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सुब्रमण्यम स्वामी ने नई आर्थिक नीति पर सवाल उठाए सवाल, कहा पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को गुडबाय कहने के लिए तैयार हो जाइये।

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भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने नई आर्थिक नीति पर सवाल उठाते हुए का कि यदि नई आर्थिक नीति जल्द लागू नहीं की गई तो भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच सकता है। उन्होंने अपनी ही पार्टी पर भारत के 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था पर सवाल खड़े किये है। उन्होंने कहा की जिस प्रकार से भारत की अर्थव्यवस्था के हालत है भारत के लिए पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य को हासिल करना मुश्किल है। उनका यह बयान ऐसे समय पर आया है जब एक दिन पहले ही 2019-20 की पहली तिमाही के लिए जीडीपी की वृद्धि दर घटकर 5 प्रतिशत रह गई है। यह पिछले छह सालों में सबसे कम है।

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स्वामी ने ट्वीट कर लिखा, ‘यदि कोई नई आर्थिक नीति नहीं लाई जाती है तो पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था को गुडबाय कहने के लिए तैयार हो जाइये। अकेले केवल साहस या केवल ज्ञान चरमराती अर्थव्यवस्था को नहीं बचा सकते हैं। इसके लिए दोनों की जरूरत है। आज हमारे पास दोनों में से कुछ नहीं है।’ अर्थव्यवस्था में सुस्ती की समस्या से जूझ रही केन्द्र सरकार को आर्थिक विकास दर के मोर्चे पर भी झटका लगा है। संसद में जब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट पेश किया था तो उन्होंने देश के सामने पांच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था का लक्ष्य रखा था।

प्रधानमंत्री ने भी कहा था कि यदि हम सब मिलकर काम करेंगे तो यह लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। इसी लक्ष्य पर स्वामी ने ट्वीट करके इसे गुडबाय कहने को तैयार रहने के लिए कहा है। अर्थव्यवस्था को लेकर कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘लगातार कई तिमाहियों से मंदी की स्थिति बनी हुई है। लेकिन सरकार इससे निपटने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है। हमें लगता है कि शायद भाजपा सरकार को समझ नहीं आ रहा कि क्या किया जाए? ऐसे में जिम्मेदार विपक्ष के नाते हमारे कुछ सुझाव हैं।’

सरकार लगातार कई कदम उठा रही है जिसमें आर्थिक मंदी को रोकने के लिए बड़े पैमाने पर बैंकों का विलय करना शामिल है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि सरकार निवेश पर ध्यान नहीं देती है तो अर्थव्यस्था को संभालना मुश्किल हो जाएगा। पिछले कुछ महीनों से कमजोर मांग और निवेश की कमी के कारण मुख्य उद्योगों की वृद्धि में मंदी दिखाई दे रही है। मंदी का असर सबसे ज्यादा जिन क्षेत्रों पर पड़ा है उसमें ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग और रीयल एस्टेट शामिल है। भारत में आई यह मंदी कोई अचानक नहीं हुई है यह केंद्र सरकार की नीतियों का ही नतीजा मानी जा रही है, केंद्र सरकार ने बिना कुछ भविष्य की सोचे समझे कई बड़े फैसले ले लिए जिसका असर आज भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ता नज़र आ रहा है। 

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