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भाजपा नें 24 घंटो के भीतर माँगा सभी कम्पनियों से SC/STs का डाटा

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मोदी सरकार नें प्राइवेट कम्पनियों से SC/ST कर्मियों की जानकारी मांगी है, केंद्र की मोदी सरकार के मंत्रालय नें प्राइवेट व सरकारी कम्पनियों से उनके यहां काम कर रहे SC/ST कर्मचारियों का आंकड़ा मांगा है । इस बारे में देश के 3 बड़े अंग्रेजी अखबारों नें कुछ इनपुट्स के साथ ख़बर छापी है ।
 बिज़नेस टूडे की ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार केंद्र सरकार के अंतर्गत आने वाले श्रम और रोजगार मंत्रालय ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) में योगदान देने वाली कंपनियों को SC/ST कर्मचारियों की संख्या बताने के लिए कहा है।

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आपको बता दे की PF कार्यालयों के द्वारा दिल्ली, बेंगलुरु, चेन्नई की निजी फर्म कम्पनियो को दलित कर्मचारियों की जानकारी देने के लिए ई-मेल भेजा जा रहा है और सारी जानकारी मेल मिलने के 24 घंटे के भीतर देने को कहा गया है। सरकार की तरफ से यह आँकड़े मांगे जाने के बाद सवाल खड़े होने लगे है।  अधिकतर कंपनियों के पास इस तरह के जातिगत आँकड़े नहीं होते जिसके लिए उन्होंने थोड़ा समय देने की मांग भी की है पर वही सरकार की तरफ से यह आंकड़े बहुत ही जल्द भेजने के आदेश दिए गए है।

रिपोर्ट के अनुसार यह बताया जा रहा है की सरकार एससी, एसटी कर्मचारियों को सामाजिक सुरक्षा लाभ और वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान करने के लिए डेटा को एकत्रित कर रही है।  हालांकि जिन अखबारों नें रिपोर्ट छापी उसमें सरकार से कोई जानकारी नहीं मिली है कि इस तरह के जातिगत डेटा माँगने के पीछे असली वजह क्या है जबकि अलग अलग रिपोर्ट में अलग अलग क़यास लगाए गए हैं। सरकार की असली मंशा क्या है उसको सार्वजनिक रूप से नहीं बताया जा रहा है बस मीडिया और अखबार की रिपोर्ट कयास लगा रही है।

आज़तक नें अपने रिपोर्ट में कहा है की सरकार यह डाटा इसलिए मांग रही है टंकी प्राइवेट कम्पनियों में लंबे समय से उठ रहे आरक्षण की मांग पर सरकार विचार कर रही है पर सरकार की तरफ से ऐसा कुछ सामने नहीं आया है। मोदी सरकार जातिगत आंकड़ों का इस्तेमाल किस तरह से करेगी यह अभी भी एक पहेली बना हुआ है।  चौकाने वाली बात तो यह है की कप्म्पनियों को भेजे गए  ई-मेल में कंपनियों को सिर्फ एक दिन यानी 24 घंटे के भीतर ही यह आँकड़े देने को कहा गया है।

ईमेल के भीतर कुल कर्मचारियों की संख्या, एससी कर्मचारियों की संख्या और एसटी कर्मचारियों की संख्या बताएं जाने को कहा गया है और साथ में ईमेल के सब्जेक्ट में मोस्ट अर्जेंट भी लिखा हुआ है। सवाल यह खड़े को रहे है की कई राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं ऐसे में दलित पिछड़े वर्गों को लुभाने के लिए किसी भी प्रकार की घोषणा भाजपा सरकार का मास्टर प्लान भी बना सकती है जिसके लिए भाजपा सरकार इन आँकड़ो को इकठ्ठा कर रही है ताकि  दलित पिछड़े वर्गों के कर्मचारियों को लुभाया जा सके।


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