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अर्थव्यवस्था को लेकर पूर्व RBI गवर्नर उर्जित पटेल ने मोदी सरकार को दी चेतावनी

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(Image credits: The News Minute)

एक बार फिर रिजर्व बैंक के पूर्व गवर्नर उर्जित पटेल ने मोदी पर बड़ा हमला बोला है। अक्सर उर्जित पटेल मोदी और उनकी सरकार की पोल खोलते नजर आते है और इस बार भी ऐसा ही कुछ उर्जित ने कहा है। बैंको के साथ हुए बड़े घोटाले और अर्थव्यवस्था को लेकर उर्जित पटेल ने कई बार मोदी को लताड़ा है। इस बार उर्जित पटेल ने बैंको पर बन रहे दबाव को लेकर बयान दिया है।

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उर्जित पटेल ने बैंकों पर अधिक कर्ज देने के लिए दबाव बनाने पर चेतावनी दी है। पटेल ने कहा है कि अर्थव्यवस्था में तेजी के मद्देनजर सरकार के इस दबाव के बाद राजकोषीय घाटा बढ़ने के साथ ही कर्ज डूबने की समस्या काफी बढ़ जाएगी। पिछले साल दिसंबर में आरबीआई गवर्नर का पद छोड़ने के बाद पटेल ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी राय सबके सामने व्यक्त की है।

पटेल ने मोदी सरकार के साथ विवाद के बाद अपना पद छोड़ने का फैसला लिया था। पटेल स्टैनफोर्ड के वार्षिक सम्मेलन में भारतीय आर्थिक नीति विषय पर बोल रहे थे उसी समय मोदी पर निशाना साधते हुए पटेल ने कहा कि बैंक जरूरत से अधिक कर्ज देते रहे। ऐसे में सरकार ने अपनी भूमिका को सही तरीके से नहीं निभाया। उन्होंने कहा कि नियामक के रूप में आरबीआई को भी इस संबंध में कदम उठाना चाहिए था।

पटेल ने यह भी कहा कि साल 2014 से पहले सभी हितधारक सरकार, आरबीआई, बैंक अपनी भूमिका सही तरीके से निभाने में असफल रहे। इनकी असफलता के कारण ही बैंकिंग सेक्टर में ‘गड़बड़ी’ की स्थिति पैदा हुई। पटेल ने इस बात पर जोर दिया कि हमें पुरानी राह पर लौटने का लालच छोड़ना होगा। उन्होंने कहा कि, मौद्रिक नीति पर राजकोषीय दबदबे के बाद अब बैंकिंग नियमनों पर राजकोषीय दबदबा देख रहे हैं।

उर्जित पटेल ने कहा कि वित्तीय प्रणाली में आपसी संपर्क को ध्यान में रखते हुए गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों यानि एनबीएफसी की संपत्ति की गुणवत्ता समीक्षा से नहीं बचा जा सकता है। पटेल ने बोला कि शॉर्टकट या समस्याओं को दबाने से बात नहीं बनेगी। भविषय में निवेश बढ़ाने से ही स्थिति में सुधार होगा। उन्होंने कहा कि संपत्तियों का मूल्यांकन एनबीएफसी के लिए जरूरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि वे भी आर्थिक निकाय का ही हिस्सा हैं।


पटेल ने कहा कि भारतीय बैंकों का प्रोविजन कवरेज अनुपात बहुत कम है। भारत का रिकवरी और प्रोविजन कवरेज अनुपात 77 है जबकि मेक्सिको का 223, चीन का 218, ब्राजील का 182 है। सरकार की बैंकिंग नीतियों की आलोचना करते हुए पटेल ने कहा, ‘प्रधान (प्रभावी) मालिक को सरकारी बैंकों से जब तक लाभांश के रूप में मोटी राशि मिल रही थी, उसने सार्वजनिक बैंक में रिस्क कंट्रोल पर कोई सवाल नहीं उठाए।’ सरकार ने अर्थव्यवस्था में तेज वृद्धि दर के लिए बैंकों को अधिक कर्ज देने के लिए प्रेरित किया।

मोदी सरकार ने विकास का लालच देकर देकर देश की जनता और उनके विकास के साथ काफी बड़ा धोका किया है। बैंको को हुए नुक्सान की भरपाई करना सरकार के लिए काफी मुश्किल है परन्तु सरकार ऐसे जरूरी मुद्दों को छोड़ कर अन्य बातो में लगी है। जब तक बैंको को हुए घाटे को लेकर सरकार कड़े कदम नहीं उठाएगी तब तक देश का विकास नहीं हो सकता।

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