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रेलवे राज्य मंत्री राजेन गोहेन: पिछले 3 सालों में लगभग 50 हजार लोग रेलवे ट्रैक पर रेल दुर्घटना के कारण गवा चुकें है जान

Rajen-Gohain
(Image Credits: NortheastNow)

हाल ही में पंजाब के अमृतसर में दशहरे के दिन हुए रेल हादसे ने रेलवे प्रशासन और राज्य पर सवालिया निशान खड़ा कर दिया है। रेल दुर्घटना में लोगों का शिकार होना नई बात नहीं है। पिछले 3 सालों में लगभग 50 हजार लोग रेलवे ट्रैक पर रेल दुर्घटना के शिकार हो चूंकें हैं। इस बात की पुष्टि रेलवे राज्य मंत्री राजेन गोहेन द्वारा लोकसभा में की गई।

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उन्होंने कहा कि 2015-2017 के बीच 49,790 लोगों की मौत की सूचना दी गई हैं। राजेन गोहेन ने कहा कि, रेलवे पटरियों पर मौतें, रेलवे पटरियों को पार करते समय मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक गैजेट का उपयोग करना, पुलों के न प्रयोग करना, सुरक्षा और चेतावनी निर्देशों का उल्लंघन करने से होती है।

मंत्री ने कहा कि रेलवे ने सुधारात्मक उपाय के कदम उठाये हैं, जैसे रेलवे द्वारा पैदल यात्रिओं को पुलों (एफओबी) फुट ओवर ब्रिज का उपयोग करने के लिए पैसेंजर एड्रेस सिस्टम के माध्यम से नियमित घोषणाएं देना। सीमा दीवारों का निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ जागरूकता अभियान आयोजित करना, रेल की पटरियों पर होने वाले आकस्मिक मौतें को रोकने के लिए चेतावनी संकेत बनाना शामिल हैं।

मंत्री का कहना है कि रेलवे परिसर में अनधिकृत रूप से लोगों द्वारा अतिक्रमण करना, ट्रैक सहित। ऐसा करना रेलवे की धारा 1989 रेलवे अधिनियम 147 के तहत एक दंडनीय अपराध है। और कहा की वर्ष 2017 में कुल 173112 लोगों पर रेलवे परिसर पर अनधिकृत रूप से अतिक्रमण करने के कारण लोगों पर मुकदमा चलाया गया था।

रेलवे से हुई दुर्घटना में गोहेन ने कहा कि उत्तरी रेलवे प्रथम स्थान पर हैं, रेलवे से हुई दुर्घटना में उत्तरी रेलवे में 7908, इसके बाद दक्षिणी रेलवे में 6149 और पूर्वी रेलवे में 5670 मौतें हुईं हैं।


रेलवे से होने वाली दुर्घटना में जहाँ एक तरफ रेल प्रशासन और राज्य की जिम्मेदारियाँ तो होती है। परन्तु इसके साथ साथ लोगों को भी अपनी सुरक्षा का ध्यान खुद से रखना चाहिए। उनके लिए यह जरूरी है की वह ट्रैक पर यात्रिओं के लिए बनाये गए नियमों का पालन करें जिससे ट्रैक पर होने वाले ज्यादा से ज्यादा रेल दुर्घटनाओं को रोका जा सकता हैं।

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