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पटेल की प्रतिमा को ‘पिलाया’ जा रहा है किसानों के हिस्सों का पानी, सूखे से परेशान हैं कच्छ के किसान

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(Image Credits: jantaserishta.com)

गुजरात में मौजूद स्टैच्यू ऑफ यूनिटी किसानो के लिए परेशानी का कारण बन गई है। नर्मदा नदी पर सरदार पटेल ने सरदार सरोवर बांध बनाने का सपना देखा था। जिसको अमल करते हुए देश के प्रथम प्रधानमंत्री पडित जवाहर लाल नेहरू ने 5 अप्रैल 1961 को इस बांध की नीँव रखी। परन्तु अब इस बांध पर बनाये गए सरदार पटेल की प्रतिमा ही किसानों की परेशानी का सबब बन चुकी है।

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दरअसल सरदार पटेल की प्रतिमा के आसपास बोटिंग के लिए इंदिरा सागर बांध से छोड़ा गया अतिरिक्त पानी सरदार सरोवर बांध की ओर मोड़ दिया गया है। जिसके कारण अकालग्रस्त कच्छ के किसानों की परेशानियां बढ़ गई है। हालात यह हो चुके हैं की नर्मदा से पानी चोरी की जा रही है और पानी के लिए कई स्थानों पर आंदोलन भी हो रहें हैं।

दुनिया के सबसे बड़े बांध सरोवर पर 3000 करोड़ की लागत से तैयार लोह पुरुष सरदार पटेल की प्रतिमा का अनावरण प्रधानमंत्री मोदी ने उनके जन्मदिवस के अवसर बड़े जोश से किया था।

सरदार सरोवर बांध से निकलने वाली नहरों का काम अभी तक पूरा नहीं किया गया है। राज्य सरकार पहले ही कच्छ क्षेत्र को अकालग्रस्त घोषित कर चुकी है। जिसके कारण कच्छ में जल के भीषण संकट के बीच पानी की मांग को लेकर जनता आंदोलन कर रही है।

पिछले कुछ दिनों से कच्छ क्षेत्र के मुख्य शहरों में बंद और प्रदर्शन लगातार किये जा रहें हैं। गुजरात सरकार द्वारा इलाकों में पानी पहुंचाने के तमाम दावों के बीच नर्मदा लाओ कच्छ बनाओ के बैनर पोस्टर के साथ भुज, अब्दसा, नखत्राणा, लखपत और कांडला इलाकों में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। यह समस्या इसलिए भी आई है क्योंकि रापर के आगे अभी नर्मदा नदी पर कार्य ही नहीं हो पाया है।


इंदिरा सागर का पानी सरदार सरोवर डायवर्ट किया गया

स्थानीय लोगों का यह कहना है की सरदार सरोवर बांध में इंदिरा सागर द्वारा छोड़ा गया अतिरिक्त पानी को डायवर्ट करने के कारण यह संकट आया है। सरदार सरोवर में सरदार पटेल की प्रतिमा ‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’ के पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बोटिंग की सुविधा शुरू की गई है। जिसके कारण न्यूनतम स्तर कायम रखना अनिवार्य है। इसके आलावा गुजरात सरकार सरदार सरोवर बांध पर वाटर एरोड्रम बनाने की तैयारी में है।

वाटर एयरोड्रम एक प्रकार का बड़ा जल क्षेत्र होता है, जहां पर सी प्लेन या एम्फीबियस एयरक्राफ्ट उतर और उड़ सकते हैं। यह प्रधानमंत्री की मनपसंद परियोजना है। उन्होनें गुजरात चुनाव में सी प्लेन का इस्तेमाल साबरमती तट से अंबाजी मंदिर तक जाने के लिए किया था।

नर्मदा नहर से चुराया जा रहा है पानी 

इस दौरान गुजरात के विभिन्न इलाकों में नर्मदा नहर का पानी चुराए जाने की घटनाएं सामने आ रही है। इसको देखते हुए प्रशासन ने अब तक 37 लोगों पर एफआईआर दर्ज किया है। इसकी जानकारी खुद गुजरात के उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल ने दी है, साथ में उन्होंनें यह कहा है की नर्मदा नदी से गैरकानूनी रूप से पानी लेने वालों के खिलाफ पुलिस और प्रशासन सख्त कार्रवाई कर रहा है।

नहर में मोटर लगाकर या अन्य किसी प्रकार से गैरकानूनी रूप से पानी का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आदेश दिया है। दरसअल किसान नहर में मोटर लगाने पर तब मजबूर होता है। जब नहर में पानी का स्तर इतना कम हो जाता है की वो खेतों तक नहीं पहुंच पाता।

ऐसे परिस्थितियों के बीच राज्य सरकार द्वारा सरदार सरोवर बांध पर वाटर एयरोड्रम बनाने के फैसले ने किसानों के जले पर नमक छिड़कने का कार्य किया है। कई किसान संगठनों ने कहा है कि यदि सरकार जल्द ही इसके लिए कोई कदम नहीं उठाती है तो पानी के लिए राज्यव्यापी आंदोलन किया जायगा।

बता दें की इस बार गुजरात में बारिश भी कम हुई है। जिसके कारण रबी फसलों की बुवाई पिछले साल के मुकाबले में 42 फीसदी कम हुई है। रबी की फसल मानसून के आलावा पूरी तरह नहरों की सिंचाई पर निर्भर करती है। गुजरात में इस साल 76.69 फीसदी ही बारिश हुई, जबकि कच्छ जिले में महज 26.21 फीसदी बारिश हुई। इसी कारण से कच्छ क्षेत्र में सिंचाई और पीने का पानी के लिए लोगो को संकट झेलना पड़ रहा है।

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