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रामलला के वकील ने कोर्ट में पेश किए यह सबूत, नमाज़ पढ़ने को लेकर बोल दी बड़ी बात

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अयोध्या जमीन मामले पर सुप्रीम कोर्ट में रोजाना सुनवाई जारी है। आज सुनवाई का सांतवा दिन है।  चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संवैधानिक पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।  छह अगस्त को इस मसले पर रोजाना सुनवाई शुरू हुई थी, जिसके तहत हफ्ते में पांच दिन ये मामला सुना जा रहा है। 

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आज जब सुनवाई शुरू हुई तो रामलला विराजमान के वकील सीएस. वैद्यनाथन ने कोर्ट में नक्शा और रिपोर्ट दिखाकर कहा कि जन्मभूमि पर खुदाई के दौरान स्तम्भ पर शिव तांडव, हनुमान और देवी देवताओं की मूर्तियां मिली थीं। इसके अलावा पक्का निर्माण में जहां तीन गुम्बद थे, वहां बाल रूप में भगवान राम की मूर्ति थी। 

उन्होंने आगे कहा कि अप्रैल 1950 में विवादित क्षेत्र का निरीक्षण हुआ तो मंदिर होने के कई पक्के साक्ष्य मिले,  जिसमें नक्शे, मूर्तियां, रास्ते और इमारतें शामिल हैं।  परिक्रमा मार्ग पर पक्का और कच्चा रास्ता बना था, आसपास साधुओं की कुटियाएं थी।  रामलला के वकील ने कहा कि पुरातत्व विभाग की जनवरी 1990 की जांच और रिपोर्ट में भी कई तस्वीरें और उनका साक्ष्य दर्ज हैं। 

उन्होंने तर्क दिया कि मस्जिद में मानवीय या जीव जंतुओं की मूर्तियां नहीं हो सकती हैं, अगर हैं तो वह मस्जिद नहीं हो सकती है। रामलला के वकील ने कहा कि इस्लाम में नमाज़ व प्रार्थना तो कहीं भी हो सकती है।  मस्जिदें तो सामूहिक साप्ताहिक और दैनिक प्रार्थना के लिए ही होती हैं। सुन्नी वक्फ बोर्ड के वकील राजीव धवन ने आपत्ति जताते हुए धवन ने कहा कि कहीं पर भी नमाज़ अदा करने की बात गलत है, यह इस्लाम की सही व्याख्या नहीं है। 

रामलाल के वकील ने कहा कि जन्मस्थल पर नमाज इसलिए पढ़ी जाती रही जिससे उन्हें इस पर कब्जा मिल जाए।  इस नमाज़ में विश्‍वास का पूर्ण अभाव था। उन्होंने आगे कहा की  गलियों और सड़कों पर भी तो नमाज होती है, इसका मतलब यह नहीं कि सड़क आपकी हो गई।


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