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जातिवाद को लेकर मोदी को चिट्टी लिखना जज को पड़ा भारी, विदाई समारोह किया गया रद्द

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जजों की नियुक्ति में मनमानी के खिलाफ प्रधानमंत्री मोदी को खत लिखने वाले इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रंगनाथ पांडेय को वह पत्र लिखना बहुत भारी पड़ गया। मीडिया में चारो तरफ जस्टिस रंगनाथ पांडेय के पत्र के चर्चो के कारण कही मोदी सरकार को इसकी जवाबदेही न देनी पड़े उससे मोदी सरकार डरी हुई है। जस्टिस रंगनाथ पांडेय को यह अहसास दिलवाया जा रहा है की प्रधामंत्री मोदी तक अपनी बात पहुंचना उनको कितना भारी पड़ेगा उसके लिए उनका विदाई समारोह तक  रद्द कर दिया गया।

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रिटायरमेंट वाले दिन हर जज को एक फेयरवेल पार्टी दी जाती है. यह पारंपरिक तौर पर किया जाता है. गुरुवार को यह समारोह इलाहाबाद हाईकोर्ट के द्वारा जस्टिस रंगनाथ पांडेय के लिए भी किया जाना चाहिए थे वह वह एक बहुत ही वरिष्ट जज रहे है । पत्र की खबर  सामने आते ही जस्टिस रंगनाथ पांडेय के  पारंपरिक तौर पर किये जाने वाले विदाई समारोह को बिना किसी कारणवश रद्द कर दिया गया।

आपको बता दे की इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस रंगनाथ पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खत लिखकर जजों की नियुक्तियों पर गंभीर सवाल खड़े किए थे. जस्टिस रंगनाथ पांडेय ने लिखा था कि जजों की नियुक्ति में कोई निश्चित मापदंड नहीं है और प्रचलित कसौटी सिर्फ परिवारवाद और जातिवाद है। जस्टिस रंगनाथ पांडेय ने लिखा था कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों का चयन बंद कमरों में चाय की दावत पर किया जाता है, जिसका मुख्य आधार जजों की पैरवी और उनका पसंदीदा होना ही है. जस्टिस पांडेय ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में न्यायपालिका की गरिमा फिर से बहाल करने की मांग की है।


जस्टिस रंगनाथ पांडेय ने लिखा था कि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के जजों का चयन बंद कमरों में चाय की दावत पर किया जाता है, जिसका मुख्य आधार जजों की पैरवी और उनका पसंदीदा होना ही है. जस्टिस पांडेय ने पीएम मोदी को लिखे पत्र में न्यायपालिका की गरिमा फिर से बहाल करने की मांग की है.

जस्टिस पांडेय ने अपने पत्र में लिखा कि 34 साल के सेवाकाल के दौरान वह उच्च न्यायालय और सर्वोच्च न्यायालय के कई न्यायाधीशों से मिले हैं, जिनके पास सामान्य विधिक ज्ञान और अध्ययन तक उपलब्ध नहीं था। जस्टिस पांडेय के अनुसार, कोलेजियम समिति के सदस्यों का पसंदीदा होने की योग्यता के आधार पर न्यायाधीश नियुक्त कर दिए जाते हैं।


जस्टिस रंगनाथ पांडेय ने लिखा था कि, ‘महोदय क्योंकि मैं स्वयं बेहद साधारण पृष्ठभूमि से अपने परिश्रम और निष्ठा के आधार पर प्रतियोगी परीक्षा में चयनित होकर न्यायाधीश और अब उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त हुआ हूं. अतः आपसे अनुरोध करता हूं कि उपरोक्त विषय को विचार करते हुए आवश्यकता अनुसार न्याय संगत तथा कठोर निर्णल लेकर न्यायपालिका की गरिमा पुनर्स्थापित करने का प्रयास करेंगे. जिससे किसी दिन हम यह सुनकर संतुष्ट होंगे कि एक साधारण पृष्ठभूमि से आया हुआ व्यक्ति अपनी योग्यता परिश्रम और निष्ठा के कारण भारत का मुख्य न्यायाधीश बन पाया.’।

इस पत्र के बाद जस्टिस रंगनाथ पांडेय ने यह सोचा था की मोदी सरकार इस मुद्दे पर करवाई करेगी पर इसके विपरीत अभी मुश्किलों का सामना जस्टिस रंगनाथ पांडेय को ही करना पड़ेगा। 

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