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PM जन औषधि योजना वाली दवाइयों से लोगो के स्वास्थ के साथ हुआ खिलवाड़

Pradhan Mantri Jan-Aushadhi Yojana
(image credits: Sarkari Yojana)

भारत के प्रधानमंत्री ‪नरेन्द्र मोदी‬ द्वारा‬ 1 जुलाई 2015 को प्रधानमंत्री जन औषधि योजना घोषित की गई जिसके तहत सरकार द्वारा उच्च गुणमवत्ता वाली जैनरिक दवाईयों के दाम बाजार मूल्य से कम किए जा रहें है। सरकार द्वारा ‘जन औषधि स्टोर’ बनाए गए हैं, जहां जेनरिक दवाईयां उपलब्ध करवाई जा रही है। क्यूंकि जेनरिक दवाईयां ब्रांडेड या फार्मा की दवाईयों के मुकाबले सस्ती होती है, जबकि प्रभावशाली उनके बराबर ही होती है।

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पर आपको यह बता दे की इन जैनरिक दवाइयों को बाजार में आने से पहले 25 मानकों और टेस्टो से गुजरना होता है और सभी मानकों पर खरे उतरने के बाद इन दवाइयों को बाजार में बिक्री के लिए उपलब्ध करवाया जाता है।

आपको बता दे की हाल ही के प्रधानमंत्री जन औषधि योजना तहत दी जाने वाली सस्ती दवाइयाँ 25 मानकों के अनुरूप नहीं पाई गई है इस बात की मीडिया रिपोर्ट से सामने आई है बताया जा रहा है कि इसमें कई सिरप, सुगर की दवाइयाँ, दर्द निवारक और हाइपरटेंशन जैसी बीमारियों की बहुत सी दवाएं शामिल है।

प्रधानमंत्री जन औषधि योजना में शामिल देश की करीब 18 फार्मा कंपनी की दवाइयों के 25 बैच गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतर सके हैं और इन कंपनियों में 17 निजी क्षेत्र और एक सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी शामिल की गई है इसके अलावा ब्यूरो ऑफ फार्मा पीएसयू ऑफ इंडियन ने जांच में बताया कि जनवरी 2018 से 18 कंपनियों की दवाओं के 25 बैच की गुणवत्ता मानकों के अनुरूप नहीं रही।

प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत बीपीपीआई द्वारा फार्मास्युटिकल कंपनियों से सस्ती जेनेरिक दवा खरीदी जाती है। उसके बाद इसकी आपूर्ति प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि परियोजना के तहत आने वाले विभिन्न जन औषधि केंद्रों को दी जाती है।


बीपीपीआई के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सचिन सिंह ने इस बारे में एक सवाल पर कहा, ‘जिन आपूर्तिकर्ताओं के उत्पाद गुणवत्ता मानकों पर खरे नहीं उतरे, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई है.’अमर उजाला में छपी खबर के अनुसार, बीपीपीआई की रिपोर्ट के मुताबिक जो बैच मानक के अनुरूप नहीं पाए गए हैं, उनमें एएमआर फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की मधुमेह-रोधी वोगिलबोस और हाईपरटेंशन की टेलमीसार्टन दवाओं का एक बैच शामिल है।

इसके अलावा नवकेतन फार्मा की दर्द-निवारक निमोसुलाइड और नेस्टर फार्मा पैरासिटामॉल के भी बैच मानक के अनुरूप नहीं मिले। आपको बता दे की ऐसे लगभग 18 फार्मा कंपनी की दवाइयां अपनी जाँच गुणवत्ता में खरे नहीं उतरे है।

बीपीपीआई ने इस साल फरवरी में प्रधानमंत्री जन औषधि योजना के तहत कुल 4677 जन औषधि केंद्रों के लिए 146 फार्मा कंपनियों से करार किया है. बीपीपीआई के सीईओ सचिन सिंह ने बताया, इन कंपनियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। अमानक दवाओं के इस्तेमाल पर तुरंत रोक लगा दी गई है।

ओवरसीज हेल्थ केयर, हनुकेम लैबोरेट्रीज, लीजेन हेल्थकेयर, एएमआर फार्मा इंडिया प्राइवेट लिमिटेड, जैकसन लैबोरेट्रीज, मस्कट हेल्थ सीरीज और टैरेस फार्मास्युटिकल्स को दो साल के लिए ब्लैक लिस्ट किया गया है।

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