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चुनाव आयोग के फैसले से मुसीबत में पड़े कर्नाटक के मुख्यमंत्री, बोले- यह हमारे साथ नाइंसाफी

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हाल ही में चुनाव आयोग की वजह से भाजपा को समर्थन देने वाले बागी विधायकों पर आयोग ने बड़ा एक्शन लिया है जिसके कारण राजनीती गरमा गई है। चुनाव आयोग की तरफ से कर्नाटक में 15 सीटों पर उपचुनाव की घोषणा के बाद कर्नाटक की राजनीति में उथल पुथल मच गई है। चुनाव आयोग की इस घोषणा से भाजपा को समर्थन देने वाले कांग्रेस और जनता दल सेक्यूलर के बागी विधायकों को बड़ा झटका लगा है।

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तत्कालीन विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार ने इन बागी विधायकों को दलबदल विरोधी कानून के तहत विधानसभा के कार्यकाल 2023 तक के लिए अयोग्य घोषित कर दिया था।  इसका मतलब है कि यह विधायक अब विधानसभा उपचुनाव नहीं लड़ सकेंगे। राज्य के बागी विधायकों की अयोग्यता की मांग करते हुए कांग्रेस और जेडीएस ने कुल 17 याचिकाएं दायर की थी। स्पीकर रमेश कुमार बताया था कि संविधान की 10वीं अनुसूची में आने वाले दल बदल कानून के तहत ये कार्रवाई की गई है।  विधानसभा के भंग होने की सूरत में भी उन्हें सुप्रीम कोर्ट के फैसला आने तक इंतजार करना होगा।

कर्नाटक में उपचुनाव की घोषणा हो गई है। निर्वाचन आयोग ने यहां 21 अक्टूबर को चुनाव कराए जाने का ऐलान किया है। इससे कांग्रेस और जनता दल सेक्युलर के अयोग्य घोषित किए गए बागी विधायकों को सबसे बड़ा झटका लगा है। उपचुनाव की तारीखों की घोषणा के बाद चिकबल्लारपुर से कांग्रेस के बागी विधायक के. सुधाकर ने कहा कि हमारी याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है। हमारे वकील इस उप चुनाव पर रोक लगाने के लिए अदालत की तरफ से हस्तक्षेप की मांग करेंगे। उपचुनाव की घोषणा के तुरंत बाद उन्होंने कहा कि इन सीटों पर चुनाव होना हमारे साथ अन्याय होगा।

इस संबंध में कर्नाटक राज्य चुनाव आयुक्त संजीव कुमार ने भी शनिवार को यह स्पष्ट कर दिया कि कांग्रेस और जनता दल सेक्यूलर से इस्तीफा देने वाले विधायकों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं मिलेगी। इसके बाद से इन विधायकों का राजनीतिक भविष्य खतरे में पड़ गया है।

विधानसभा स्पीकर रमेश कुमार ने कहा कि राज्य में 17 में से 15 सीटों पर उपचुनाव 21 अक्तूबर को होगा। बाकी दो सीटों पर उपचुनाव बाद में आयोजित कराए जाएंगे। वहीं, 17 विधायकों के अयोग्य करार दिए जाने के बाद से येदियुरप्पा को अपनी सरकार बचाए रखने के लिए 6 विधायकों की जरूरत होगी। राज्य में कांग्रेस और जेडीएस के बीच गठबंधन खत्म हो गया है। ऐसे में दोनों दल अलग-अलग मिलकर उपचुनाव लड़ेंगे। चुनाव की घोषणा के बाद मुख्यमंत्री येदियुरप्पा ने बागी विधायकों से मुलाकात कर मौजूदा स्थिति पर चर्चा की।


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