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बहुजनों को जज बनता नहीं देखना चाहती सरकार, गैरकानूनी तरीके से नियम बदले

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पंजाब सरकार की कैप्टन अमरिंदर सिंह की सरकार ने दलितों से जुड़े एक मामले पर कदम उठाया है। पंजाब सरकार के इस फैसले के बाद सियासत गरमा गई है और सभी जगह उनके इस फैसले की निंदा की जा रही है। आपको बता दे की पंजाब सरकार ने पीसीएस-जे ज्यूडिशियल की परीक्षा में अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों को केवल चार मौके देने का फैसला लागू किया है।  जबकि इससे पहले तक अनुसूचित जाती वर्ग के लिए निर्धारित उम्र सीमा तक अनलिमिटेड परीक्षा देने का नियम लागू था। एससी, एसटी वर्ग के विधार्थियो के लिए सविधान में दिए गए आरक्षण के नियम के आधार पर ही उन्हें कुछ सहूलियत दी गई थी जो की पंजाब सरकार को अब रास नहीं आ रही।  

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पंजाब सरकार ने केंद्रीय अनुसूचित आयोग और राज्य एससी आयोग को जानकारी दिए बिना ही पीसीएस-जे में बदलाव किया है।  कैप्टन अमरिंदर सिंह सरकार के इस फैसले से राजनीति गरमा गई है।  पंजाब एकता पार्टी के अध्यक्ष सुखपाल सिंह खैरा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर फैसला बदलने के लिए कहा है। सुखपाल सिंह खैरा ने पीसीएस जे (ज्यूडिशियल) की परीक्षा के बारे में सरकार द्वारा लिए गए फैसले को एससी वर्ग के विद्यार्थियों के अधिकारों का हनन बताया है।  उन्होंने कहा है कि राज्य सरकार ने गुपचुप तरीके से एससी वर्ग के लिए बनी नीतियों में बड़ा बदलाव कर दिया है। 

खैरा ने कहा है, ‘पूरा फैसला गैरकानूनी तरीके से राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग और पंजाब एससी कमीशन की सलाह के बिना किया गया है, जबकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338(9) के अनुसार, दलितों को प्रभावित करने वाले किसी भी बड़े बदलाव के लिए नेशनल कमीशन फॉर शेड्यूल कास्ट की सलाह लेना, केंद्र और राज्य सरकारों के लिए अनिवार्य है। उन्होंने मांग की है कि राज्य सरकार द्वारा अनुसूचित जाति वर्ग के खिलाफ लिए गए उक्त फैसले को तुरंत वापस लिया जाए.’

बता दें कि कैप्टन अमरिंदर की सरकार ने 20 अक्तूबर 2009 में बने पंजाब स्टेट सिविल सर्विसेज नियम में बदलाव करके इसका नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया गया है।  इसके तहत पीसीएस (जे) परीक्षा में बैठने के लिए प्रत्येक उम्मीदवार को केवल चार मौके दिए जाएंगे। इसमें सभी समुदाय के अभ्यर्थी शामिल होंगे।  जबकि अभी तक अनुसूचित जाति के अभ्यर्थियों के लिए असीमित बार परीक्षा में बैठने की छूट थी। 

गौरतलब है कि भारत में पंजाब में दलितों का प्रतिशत सबसे ज्यादा है। राज्य में करीब 32 फीसदी दलित समुदाय की आबादी बताई जाती है।  ऐसे में कैप्टन अमरिंदर सरकार के फैसले से दलित समुदाय में नाराजगी बढ़ सकती है।  विपक्ष ने इसे लेकर कांग्रेस सरकार के खिलाफ हल्ला बोल दिया है।


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