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महबूबा मुफ्ती की बेटी ने अमित शाह को चिट्ठी में ऐसा क्या लिखा, जो मच गया है बवाल

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जम्मू कश्मीर अभी पूरी तरह से केंद्र सरकार के नियंत्रण में है। लोग बेहाल है, परेशान है, पर उनकी सुनने वाला कोई नहीं है, ना ही फ़ोन का प्रयोग कर सकते है ना ही इंटरनेट का, सभी सेवाएं अनिश्चितकाल के लिए थप पड़ी है। कश्मीर में रहने वाले परिवार इसलिए भी दुखी है क्यूंकि वह कश्मीर से बहार रह रहे अपने बच्चो या परिवारवालों से बात तक नहीं कर पा रहे। भले ही सरकार इस फैसले को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है पर कश्मीर के निवासियों का हाल वो ही बयान कर सकते है। कई इलाको में पत्रकारों तक को जाने की इज़ाज़त नहीं है वहा का हाल कौन बताएगा किसी को कुछ खबर नहीं। 

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विशेष राज्य के दर्ज़े वाले प्रावधान हटाने के साथ ही राज्य में धारा 144 लागू है और अधिकतर बड़े नेता नजरबंद या हिरासत में हैं। जम्मू कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री और पीडीपी पार्टी की चीफ महबूबा मुफ्ती भी इन दिनों पुलिस की हिरासत में हैं। इतना ही नहीं महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा जावेद भी अपने घर में नजरबंद है। अब खबर आयी है कि इल्तिजा जावेद ने केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह को एक चिट्ठी लिखी है।

एनडीटीवी की एक खबर के अनुसार, इस चिट्ठी में इल्तिजा ने यह चिट्ठी 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस को लिखी थी उन्होने लिखा कि ‘आज जब पूरा देश आजादी मना रहा है, तब कश्मीरियों को जानवरों की तरह पिजरों में बंद कर दिया गया है और उन्हें मूलभूत मानवाधिकारों से भी वंचित रखा जा रहा है।’ इल्तिजा के अनुसार, ‘उन्हें धमकाया जा रहा है कि यदि वह फिर से बोलीं तो उन्हें इसके गंभीर अंजाम भुगतने होंगे।’

हालाँकि जो इलज़ाम मेहबूबा मुफ़्ती के बेटी ने भारतीय जनता पार्टी और अमित शाह पर लगाए है वह काफी गंभीर है सविधान के अनुसार आप किसी भी व्यक्ति को उसके मूलभूत अधिकारों से वंचित नहीं रख सकते। इल्तिजा ने अपनी चिट्ठी में सीधे तरह से अमित शाह को इसका ज़िम्मेदार ठहराया है। कश्मीर से विशेष राज्य का दर्ज़ा हटने का बाद वहा भारत का सविधान लागू है और उसी सविधान के अनुच्छेद 19 से लेकर 22 तक व्यक्ति के स्वतंत्रता के अधिकार का उल्लेख किया गया है जिसका हनन भारतीय जनता पार्टी कर रही है। 

चिट्ठी में इल्तिजा ने लिखा कि ‘दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में क्या एक नागरिक को बोलने का अधिकार नहीं है? यह दुखद है कि मेरे साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है कि जैसे मैं कोई युद्ध की कैदी हूं।’ खबर के अनुसार, महबूबा मुफ्ती की बेटी ने अपनी चिट्ठी के साथ एक ऑडियो संदेश भी अमित शाह को भेजा है।
बता दें कि सरकार ने बीते दिनों जम्मू कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले आर्टिकल के प्रावधान को हटा दिया था और जम्मू कश्मीर को दो हिस्सों में बांट दिया था। इस बंटवारे के बाद जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग-अलग कर दोनों को केन्द्र शासित प्रदेश बना दिया गया। इस फैसले को लागू करने से पहले सरकार ने राज्य में बड़े स्तर पर सुरक्षाबलों को तैनात किया और धारा 144 लागू कर दी।


इसके साथ ही फैसले के विरोध में किसी भी तरह की समस्या को रोकने के लिए सरकार ने राज्य के अधिकतर बड़े नेताओं को या तो नजरबंद कर दिया या फिर उन्हें हिरासत में ले लिया। महबूबा मुफ्ती और नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला भी इन दिनों हिरासत में हैं। हाल ही में युवा नेता शाह फैसल को भी हिरासत में ले लिया गया था। इसके साथ ही राज्य में टेलीफोन सेवाएं और इंटरनेट बंद है। राज्य के अधिकारी सैटेलाइट फोन की मदद से एक-दूसरे से संपर्क कर रहे हैं।

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