fbpx
ट्रेंडिंग  
ट्रेंडिंग  
देश

नाबालिग मुस्लिम लड़की शादी मामला: सुप्रीम कोर्ट में हो सकता है तय? कब और कौन सा इस्लामिक कानून होगा लागू

Minor-Muslim-girl-marriage-case:-can-be-decided-in-Supreme-Court?-When-and-which-Islamic-law-will-apply
(image credits: the hindu)

हाल ही में एक नाबालिग मुस्लिम लड़की द्वारा अपने विवाह के सन्दर्भ में हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की गई। जिस पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने उत्तर प्रदेश के गृह सचिव को तलब किया। सुप्रीम कोर्ट ने नाराजगी भरे लहजे में कहा है कि सरकार को ऐसे मामले में फर्क नहीं पड़ता है इसलिए गृह सचिव 23 सितंबर को हाजिर हों।

Advertisement

दरअसल मुस्लिम लड़की के विवाह को हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया और लड़की को शेल्टर होम भेजने के आदेश दिए। जिसके बाद लड़की ने उच्चतम न्याययालय में यचिका दाखिल करते हुए बताया, रजोस्वला ( प्यूबर्टी) होने के बाद मुस्लिम लड़की को शादी का अधिकार मिल जाता है। उसने मुस्लिम कानून के हिसाब से निकाह किया है और अपनी वैवाहिक जिंदगी जीने को आजाद है।

देखा जाए तो इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट में अपने नजरिये से सुनवाई करेगा। और यह भी हो सकता है की मुस्लिम आबादी के लिए देश का कानून और इस्लामिक कानून में से कौन सा कब, कहां और कैसे लागू होगा यह भी कोर्ट द्वारा तय किया जाएगा।

इसी आधार पर उसने शादी की तय संवैधानिक उम्र 18 साल होने से पहले किए गए अपने विवाह को वैध घोषित करने की गुहार लगाई। वहीं अब सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दे दी। कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि वह शादीशुदा है. ऐसे में उसे दांपत्य जीवन बसर करने की इजाजत दी जाए।

दरअसल शादी के वक्त लड़की की उम्र 16 साल बताए जाने के बाद निचली अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि लड़की नाबालिग है। ऐसे में उसे शेल्टर होम भेजा जाए। इसके बाद लड़की ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल कर निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने भी निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखते हुए कहा कि याचिकाकर्ता लड़की नाबालिग है और वह अपने माता पिता के साथ नहीं रहना चाहती, लिहाजा उसे शेल्टर होम में भेजने का आदेश सही है।


इस आदेश के साथ हाईकोर्ट ने शादी को शून्य करार दे दिया। जिसके बाद लड़की ने सुप्रीम कोर्ट में अपने वकील दुष्यंत पराशर के जरिये याचिका में कहा की हाईकोर्ट इस तथ्य को मानने में विफल रहा है कि उसका निकाह मुस्लिम कानून के अनुसार हुआ है।

आपको बता दें की याचिका में लड़की ने धार्मिक मान्यताओं का पालन करने और स्वतंत्रता के अधिकार की रक्षा के लिए दलील दी है कि वह एक युवक से प्रेम करती है और इस साल जून में मुस्लिम कानून के अनुसार उनका निकाह हो चुका है।

खैर अब देखना यह है की उच्चतम न्यायालय इस पूरे मामले में किस प्रकार सुनवाई करेगा। यहां गौर करने वाली बात यह भी होगी की क्या सुप्रीम कोर्ट का फैसला लड़की के पक्ष में होगा या कोर्ट नाबालिग के खिलाफ अपना फैसला सुनाएगा।

Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

To Top

© copyright reserved National Dastak. All right reserved