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भीमा कोरेगांव की 201वीं वर्षगांठ पर आठ से दस लाख लोगो ने दी शहीदों को श्रद्धांजलि

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Image Credits: The Week

भीमा कोरेगांव की 201वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में ‘जय स्तम्भ’ पर लाखो की संख्या में लोग एकत्रित हुए। महाराष्ट्र के पुणे जिले में भारी पुलिस बल की मौजूदगी में ‘जय स्तम्भ’ पर एकत्र हुए और सभी शहीद सैनिको को श्रद्धांजलि दी।

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भीमा कोरेगांव की लड़ाई को 2019 में 201 वर्ष हो चुके है। कोरेगांव भीमा लड़ाई 1818 में हुई थी। बीते वर्ष इस लड़ाई की वर्षगांठ के अवसर पर एक जनवरी को जातीय संघर्ष में एक व्यक्ति की मौत हो गई थे और कई लोग भी घायल हो गए थे।

इस वर्ष 201 वर्षगांठ पर पुलिस के सुरक्षा बल की तैनाती पिछले साल की तुलना में अधिक कर दी थी। पुलिस ने बीते वर्ष हुए विवाद को देखते हुए यह कदम उठाया है। पुलिस ने बताया कि कम से कम पांच हजार पुलिसकर्मी, 1,200 होमगार्ड, राज्य रिजर्व पुलिस बल की 12 कंपनियां और 2,000 दलित स्वयंसेवी पेरने गांव के आसपास तैनात हैं जहां लोग स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

आपको बता दे की एक जनवरी को 1818 को हुई लड़ाई में शहीद हुए सैनिको की याद में ब्रितानिया हुकूमत ने ‘जय स्तम्भ’ खड़ा किया था। एक जनवरी को ‘जय स्तम्भ’ पर हज़ारो लाखो की संख्या में बहुजन समाज के लोग एकत्रित होकर उन सभी शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित करते है।

महाराष्ट्र पुलिस ‘जय स्तम्भ’ की सुरक्षा को लेकर कोई ढिलाई नहीं करना चाह रही थी। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आज सुबह बताया कि बड़े पैमाने पर पुलिसकर्मियों की तैनाती के साथ ही 500 सीसीटीवी कैमरे, 11 ड्रोन कैमरे और 40 वीडियो कैमरे क्षेत्र पर नजर रखे हुए हैं।


विशेष पुलिस महानिरीक्षक विश्वास नांगरे पाटिल ने कहा, ‘पेरने गांव और इसके आसपास इंटरनेट सेवाएं रोक दी गई हैं.’

बहुजन समाज के लोगो की 1818 लड़ाई में जातिवादी व्यवस्था पर जीत थी क्योंकि ब्रिटिश सेना में बड़ी संख्या में दलित महार सैनिक थे जिन्होंने पेशवाओं-मराठा शासन के ब्राह्मण संरक्षकों को हरा दिया था।

भीमा कोरेगांव की 201वीं वर्षगांठ पर सविधान निर्माता बाबा साहेब के पौत्र एवं भारिपा बहुजन महासंघ के नेता प्रकाश आंबेडकर आज सुबह पहले-पहल श्रद्धांजलि देने वाले नेताओं में शामिल थे।

शहीदों की स्मारक पर पुष्प अर्पित करने के बाद बाबा साहेब के पौत्र ने उम्मीद जतायी कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा। उन्होंने संवाददाताओं से कहा, ‘पिछले साल के विपरीत इस बार आसपास के गांवों के लोग कार्यक्रम के दौरान मदद उपलब्ध करा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न होगा. हालांकि पुलिस को जल्दबाजी में कोई कदम नहीं उठाना चाहिए.’

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