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दलित छात्रों के साथ खेलकूद में भेदभाव करने का चौका देने वाला मामला आया सामने

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देश के अलग अलग कोने से लगतार दलित छात्रों के साथ भेदभाव करने की खबरे बढ़ती ही जा रही है। जहा एक तरफ उत्तर प्रदेश के मिर्ज़ापुर जिले के एक सरकारी स्कूल में बच्चों को केंद्र सरकार के योजना के तहत मिलने वाले मिड-डे मील के तौर पर नमक के साथ रोटी खाते देखने का वीडियो वायरल हुआ वही वही उसके बाद अब खबर हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले से सामने आई है।

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हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिले में प्राइमरी स्कूल की खेल प्रतियोगिता में दलित समाज के बच्चों के साथ भेदभाव का मामला सामने आया है।  इस घटना के खिलाफ पीड़ित ग्रामीणों ने उपायुक्त से लिखित में शिकायत की है। ग्रामीणों ने स्कूल के अध्यापकों पर बच्चों के साथ भेदभाव करने के आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों ने उपायुक्त को लिखी गई चिट्ठी में आरोप लगाए हैं कि दलित समाज  के दो बच्चों को खेलने के लिए अध्यापको ने उन्हें स्पोर्ट्स किट नहीं दिए। बिना स्पोर्ट्स किट के ही दोनों बच्चों को खेल प्रतियोगिता में भाग लेने पर मजबूर किया गया।

शायद स्कूल प्रशासन को यह भय सता रहा होगा की कही दलित समाज  के बच्चो द्वारा स्पोर्ट्स किट का प्रयोग करने से वो अछूत न हो जाये या शायद वो दलित समाज के बच्चो को आगे बढ़ते देखना ही नहीं चाहते। हर साल खेलकूद प्रतियोगिता के दौरान स्पोर्ट्स किट उपयोग में लाए जाते हैं। वही अनुसूचित जाति के बच्चे खेलकूद में भाग लेने के लिए जिन कपड़ों को पहनते हैं, उन्हें सवर्ण समाज के बच्चे नहीं पहनते हैं। इससे साफ है कि खेलकूद प्रतियोगिता के दौरान जाति के नाम पर बच्चों के साथ भेदभाव किए जाते हैं।

शायद बेहतर प्रदर्शन के बाद भी उन्हें प्रोत्साहित नहीं किया जाता जितना सवर्ण समाज के बच्चो को किया जाता है। स्कूल द्वारा किए जा रहे इस भेदभाव की जानकारी जब दूसरे गांव के दलित परिवारों को हुई तब उन्होंने अपने बच्चों को जोनल स्तर की खेलकूद प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए नहीं भेजा। ग्रामीणों ने आरोप लगाए कि कुल्लू  में हर साल छुआछूत की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। आज 21वीं सदी में भी लोगों की सोच नहीं बदली है।  इसके खिलाफ ग्रामीणों ने प्रदेश सरकार से कार्रवाई किए जाने की मांग की है। 


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