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अगर कॉलेजियम की चली तो क्या मिल सकता है भारत को दूसरा दलित सीजेआई?

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(Image Credits: Scroll.in)

सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम को जल्द ही बॉम्बे हाईकोर्ट के जज भूषण रामकृष्ण गवई को सर्वोच्च न्यायालय का जज बनाये जाने का उम्मीद है। उन्हें भारत के दूसरे दलित मुख्य न्यायधीश बनाये जाने के लिए मंच तैयार हो रहा है।

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भारत के पहले दलित सीजेई, केजी बालकृष्ण 11 मई 2010 को सेवानिवृत हुए थे। अगर जस्टिस गवई की नियुक्ति फाइनल हो जाती है तो वह सीजेआई के रूप में 13 मई 2025 में शपथ ले रहे होंगे। वह बालकृष्णन के सेवानिवृत्त होने के बाद भारत की सर्वोच्च न्यायालय में पहले दलित न्यायाधीश भी हो जायेंगे।

जस्टिस गवई पुरे भारत हाईकोर्ट के जजों में वरिष्ठता के लिहाज से 10वें स्थान पर है। उन्हें पदोन्नत किया जाना नरेंद्र मोदी सरकार के उस मांग के तहत आता है, जिसमें उन्होंने उच्च न्यायपालिका में अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के जजों को सीजीआई बनाये जाने की गुजारिश करी थी। पहले की सरकारों ने भी इस तरह के कदम उठाए हैं।

सुप्रीम कोर्ट के सूत्रों ने डी प्रिंट को बताया कि जस्टिस गवई के साथ ही हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुर्यकांत की पदोन्नति को लेकर हालिया कॉलेजियम की मीटिंग में चर्चा हुई थी। और सरकार को अंतिम निर्णय लेने के बारे में जल्द ही सूचित कर दिया जाएगा।

अगर उन्हें सुप्रीम कोर्ट में नियक्त किया जाता है तो जस्टिस सौर्यकांत जस्टिस गवई के बाद सीजीआई की दौड़ में होंगे। जस्टिस सौर्यकांत की पदोन्नति उनके पैरेंट हाईकोर्ट पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट को भी प्रतिनिधत्व देगा, जहां से केवल एक न्यायाधीश ही सुप्रीम कोर्ट में अपनी जगह बना पाए हैं।


फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में 28 जज हैं, जिसे संख्या बढ़ाकर 31 तक किया जाना है। इन 28 जजों में से एक जस्टिस एके सीकरी 6 मार्च को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
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जज लोया की मृत्यु के दौरान साथ थे जस्टिस गवई 

बता दें की जस्टिस गवई 2017 में उस समय चर्चा में आये थे, जब उन्होंने सीबीआई जज बीएच लोया के परिजनों द्वारा फाउल प्ले के आरोप का पुरजोर विरोध किया था। जज बीएच लोया की कथित तौर पर हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी। यह तब हुआ था जब वह नागपुर में एक शादी समारेह में गए थे। उस समय जज लोया सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ के मामले में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के खिलाफ सुनवाई कर रहे थे। शाह को मामले से तब से छुट्टी दे दी गई है।

जब जज लोया के परिवार, ने कैरवान मैगजीन के साक्षात्कार में उनकी मौत की परिस्थितियों पर कुछ सवाल उठाये थे तो उस दौरान जस्टिस गवई भी शादी समारोह में थे, जिन्होंने उन आरोपों को खारिज किया था। परिवार ने कहा था कि वह अकेले शख्स थे जो जज लोया को ऑटो रिक्शा से अस्पताल ले गये। और उनके कपड़ों पर खून लगा था- दोनों दावों को जस्टिस गवई ने नकार दिया था।

अगर जस्टिस सूर्यकांत के संदर्भ में देखा जाता है तो पिछले वर्ष अक्टूबर में उन्हें हिमाचल प्रदेश के हाईकोर्ट के न्यायाधीश के रूप में पदोन्नत करने वाले कॉलेजियम के सुझाव पर भी सरकार ने बहुत अधिक समय लगा दिया था।

सूत्रों के अनुसार यदि बाकी चीजों की बात करें तो सरकार, नैशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष आदर्श कुमार गोयल द्वारा बतौर सहायक जज भेजे गए पत्रों को जिसमें शिकायत भी शामिल थी, को देखना चाहती थी।

सूत्र से पता चला है कि,‘जज और उसके परिवार से संबधित कुछ प्रापर्टी का भी मैटर था, जिसे लेकर जस्टिस गोयल ने शिकायत दर्ज कराई थी। ’ ‘कंप्लेन में किए गए दावों को बेबुनियाद माना गया और उस समय केवल बतौर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के जज के रूप में उनकी नियुक्ति का ही रास्ता साफ हुआ था’

(News Source: Theprint)

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