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BJP में शामिल होते ही कल्याण सिंह पड़े मुसीबत में, CBI ने लिया बड़ा एक्शन

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बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में कल्याण सिंह को बतौर आरोपी फिर से कोर्ट में पेश करने के लिए सीबीआई ने अदालत में अर्जी दाखिल की है।  हालांकि इस मामले में कल्याण सिंह को अब तक अनुच्छेद 351 के तहत संवैधानिक पद पर होने के चलते कानूनी कार्रवाई से छूट मिली थी। राजस्थान के राज्यपाल के पद से हटते और बीजेपी की सदस्यता ग्रहण करते ही उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की मुसीबत बढ़ने लगी है।

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सुप्रीम कोर्ट में सीबीआई की याचिका पर कोर्ट ने 19 अप्रैल 2017 को आदेश दिया था, जिसमें कल्याण सिंह के अलावा इस केस में पूर्व डिप्टी पीएम लाल कृष्ण आडवाणी, बीजेपी के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी, पूर्व सीएम उमा भारती समेत कई बड़े नेताओ को दोषी माना था।

इन सारे नेताओं के खिलाफ अयोध्या में बाबरी विध्वंस के लिए आपराधिक षडयंत्र करने का आरोप है, जो धारा 120 (बी) के तहत चल रहा है। अब सीबीआई के अपील स्वीकार करने के बाद कल्याण सिंह को एक बार फिर कानूनी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।

बता दें कि 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में बाबरी मस्जिद के विध्वंस के समय कल्याण सिंह यूपी के मुख्यमंत्री थे। आरोप है कि यूपी के सीएम रहते कल्याण सिंह ने राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में कहा था कि वह अयोध्या में विवादित ढांचे को कोई नुकसान नहीं होने देंगे, लेकिन कार सेवा आयोजित होने के दौरान अयोध्या में मस्जिद को गिरा दिया गया था।  इसके बाद सीएम कल्याण सिंह ने मामले की जिम्मेदारी लेते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

उच्चतम न्यायालय ने सीबीआई से कल्याण सिंह को राजस्थान के राज्यपाल पद से हटने के तुरंत बाद आरोपी के तौर पर पेश करने के लिए कहा था। संविधान के अनुच्छेद 361 के तहत राष्ट्रपति और राज्यपालों को उनके कार्यकाल के दौरान आपराधिक तथा दीवानी मामलों से छूट प्रदान की गई है। इसके अनुसार, कोई भी अदालत किसी भी मामले में राष्ट्रपति या राज्यपाल को समन जारी नहीं कर सकती।


कल्याण सिंह का बतौर राज्यपाल का कार्यकाल ख़त्म हो गया है इसलिए अब उन्हें इस मामले में दोषी करार दिया जा सकता है। अयोध्या मामले को लेकर कल्याण सिंह समेत बीजेपी नेताओं की मुसीबत बढ़ती दिख रही है।  ऐसे में बाबरी विध्वंस के आरोपियों पर सेक्शन 120-बी के तहते मामला चल रहा है।  इस मामले में दोषी पाए जाने पर अधिकतम तीन साल तक की सजा का प्रावधान है। 

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