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एमपी: नर्मदा में पुलिस द्वारा मूर्ति विसर्जन को मना करने पर जबलपुर पुलिस और भक्तों के बीच हुई लड़ाई,10 पुलिस कर्मी घायल, हिंसा के बाद 35 गिरफ्तार

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(Image Credits: Newsbuzzinfo)

मध्यप्रदेश के जबलपुर में मूर्ति को नर्मदा में विसर्जन से रोकने पर भक्तो और पुलिस के बीच हुई हिंसा। दरसल मंगलवार 23 अक्टूबर को जबलपुर के निकट ग्वारीघाट में काली माता के मूर्ति को नर्मदा में विसर्जन पर पुलिस द्वारा उन्हें रोका गया। ऐसा होने पर भक्तो ने पुलिस कर्मियों पर पथराव करना शुरू कर दिया। इस घटना में 10 पुलिस कर्मियों को चोट आई हैं।

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भीड़ ने हिंसा में पुलिस के सात मोटरसाइकलों को आग के हवाले कर दिया और उनके चार पहिया वाले वाहनों को नुकसान पहुँचाया। पुलिस ने भीड़ को एक जगह से हटाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज भी किया। पुलिस ने इस मामले 35 लोगों को हिरासत में ले लिया है।

पुलिस ने बताया की जबलपुर की महिला कलेक्टर छवि भारद्वाज ने भी लाठी चलाकर उपद्रवियों को हटाया। घटना स्थल पर मौजूद नगर पुलिस अधीक्षक अर्जुन उइके ने कहा कि, यह उपद्रव तब शुरू हुआ जब भक्त द्वारा आस्था मानने वाली ‘मन्नत वाली काली माता’ की प्रतिमा को नर्मदा में विसर्जन के लिए नर्मदा नदी में स्थित ग्वारीघाट में ले जा रहे थे।

पुलिस ने विसर्जन के दौरान भक्तों से कहा था कि वो देवीजी कि पर्तिमा को नदी में न विसर्जित करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा नदी को प्रदूषण से बचाने के लिए इसमें मूर्तिओं का विसर्जन प्रतिबंध हैं। इसी कारण से मूर्तिओं को नदी में विसर्जित नहीं किया जा सकता।

मूर्तियों के विसर्जन के लिए नदी के पास कुंड बनाया गया है। नगर पुलिस अधीक्षक अर्जुन उइके ने बताया कि लोगों ने मूर्ति विसर्जन जबरदस्ती करने की कोशिश की। और जब वह असफल हो गए तो उन्होनें पुलिस पर पथराव करना शुरू कर दिया।


नगर पुलिस अधीक्षक ने कहा, ‘‘पथराव में 10 पुलिसकर्मी घायल हुए हैं और पुलिस की पांच चार-पहिया वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। वहीं, आगजनी में पुलिस की सात मोटरसाइकिलें जल गईं।’’ ग्वारीघाट इलाके के स्थानीय लोगों ने बताया की भक्तों और पुलिस के बीच जमकर पथराव हुई थी। भक्तों की संख्या पुलिस बल से अधिक थी। अर्जुन उइके ने बताया की हालात को नियंत्रण करने के लिए शहर से अतिरिक्त पुलिस बल को भेजा गया।

इसी दौरान महिला कलेक्टर छवि भारद्वाज और पुलिस अधीक्षक अमित सिंह वहां पहुँच गए। जिसके कारण उपद्रवी तितर-बितर हो गए। पुलिस अधीक्षक सिंह ने कहा, ‘‘हमने केवल 10 मिनट में ही स्थिति पर काबू कर लिया। उपद्रवियों को भगाने में कलेक्टर मैडम भी एक्शन में आईं थीं।’’

अमित सिंह ने कहा की इस मामले में आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है और मामले कि जांच की जा रही हैं। नगर पुलिस अधीक्षक अर्जुन उइके ने बताया की मामलें को नियंत्रण करने के लिए पुलिस ने हल्का लाठीचार्ज किया और आँसू गैस के गोले भी छोड़े थें। उन्होनें कहा की ये सब होने के पश्चात उन्होनें काली माता का विसर्जन, कुंड में कर दिया और अब क्षेत्र में शांति बहाल है।

बता दें की लटकारी के पड़ाव में रखी जाने वाली मूर्ति मन्नत काली माता के नाम से प्रसिद्ध है। लटकरी से ग्वारीघाट की दूरी लगभग 8 किलोमीटर की है। विसर्जन के जुलुस को यह पहुंचने में लगभग 16 घंटे लगता है। सोमवार को त्रयोदशो के अवसर पर जुलुस दोपहर 2 बजे शुरू हुआ और आज (24 अक्टूबर) को 7: 30 बजे ग्वारीघाट पहुंचा।

पुलिस द्वारा नर्मदा नदी मार्ग पर जेसीबी मशीन और बैरिकेट लगाकर बंद कर दिया था। दुर्गा पूजा के अवसर पर हर साल भक्त ‘मन्नत वाली काली माता बिठाते हैं। और बाद में पूजा समाप्त होने के बाद मूर्ति को विसर्जित कर दिया जाता है।

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