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योगी राज में दलितों की ख़बर दिखाना गुनाह, छह और पत्रकारों के ख़िलाफ़ मामला दर्ज

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उत्तर प्रदेश सरकार अब अपनी नाकामयाबियों को छुपाने के लिए पत्रकारों को निशाना बना रही है। योगी राज में स्कूलों में होने वाले भेदभाव की पोल जब खुलकर जनता के सामने आने लगी तो प्रशासन के हाथ पाव फूलने लगे है। इसलिए अब योगी सरकार उन पत्रकारों को ही हिरासत मे ले रही है जो सरकार की सच्चाई लोगो के सामने ला रहे है। हाल ही में उत्तर प्रदेश में छह पत्रकारों के खिलाफ केस दर्ज़ किया गया है।

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 उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में मिड-डे मील के तहत बच्चों को नमक-रोटी दिए जाने की खबर करने के कारण प्रशासन द्वारा एक पत्रकार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए जाने के बाद छह अन्य पत्रकारों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करा दिया गया है। इसमें से एक पत्रकार को गिरफ्तार कर लिया गया है।

आजमगढ़ जिले में सरकारी स्‍कूल के अंदर बच्‍चों के झाड़ू लगाने का वीडियो बनाने वाले एक पत्रकार को पुलिस ने मामला दर्ज करके गिरफ्तार कर लिया है,
बच्चों द्वारा झाड़ू लगाने की फोटो खींचने वाले पत्रकार के साथी पत्रकार ने आरोप लगाया है कि उन्हें इसलिए गिरफ्तार किया गया क्यूंकि वह स्कूलों में दलितों के बच्चो को झाड़ू लगाने का वीडियो बना सरकार की सच्चाई समाने लाना छह रहे थे।

 पत्रकार को सरकारी काम में बाधा डालने और रंगदारी मांगने के झूठे आरोपों में गिरफ्तार किया गया है। इस मामले में कई पत्रकारों ने जिलाधिकारी एनपी सिंह से मुलाकात की और उन्हें अवैध गिरफ्तारी के बारे में जानकारी दी।

जिलाधिकारी ने कहा, ‘पत्रकारों के साथ अन्याय नहीं किया जाएगा। हम मामले को देखेंगे.’ उन्होंने मामले की जांच के आदेश दिए हैं। झाड़ू लगते फोटो लेने वाले स्थानीय पत्रकार संतोष जायसवाल को पिछले शुक्रवार को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने स्कूल में बच्चों के झाड़ू लगाने की फोटो खींच ली थी और स्कूल प्रशासन के ‘अवैध कृत्य’ की जानकारी देने के लिए पुलिस को फोन किया था।


फ़ोन करने के बाद पुलिस  स्कूल पहुंच गई और पत्रकार जायसवाल और उदयपुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक राधे श्याम यादव को थाने ले गई। फूलपुर थाने में प्रधानाध्यापक ने पत्रकार जायसवाल के खिलाफ तहरीर दी  जिसके आधार पर उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई और उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। विद्यालय के प्रधानाध्यापक ने यह आरोप लगा दिया की घटना के दिन पत्रकार जायसवाल स्कूल आए और बच्चों को झाड़ू लगाने को कहा ताकि इसका फोटो खींचा जा सके।

पत्रकार के खिलाफ छह सितंबर को प्राथमिकी संख्या 237 दर्ज की गई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि जायसवाल अक्सर स्कूल आते थे और पुरुष एवं महिला शिक्षकों से तथा छात्रों से बदसुलूकी करते थे। पुलिस और प्रशासन की मिली भगत के कारण संगीन धाराओं के साथ पत्रकार को गिरफ्तार किया गया किया गया है।  

वही दूसरी ओर मंडावर थाना क्षेत्र के तहत बसी गांव में एक विधवा दलित महिला ने अगस्त माह के अंत में थाने में एक तहरीर देकर आरोप लगाया था कि पड़ोस के कुछ दबंग लोगों ने सरकारी नल से पानी भरने गयी उनकी बेटी को पानी नहीं भरने दिया और उसके साथ अभद्र व्यवहार भी किया।

जिसके बाद इस घटना की खबर प्रकाशित होने पर दो नामजद -पत्रकार शकील अहमद और पत्रकार आशीष तोमर- के अलावा तीन अन्य पत्रकारों के खिलाफ मंडावर थाना में सात सितंबर को एक रिपोर्ट दर्ज की गई। इसमें पुलिस की छवि धूमिल करने,सामाजिक समरसता नष्ट करने, जातिगत तनाव पैदा करने और राष्ट्रीय सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने जैसे आरोप परकारो पर लगा दिए गए। 

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