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मोदी सरकार ने देश की जनता को दिया एक बार फिर झटका, लोगो की बढ़ेंगी मुसीबतें

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(image credits: india today)

मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल के दौरान नोटबंदी जैसे फैसले के कारण लोगो को काफी नुकसान उठाना पड़ा था। इसी तरह मौजूदा सरकार द्वारा लाये गए GST गुड्स एंड सर्विसेस टैक्स के कारण मध्यवर्ग और छोटे व्यापारियो को काफी परेशानी झेलनी पड़ी थी। कुछ इसी प्रकार देश में खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने से मोदी सरकार में खुदरा मुद्रास्फीति की दरों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। जो की जून में इससे पूर्व महीने के मुकाबले बढ़कर 3.18 प्रतिशत पर पहुंच गई।

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दरअसल मुद्रास्फीति का अर्थ यह होता है कि, जब किसी अर्थव्यवस्था में सामान्य कीमत स्तर लगातार बढ़े और मुद्रा का मूल्य कम हो जाए। यह गणितीय आकलन पर आधारित एक अर्थशास्त्रीय अवधारणा है। जिससे बाजार में मुद्रा का प्रसार व वस्तुओ की कीमतों में वृद्धि या कमी की गणना की जाती है।

इससे पहले मई में मुद्रास्फीति सिर्फ 3.05 फीसदी थी। लेकिन फिलहाल यह पिछले आठ महीने में सबसे ज्यादा दर्ज की गई है। अर्थव्यवस्था के मामले पर केंद्र की मोदी सरकार को एकबार फिर बड़ा झटका लगा है। वहीं दूसरी ओर इसका असर सीधा सीधा आम आदमी के जेब पर पड़ेगा।

बीजेपी सरकार में खाद्य वस्तुओं के कीमतों में बढोत्तरी होने से देश की अधिकतर जनसंख्या प्रभावित हो सकती है। मौजूदा सरकार को मुद्रास्फीति की स्थिति में ध्यान देने की जरूरत है।

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के आंकड़े के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित खुदरा मुद्रास्फीति इस साल मई महीने में 3.05 प्रतिशत तथा जून 2018 में 4.92 प्रतिशत थी। खुदरा मुद्रास्फीति इस साल जनवरी से बढ़ रही है। जून में खाद्य वस्तुओं के दाम बढ़ने की वजह से खुदरा महंगाई दर में इजाफा देखा जा रहा है।


वहीं सीएसओ के उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित आंकड़ों के अनुसार खाद्य मुद्रास्फीति जून 2019 में 2.17 प्रतिशत थी जो इससे पूर्व माह में 1.83 प्रतिशत थी। प्रोटीन युक्त खाद्य पदार्थ जैसे अंडा, मांस और मछली की महंगाई दर जून में इससे पूर्व महीने के मुकाबले अधिक रही। हालांकि सब्जियों और फलों के मामले में मुद्रास्फीति की वृद्धि दर धीमी रही।

देश में मुद्रास्फीति के दरों में बढ़ोतरी से पता चलता है की एक बार फिर मौजूदा सरकार तमाम कोशिशें के बावजूद इससे निपटने में असफल रही। इतना ही ही नहीं मुद्रास्फीति के साथ साथ मई के दौरान औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार भी नरम पड़ती दिखाई दी। वहीं अब इसके साथ साथ खुदरा मुद्रास्फीति भी बढ़ती हुई देखी जा रही है ।

बता दें, रिजर्व बैंक मॉनिटरी पॉलिसी की बैठक में ब्याज दरों पर फैसला करने के दौरान खुदरा महंगाई के आंकड़ों पर गौर करता है। यह बैठक अगस्त में फिर एक बार होनी है। बैठक में उम्मीद जताई जा रही है कि इसमें इन सभी मसलों पर गौर किया जा सकता है।

मौजूदा सरकार चाहे विकास के बड़ी बड़ी बातें क्यों न कर ले, लेकिन सच्चाई तो यह है की मोदी सरकार आर्थिक नीतियों में ज्यादातर मौके पर असफल होती हुई दिखती है। जिसका खामियाजा देश की आम जनता को भुगतना पड़ता है।

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