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BJP ने फिर आरक्षण पर चलाई कैंची, ब्यूरोक्रेसी में इस तरह ख़तम किया आरक्षण

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(image credits: DNA India)

केंद्र सरकार नौकरशाही यानी ब्यूरोक्रेसी को बेहतर बनाने की तमाम कोशिशें कर रही हैं और इस दिशा में सरकार ने एक नया प्लान अपनाया है। यह नई भर्ती प्रक्रिया लीक से एकदम हटकर है। ब्यूरोक्रेसी में बेहतर टैलेंट को शामिल करने के लिए केंद्र सरकार द्वारा सिविल सर्विस से बाहर प्राइवेट सेक्टर से एंट्री लेवल की नियुक्तियों का प्रावधान किया। यानी अब प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर में काम करने वाले टैलेंटेड लोगों को ब्यूरोक्रेसी में मौका देकर बेहतर रिजल्ट पाने की आशा जताई जा रही है।

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लेकिन अधिकारियों के चयन की जो प्रकिया अपनाई गई, उसने सामाजिक तौर पर पिछड़े वर्गो की ब्यूरोक्रेसी में भागीदारी को लेकर चिंताजनक हालात पैदा कर दिए हैं। ब्यूरोक्रेसी में पहले से ही अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़े वर्ग की भागीदारी कम है। वहीं Department of Personnel & Training
जिस प्रकिया से प्राइवेट और पब्लिक सेक्टर से ज्वाइंट सेक्रेटरी के लेवल पर अधिकारियों की भर्ती कर रही है, उसमें आरक्षण की व्यवस्था है ही नही।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक इस संबंध डाले गए एक आरटीआई के जवाब में डिपार्टमेंट ऑफ पर्सनल एंड ट्रेनिंग ने कहा है कि एक पोस्ट के लिए रिजर्वेशन तय नहीं किया जा सकता है। इस स्कीम में भरा जाने वाला हर पोस्ट एक सिंगल पोस्ट है, इसलिए इस पर रिजर्वेशन लागू नहीं होता है। इनका सेलेक्शन अलग-अलग डिपार्टमेंट्स के लिए हो रहा है। अगर सेलेक्शन एक ग्रुप मानकर किया जाए तो 9 पदों के लिए होने वाले सेलेक्शन में 2 ओबीसी और 1-1 अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के उम्मीदवार शामिल किए जा सकते हैं।

एक तरफ जहा आज के समय में अब अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ी जातियां अपने अधिकार को लेकर जागरूक हुए है और आरक्षण ने इन जातियों को सशक्त किया है, देश निर्माण में इनकी भूमिका और भागीदारी बढ़ी है। लेकिन सत्ता के केंद्र के इर्द-गिर्द और नीति निर्माण में अहम भूमिका निभाने वाले हाईअर ब्यूरोक्रेसी में उनकी भागीदारी हमेशा से कम रही है। 2018 में एक आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक 81 सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों में सिर्फ 2 एससी और 3 एसटी समुदाय से थे।

ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों में एससी-एसटी समुदाय की भागीदारी 9 परसेंट थी। वहीं ओबीसी की भागीदारी और भी कम रही। सेक्रेटरी और एडिशनल सेक्रेटरी लेवल का एक भी अधिकारी ओबीसी का नहीं था । ज्वाइंट सेक्रेटरी लेवल पर 13 ओबीसी अधिकारी थे. हाईअर ब्यूरोक्रेसी में इनकी भागीदारी सिर्फ 3 फीसदी थी। 2017 में भी 85 सेक्रेटरी लेवल के अधिकारियों में से सिर्फ 2 एससी-एसटी समुदाय से थे। वही अब सरकार के द्वारा नई भर्ती प्रक्रिया में भी आरक्षण को ख़त्म कर दिया गया है जिसके कारण ब्यूरोक्रेसी में अनुसूचित जाति-जनजाति और पिछड़ी जातियों के अधिकार को एक बार फिर ख़तम करने का प्रयास किया गया है.


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