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केंद्र और योगी सरकार के खिलाफ हज़ारो किसानो ने खोला मोर्चा, रखी यह मांगे

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योगी सरकार से नाराज़ किसानो ने आज फिर योगी सरकार और केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। अपनी उपलब्धियों को गिनाने वाली योगी सरकार किसानो को लेकर बड़ी बड़ी ढींगे हांका करती है और दूसरी ओर किसान रोड पर धरना और रैली करने के लिए मजबूर है। किसानों-मजदूरों की समस्याओं को लेकर भारतीय किसान संगठन के नेतृत्व में हजारों किसानो ने आज नोएडा से दिल्ली की तरफ कूच कर दिया है।  हजारों की संख्या में ये किसान अपनी 15 सूत्रीय मांगों को लेकर मोदी सरकार के सामने रखने के लिए सहारनपुर से पैदल यात्रा करते हुए आ रहे हैं।

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नोएडा से दिल्ली की ओर कूच रहे किसान अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन करने की तैयारी में है।  हालांकि उसके पहले ही दिल्ली पुलिस और नोएडा पुलिस ने अपनी पूरी तैयारी शुरू कर रखी है ताकि वह किसानों को दिल्ली जाने से रोक सकें। दिल्ली मेरठ एक्सप्रेसवे पर केंद्र सरकार के इशारो पर दिल्ली पुलिस ने अपने जवानों को तैनात कर दिए हैं। सीआरपीएफ के जवानों को भी यहां लगाया गया है। फ्लाई ओवर के ऊपर और नीचे सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस के जवान पूरी मुस्तैदी के साथ तैनात कर दिए गए हैं।

इससे साफ जाहिर है कि दिल्ली पुलिस पूरी कोशिश करेगी दिल्ली की तरफ किसान ना बढ़ सके। ऐसे में दिल्ली पुलिस की तैयारी कहीं ना कहीं इशारा करती है कि किसानों के बीच माहौल तनावपूर्ण हो सकता है। पिछले साल किसानों और दिल्ली पुलिस के बीच टकराव हो चुका है। भारतीय किसान संगठन के उपाध्यक्ष राधे ठाकुर ने बताया कि सहारनपुर से दिल्ली के लिए निकली ‘किसान-मजदूर यात्रा’ में हजारों किसान शामिल हैं।  सहारनपुर से दिल्ली के किसान घाट तक पैदल यात्रा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में किसानों की हालत दयनीय है और किसान आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन सरकार हाथ पर हाथ रखे सो रही है।

समय से किसानों को गन्ना मूल्य का भुगतान नहीं हो रहा। योगी सरकार बिजली की दर बढ़ाकर किसान की कमर तोड़ रही है और कर्ज का बोझ किसानो पर  बढ़ता जा रहा है। योगी राज में किसानो को हालत बद से बद्तर होती जा रही है इसी के चलते देश के किसान को दिल्ली पैदल आने के लिए मजबूर होना पड़ा है। जब तक किसानों की मागों के बारे में सरकार कोई ठोस आश्वासन नहीं देती तब तक किसान दिल्ली छोड़ने वाले नहीं हैं। भले ही हमें जितने दिनों तक दिल्ली में पड़ाव करना पड़े।

आपको बता दे की किसान संगठनों की प्रमुख मांगें कुछ इस प्रकार है। भारत के सभी किसानों के कर्जे पूरी तरह माफ हों, किसानों को सिंचाई के लिए बिजली मुफ्त मिले।  किसान व मजदूरों की शिक्षा एवं स्वास्थ्य मुफ्त कराया जाए। किसान-मजदूरों को 60 वर्ष की आयु के बाद 5,000 रुपये महीना पेंशन मिले। फसलों के दाम किसान प्रतिनिधियों की मौजूदगी में तय किए जाएं। किसान के साथ-साथ परिवार को दुर्घटना बीमा योजना का लाभ मिले। किसानों का गन्ना मूल्य भुगतान ब्याज समेत जल्द किया जाए।  इन मांगो के साथ साथ और भी कई मांगे किसानो के सरकार के समक्ष रखी है।


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