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अख़लाक़ हत्याकाण्ड – 3 साल बाद भी आरोपिओं को नहीं मिली है सज़ा

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3 साल पहले 28  सितम्बर 2015 को  भीड़ ने एक 50 साल के व्यक्ति को गाय का माँस रखने की अफवाह में घर से घसीटकर बाहर निकाला और पीट पीट कर उसकी हत्या कर दी । अख़लाक़ के परिवार का कहना वो इस सदमें से अभी तक नहीं उभर पायें हैँ।

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दादरी के बिसहड़ा गाँव में जहां अखलाक़ का परिवार रहता था उस घर में अब संन्नाटा पहरा हुआ है, घर में 3 दरवाजें है और तीनों दरवाज़े पर तालें लटके हुए है। अखलाक का परिवार उस राजपूत के गावँ में अकेला मुस्लिम परिवार था। 3 साल पहले 28  सितम्बर 2015 को अखलाक के परिवार के साथ जो घटित हुआ उसे वो भुला नहीं सकते।

तीन साल पहले अखलाक की हत्या भीड़ द्वारा कर दी  गई थी। दरअसल भीड़ को ऐसी अफवाह थी की अखलाक ने गाय का माँस रखा है और इस शक में भीड़ ने उसको घर से घसीटकर कर बाहर निकालकर उसकी पीट पीट कर हत्या कर दी। अख़लाक़ का परिवार कहता है की वो यहाँ दुबारा लौट के नहीं आएंगे, वो इस सदमे से अभी तक नहीं उभर पायें है।

अखलाक का मामला अभी फास्टट्रैक कोर्ट में है। यह मामला दर्ज होने के बाद अब तक 45  सुनवाइयाँ हो चुकी है परन्तु अभी तक ट्रायल शुरू नहीं हो सका है क्यूंकि नगर अदालत अभी भी आरोपिओं पर लगी धाराओं पर बहस कर रही है। अख़लाक़ के परिवार के वकील युसूफ सैफी की माने तो उनके अनुसार, पुलिस ने सभी आरोपिओं को हत्या, दंगा करने और गैरकानूनी ढंग से जमा होने की धराओं में गिरफ्तार किया है।


इस मामले में जितने भी आरोपी शामिल थे उनको जमानत मिल चुकी है। एक आरोपी रवीन सिसोदिया जिसे जेल से अस्पताल में भर्ती करवाया गया था बाद में उसकी मौत हो गई। इस मामले में अखलाक के छोटे भाई मोहम्मद जान जिनकी उम्र 50 है उनका कहना है कि,  “केस अभी तक शुरू भी नहीं हुआ है, ख़त्म होने का सवाल ही कहाँ उठता है…. आरोपियों के खिलाफ आरोप भी अभी तक तय नहीं हुए है जबकि यह फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट है। तीन साल पहले पुलिस द्वारा दायर की गई चार्जशीट में भी उन्‍हीं के नाम हैं जो अखलाक की बहन शाइस्‍ता ने दिए थे। इसके अलावा और लोगों (संदिग्‍धों) की पहचान और उन्‍हें गिरफ्तार करने के लिए कुछ नहीं किया गया।”

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