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पूर्व निर्वाचन अधिकारी ने कहा EVM और VVPAT को हैक करना काफी आसान

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चुनाव आयोग के अनुसार हमेशा से यह कहा जा रहा है की EVM में छेड़छाड़ नहीं की जा सकती। लोगो और विपक्षी पार्टी के विरोध के कारन चुनाव आयोग ने EVM के वोट को  VVPAT मशीन की पर्चियों के साथ मिलान करने के लिया बूथों पर यह मशीन रखी। आमतौर पर ये माना जाता है कि VVPAT यानी वोटर वैरिफायबल पेपर ऑडिट ट्रेल की पर्चियां EVM का लिटमस-टेस्ट हैं। इनके सहारे EVM की विश्वसनीयता साबित होती है। ऐसा इसलिए कि VVPAT सिस्टम से पता किया जा सकता है. कि हमने EVM पर जिसे वोट दिया, उसे ही वोट गया कि नहीं।

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वही अब इस मामले में चुनाव आयोग के दावों की सच्चाई सामने आ गई है। पूर्व आईएएस अधिकारी और चुनाव निर्वाचन अधिकारी रहे कन्नन गोपीनाथ ने मंगलवार को दावा किया कि VVPAT मशीन ने खुद ही EVM को छेड़छाड़ की चपेट में ले लिया। 2012 बैच के अधिकारी रहे गोपीनाथ ने हाल में अपने पद से जम्मू कश्मीर से विशेष दर्ज़ा हटाने के बाद वहा की हालत को देखते हुए लोगो की स्वतंत्रता, अभिव्यक्ति की आज़ादी और मूलभूत अधिकार जैसी वजहों के कारण इस्तीफा दे दिया था।

साल 2017 के गोवा विधानसभा चुनावों के बाद से सभी ईवीएम के साथ VVPAT मशीनों का इस्तेमाल किया गया है। कोर्ट के आदेशों के तहत चुनाव आयोग ने इस साल के शुरू में लोकसभा चुनाव के दौरान ईवीएम के साथ वीवीपीएटी का भी इस्तेमाल किया था। कई जगह पर यह बात सामने भी आई की EVM और VVPT के वोट मेल नहीं खा रहे है पर इन्हे भी नज़रअंदाज़ कर दिया गया। गोपीनाथ का दावा है कि VVPAT मशीनों में छेड़छाड़ की आशंका सबसे अधिक हो सकती है। EVM मशीन के साथ ही वोट को सत्यापित करने वाले मशीन में छेड़छाड़ करना काफी आसान है। हालाँकि अभी चुनाव आयोग ने अभी गोपीनाथ के आरोपों का जवाब नहीं दिया है।

आपको बता दे की आम चुनाव के दौरान दादर और नगर हवेली में गोपीनाथ निर्वाचन अधिकारी के तौर पर तैनात थे। 24 सितंबर को उन्होंने कई ट्वीट किए गोपीनाथन का कहना है कि VVPAT ने EVM की सुरक्षा को कम किया है। इसके डिफेंस सिस्टम में सेंधमारी की है और VVPAT की वजह से हैकिंग का जोखिम और अधिक पैदा हो गया है। कन्नन गोपीनाथ ने अपने ट्वीट में लिखा- “आपको EVM के लिए मेरा डिफेंस शायद याद होगा ,मैं अभी भी इसके साथ खड़ा हूं, मगर VVPAT के साथ मेरे पहले चुनावी अनुभव ने मेरा भरोसा छीन लिया है. VVPAT ने EVM की सुरक्षा में सेंधमारी की है। इसकी वजह से EVM से जुड़ी प्रक्रिया को हैक किए जाने का जोखिम है।

इस ट्वीट में उन्होंने पूर्व चीफ इलेक्शन कमिश्नर शहाबुद्दीन याकूब कुरैशी, मौजूदा कमिश्नर अशोक लवासा और इलेक्शन कमीशन के आधिकारिक ट्विटर पेज को टैग भी किया है. अभी तक इनमें से किसी ने भी कन्नन के इस ट्वीट पर कोई भी रिप्लाई नहीं किया है। कन्नन ने अपने एक अन्य ट्वीट में कहा कि पद पर रहते हुए उन्होंने दो बार इस पर सवाल उठाया था।  ये दो मौके थे, IIIDEM में रिटर्निंग अधिकारियों के साथ ECI ट्रेनिंग के दौरान और फिर ECIL के साथ कमिशनिंग के दौरान।  ऐसे में अब वो बिना किसी दुर्भावना के अपनी चिंता बयां कर रहे हैं। उनका कहना है कि VVPAT की व्यवस्था ने EVM की फुल-प्रूफ प्रक्रिया को कमज़ोर बना दिया है और इस पर तत्काल ध्यान दिए जाने की जरूरत है।


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