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मंदी के बीच मोदी सरकार को एक और झटका, IMF ने कहा भारत की हालत खस्ता

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भाजपा की केंद्र सरकार लगातार जनता से झूठे वादे किये जा रही है। भारत में बढ़ती मंदी के दौर में बेतुके बयान दिए जा रहे है। भारत की वित्त मंत्री ही बेतुके बयान दे रही है इस दौरान बल्कि उन्होंने देश के युवाओ को ही मंदी का जिम्मेदार ठहरा दिया था। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने नई पीढ़ी की बदलती प्राथमिकताओं को वाहनों की बिक्री में गिरावट की एक वजह बताया है। उन्होंने मंगलवार को कहा कि युवा नई कार की EMI चुकाने की बजाय ओला-उबर या मेट्रो में यात्रा करना पसंद कर रहे हैं जिससे ऑटो सेक्टर में मंदी बढ़ रही है।

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भारत की जब वित्त मंत्री ही ऐसे बयान दे तो बाकी से आप क्या ही उम्मीद रख सकते है। केंद्र सरकार लोगो के 5 ट्रिलियन अर्थव्यवस्था के झूठे वादे और सपने दिखा रही है। केंद्र की मोदी सरकार भले ही देश की अर्थव्यवस्था को बेहतर दिखाने में जुटी हुई हो, लेकिन अर्थव्यवस्था की हालत किसी से छिपी नहीं है। भारत की अर्थव्यवस्था की हालत बेहद खस्ता है इस पर अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भी मुहर लगा दी है। गुरुवार को IMF यानि  International Monetary Fund ने भी कह दिया कि भारत की आर्थिक वृद्धि उम्मीद से काफी कमजोर है।

 IMF के अनुसार, कॉरपोरेट और पर्यावरणीय नियामक की अनिश्चितता और कुछ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की कमजोरियों की वजह से भारतीय अर्थव्यवस्था की हालत ऐसी है। अंतराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत की मौजूदा स्थिति के चर्चे होने लगे है।  IMF प्रवक्ता गेरी राइस ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हम नए आंकड़े पेश करेंगे, लेकिन खासकर कॉरपोरेट एवं पर्यावरणीय नियामक की अनिश्चितता और कुछ गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की कमजोरियों की वजह से भारत में हालिया आर्थिक वृद्धि उम्मीद से बेहद कमजोर है।”

साल 2018-19 के पहली तिमाही में जीडीपी ग्रोथ रेट 8.1 फीसदी थी जो इस साल की पहली तिमाही में गिरकर 5.8 फीसदी रह गई है। इस तरह एक साल में करीब 25 फीसदी की गिरावट जीडीपी ग्रोथ रेट में रही है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक, इस साल जनवरी से मार्च तक भारत की जीडीपी ग्रोथ रेट पिछले पांच साल में सबसे कम 5.8 फीसदी रही। वहीं केंद्र सरकार की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग और कृषि के क्षेत्र में गिरावट के चलते आर्थिक विकास दर में गिरावट आई है।

देश में मंदी की वजह से अब तक लाखों नौकरिया जा चुकी हैं। रोजगार देने में मोदी सरकार बुरी तरह से फेल हुई है। Centre for Monitoring Indian Economy के ताजा आंकड़ों से के अनुसार, भारत की बेरोजगारी दर फरवरी 2019 में बढ़कर 7.7  प्रतिशत तक पहुंच गई। यह सितंबर 2016 के बाद की उच्‍चतम दर है, फरवरी 2018 में बेरोजगारी दर 5.9 प्रतिशत रही थी।


उधर, मंदी का असर हर सेक्टर पर पड़ा है। मंदी से खास तौर पर ऑटो सेक्टर बेहद प्रभावित हुआ है। आलम यह है कि अशोक लेलैंड और मारुति सुजुकी जैसी कैंपनियां अपने प्लांट में काम बंद करने को मजबूर हैं।

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