fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
देश

हिन्दू पक्ष के पास जमीन का मालिकाना हक़ नहीं, मस्जिद में रात को रखी थी मूर्तियाँ

ayodhya-case-question-from-the-muslim-side-can-ramlala-virajman-say-that-he-owns-the-land-

राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले में सुप्रीम कोर्ट की और से सुनवाई लगातार जारी है। दोनों पक्षों की सुनवाई कोर्ट में सुनी जा रही है वही इस मामले पर बुधवार को मुस्लिम पक्ष ने अपनी दलीले कोर्ट के सामने रखी उन्होंने कहा कि 22 दिसंबर 1949 को जो गलती हुई, उस गलती को लगातार जारी नहीं रखा जा सकता। आपको बता दे की 23  दिसंबर 1949 की सुबह यह बात पुरे अयोध्या में फैल रही थी कि भगवान राम प्रकट हो गए हैं। भगवान् राम बाल रूप में जन्मभूमि स्थान मंदिर के गर्भ-गृह में पधार चुके हैं।

Advertisement

भगवान् राम की बाल रूप वाली मूर्ति रातो रात स्थल पर प्रकट हो गई थी। प्राकट्य-स्थल के पास सैकड़ों लोगों की भीड़ इकट्ठा हो चुकी थी, जो दोपहर तक बढ़कर करीब 5000 तक पहुंच गई। अयोध्या के आसपास के गांवों में इसकी घोषणा कर दी गई थी। मंदिरों में शंख बजाए गए थे और श्रद्धालुओं की भीड़ बालरूप में प्रकट हुए भगवान के दर्शन के लिए टूट पड़ी थी। पुलिस और प्रशासन भौंचक्का था।

वही इसी मामले पर बुधवार को हुई सुनवाई में वकील धवन ने कहा कि 22 दिसंबर, 1949 की रात मस्जिद के गुंबद के नीचे मूर्ति रखी गई थी ना की वह प्रकट हुई थी । ऐसा करना गलत था। जनवरी 1950 में मजिस्ट्रेट द्वारा इस गलत चीज को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया जाता है। 1950 में मजिस्ट्रेट में अयोध्या स्थल में रखी गई मूर्ति को हटाने के आदेश नहीं दिए। वकील ने कहा की तो क्या इस गलती को जारी रखा जा सकता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या इस आधार पर कोई उस जगह पर अपना अधिकार का दावा कैसे कर सकता है। दूसरे पक्ष को यह साबित करना होगा कि 22 दिसंबर की रात से पहले क्या हुआ था।

साथ ही मुस्लिम पक्ष ने यह भी कहा कि क्या रामलला विराजमान कह सकते हैं कि उस जमीन पर मालिकाना हक उनका है? सुनवाई के 21वें दिन मुस्लिम पक्षकारों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राजीव धवन ने चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ के समक्ष कहा कि पीठ को महज दो बिन्दुओं पर विचार करना है। पहला, विवादित स्थल पर मालिकाना हक किसका है और दूसरा, क्या गलत परंपरा को जारी रखा जा सकता है?

साथ ही धवन ने निर्मोही अखाड़े के बात का विरोध करते हुए कहा कि सेवादार के अलावा अन्य चीजों पर उनका दावा नहीं बनता, क्योंकि वे मालिक नहीं हैं। वे सिर्फ सेवादार है और सेवादार और ट्रस्टी में फर्क होता है। बुधवार को अयोध्या मामले की सुनवाई महज डेढ़ घंटे चली। अभी इस मामले में सुनवाई ज़ारी है।


आपको बता दे की यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट ने हलफनामा दाखिल कर कहा कि अयोध्या भूमि मामले का ट्रायल चला रहे विशेष जज एसके यादव के कार्यकाल को बढ़ा दिया गया है। साथ ही उन्हें अन्य सुविधाएं भी प्रदान करने का निर्णय लिया गया है। सरकार ने बताया कि इसके लिए जरूरी आदेश पारित कर दिया गया है। 

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved