fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
देश

फैसले से पहले रिटायर हुए CJI तो इस तरह से आएगा फैसला, सविधान में है यह अहम प्रावधान

ayodhya-ram-janmabhoomi-case-judgement-supreme-court-chief-justice-ranjan-gogoi-retirement-constitution-provision-news

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर से पहले पूरी करने के लिए सभी पक्षों को कहा है। चीफ जस्टिस गोगोई ने कहा कि अगर मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर तक पूरी नहीं हुई, तो इस पर फैसला देने का चांस खत्म हो जाएगा। दरअसल, चीफ जस्टिस रंजन गोगोई के नेतृत्व वाली पांच न्यायमूर्तियों की संविधान पीठ मामले की सुनवाई कर रही है और चीफ जस्टिस गोगोई 17 नवंबर को रिटायर हो रहे हैं।  

Advertisement

कार्यकाल खत्म होने के बाद रंजन गोगोई न तो मामले की सुनवाई कर पाएंगे और न ही फैसला सुना पाएंगे इसलिए वो चाहते हैं कि मामले पर फैसला उनके रिटायर होने से पहले ही हो जाए। 20 सालो से भी अधिक समय से चला आ रहा यह मामला अभी तक सुप्रीम कोर्ट में अटका पड़ा है। अब यहां सवाल यह उठ रहा है कि अगर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई और लंबी खिंचती है, तो मामले पर फैसला कौन सुनाएगा? क्या इस मामले की सुनवाई करने और फैसला सुनाने के लिए रंजन गोगोई का कार्यकाल बढ़ाया जा सकता है?

इस पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के उपाध्यक्ष जितेंद्र मोहन शर्मा और सीनियर एडवोकेट उपेंद्र मिश्रा का कहना है कि अभी तक सुप्रीम कोर्ट के किसी भी न्यायमूर्ति का कार्यकाल नहीं बढ़ाया गया है। हालांकि संविधान के अनुच्छेद 128 में प्रावधान किया गया है कि राष्ट्रपति की सहमति से रिटायर न्यायमूर्ति को किसी मामले की सुनवाई करने का अधिकार दिया जा सकता है, लेकिन ऐसे न्यायमूर्ति को सुप्रीम कोर्ट के दूसरे न्यायमूर्तियों की तरह अन्य मामलों की सुनवाई करने का अधिकार नहीं होगा।

इसका मतलब यह हुआ कि अगर राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई लंबी चलती है, तो राष्ट्रपति की सहमति से चीफ जस्टिस रंजन गोगोई आगे भी मामले की सुनवाई कर सकते हैं। संविधान में इसका प्रावधान किया गया है।  हालांकि रंजन गोगोई को सुप्रीम कोर्ट के किसी दूसरे न्यायमूर्ति या चीफ जस्टिस की तरह अधिकार नहीं होंगे।  वो सिर्फ राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की ही सुनवाई कर पाएंगे और फैसला सुना पाएंगे।

अभी तक यह परंपरा रही है कि सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्तियों की जो बेंच मामले की सुनवाई करती है, वही उस पर फैसला सुनाती है। अगर उस बेंच के न्यायमूर्ति रिटायर हो जाते हैं, तो उस मामले की सुनवाई के लिए नई बेंच का गठन किया जाता है। इसके बाद नई बेंच उस मामले की नए सिरे से सुनवाई करती है।


अगर 18 अक्टूबर तक इस मामले में फैसला नहीं आया तो दोबारा नई बेंच इस मामले पर सुनवाई नए सिरे से शुरू करेगी और यह केस और लम्बा चलता रहेगा इसके कारन ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने पक्षकारों को मामले की सुनवाई 18 अक्टूबर से पहले पूरी करने का निर्देश दिया है। राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई करने वाली संविधान पीठ की अध्यक्षता चीफ जस्टिस रंजन गोगोई कर रहे हैं।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved