूनतम मजदूरी 178 रुपए प्रतिदिन होगी।’

पहले भी  केंद्र सरकार ने मजदूरों के लिए बिल पास किये है परन्तु उनका लाभ अभी तक किसी को नहीं मिल पाया है। मोदी ने अपने कार्यकाल के दौरान मजदूरों के लिए प्रतिदिन न्यूनतम आय को बढ़ाया था परन्तु चुनावी समय के दौरान वह योजना भी धूल खाने लगी। वहिंग अब केंद्र सरकार के इस फैसले पर भी स्वतंत्र विश्लेषकों और दो ट्रेड यूनियन खासा नाराज दिख रही है। दूसरी और एक कमिटी ने मजदूरों की न्यूनतम प्रतिदिन आय 375 रूपए करने का सुझाव दिया था। 


श्रम अर्थशास्त्री अनूप सतपथी के नेतृत्व वाली एक कमेटी ने न्यूनतम दैनिक मजदूरी 375 रुपए प्रतिदिन करने का सुझाव दिया था। जबकि सरकार द्वारा प्रस्तावित नई न्यूनतम दैनिक मजदूरी कमेटी की सिफारिश से आधे से भी कम है। कमेटी ने देश में पांच क्षेत्रों के लिए 342 रुपए से लेकर 447 रुपए तक की वैकल्पिक दरों का भी सुझाव दिया था।

सरकार के इस प्रस्ताव की आरएसएस से जुड़े भारतीय मजदूर संघ यानि बीएमएस ने भी बड़ी आलोचना की है। बीएमएस ने सरकार के 178 रुपए दैनिक वेतन की घोषणा को बेकार बताते हुए कहा कि सुझाव देने वाले बोर्ड ने इसपर चर्चा नहीं की। बीएमएस के महासचिव विरजेश उपाध्याय ने कहा, ‘विशेषज्ञ समिति की अनुशंसा पर चर्चा करने और एक दर तय करने के लिए बोर्ड उपयुक्त निकाय है। सरकार आखिरकार बोर्ड के फैसले पर विचार करेगी, लेकिन बोर्ड में चर्चा से पहले 178 रुपये की घोषणा आश्चर्यजनक है।’

मोदी सरकार ने पहले भी देश की जनता के साथ धोका किया है और अब एक बार फिर मजदूरों के साथ धोका करने जा रही है। जहाँ महंगाई आसमान छु रही है वही मोदी सरकार मजदूरो को कम पैसे देकर उन्हें लुभाने की कोशिश कर रही है। देखा जाए तो यह मोदी सरकार एक बार फिर वोट हासिल करने के लिए नए नए तरीके अपना रही है। 

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